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CJI Chandrachud: सुप्रीम कोर्ट चीफ जस्टिस बोले- भारत-बांग्लादेश में जीवित दस्तावेज हैं दोनों देशों के संविधान
Sat, 24 Feb 2024 07:26 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Sat, 24 Feb 2024 07:26 PM IST
सार
देश की सबसे बड़ी अदालत के न्यायाधीश चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि भारत और बांग्लादेश दोनों के बीच कई चीजें एक जैसी हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश संवैधानिक और न्यायिक प्रणालियों की परंपरा साझा करते हैं। इसका मकसद स्थिरता सुनिश्चित करना है।
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चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ (फाइल)
- फोटो : ANI
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने भारत और बांग्लादेश के संविधान पर अहम बात कही। उन्होंने कहा, दोनों देश अपने संविधान को 'जीवित दस्तावेज' के रूप में मान्यता देते हैं। बकौल सीजेआई चंद्रचूड़, हम मानते हैं कि हमारे संविधान जीवित दस्तावेज हैं। भारत की तरह बांग्लादेश के संविधान में भी घोषणा की गई है कि न केवल संविधान का निर्माण खुद लोगों द्वारा ही किया गया है, बल्कि संप्रभु राष्ट्रों के नागरिकों ने स्वयं इस संविधान को अंगीकार भी किया है।
उन्होंने बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना की मौजूदगी में दोनों देशों की कानूनी परंपरा पर चर्चा की। सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि दोनों देशों की साझा परंपरा का लक्ष्य स्थिरता है। हालांकि, स्थिरता को जड़ता या ठहराव समझने का भ्रम नहीं पालना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय और बांग्लादेश की अदालतों को विवाद का समाधान करने के लिए मध्यस्थता जैसी प्रथा को प्रोत्साहित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रतिकूल मुकदमों से बचने का सुझाव भी दिया।
सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि भारत और बांग्लादेश में प्रतिकूल मुकदमेबाजी औपनिवेशिक दौर की देन है। उन्होंने कहा कि इस परंपरा में एक पक्ष जीतता है, जबकि दूसरा पक्ष यानी प्रतिवादी को अदालत में हार का मुंह देखना पड़ता है। बकौल जस्टिस चंद्रचूड़, 'विवादों का समाधान करने के लिए मध्यस्थता की परंपरा भारत में बहुत पहले से मौजूद रही है।' उन्होंने कहा कि हमें अपनी विरासत और परंपराओं के आधार पर निर्माण करना चाहिए।
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चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि वैवाहिक विवादों जैसी आधुनिक चुनौतियों का सामना करने के लिए मध्यस्थता अधिक प्रभावी है। यह प्रणाली दक्षिण एशियाई सामाजिक मानदंडों के हिसाब से विकसित हुई है। उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक काल के बाद भारत और बांग्लादेश में कई अहम बदलाव देखे गए हैं। उन्होंने कहा कि हमारी पारंपरिक भूमिका दो पक्षों के बीच विवाद सुलझाने की है, लेकिन अब न्यायाधीशों को सुविधाप्रदाता जैसी भूमिका भी निभानी चाहिए। अब औपनिवेशिक कालखंड बीत चुका है।
जस्टिस चंद्रचूड़ के संबोधन से पहले बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने '21वीं सदी में दक्षिण एशिया की संवैधानिक अदालतें: भारत और बांग्लादेश से सबक' शीर्षक वाले दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। उन्होंने दो दिवसीय सम्मेलन के समापन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित किया। बांग्लादेश के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति ओबैदुल हसन ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। बांग्लादेश के कानून मंत्री अनीसुल हक, देश के कई मशहूर न्यायविद, वरिष्ठ वकील और देश की सुप्रीम कोर्ट के कई न्यायाधीश भी इस सम्मेलन में शरीक हुए।
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उन्होंने बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना की मौजूदगी में दोनों देशों की कानूनी परंपरा पर चर्चा की। सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि दोनों देशों की साझा परंपरा का लक्ष्य स्थिरता है। हालांकि, स्थिरता को जड़ता या ठहराव समझने का भ्रम नहीं पालना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय और बांग्लादेश की अदालतों को विवाद का समाधान करने के लिए मध्यस्थता जैसी प्रथा को प्रोत्साहित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रतिकूल मुकदमों से बचने का सुझाव भी दिया।
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सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि भारत और बांग्लादेश में प्रतिकूल मुकदमेबाजी औपनिवेशिक दौर की देन है। उन्होंने कहा कि इस परंपरा में एक पक्ष जीतता है, जबकि दूसरा पक्ष यानी प्रतिवादी को अदालत में हार का मुंह देखना पड़ता है। बकौल जस्टिस चंद्रचूड़, 'विवादों का समाधान करने के लिए मध्यस्थता की परंपरा भारत में बहुत पहले से मौजूद रही है।' उन्होंने कहा कि हमें अपनी विरासत और परंपराओं के आधार पर निर्माण करना चाहिए।
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चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि वैवाहिक विवादों जैसी आधुनिक चुनौतियों का सामना करने के लिए मध्यस्थता अधिक प्रभावी है। यह प्रणाली दक्षिण एशियाई सामाजिक मानदंडों के हिसाब से विकसित हुई है। उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक काल के बाद भारत और बांग्लादेश में कई अहम बदलाव देखे गए हैं। उन्होंने कहा कि हमारी पारंपरिक भूमिका दो पक्षों के बीच विवाद सुलझाने की है, लेकिन अब न्यायाधीशों को सुविधाप्रदाता जैसी भूमिका भी निभानी चाहिए। अब औपनिवेशिक कालखंड बीत चुका है।
जस्टिस चंद्रचूड़ के संबोधन से पहले बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने '21वीं सदी में दक्षिण एशिया की संवैधानिक अदालतें: भारत और बांग्लादेश से सबक' शीर्षक वाले दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। उन्होंने दो दिवसीय सम्मेलन के समापन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित किया। बांग्लादेश के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति ओबैदुल हसन ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। बांग्लादेश के कानून मंत्री अनीसुल हक, देश के कई मशहूर न्यायविद, वरिष्ठ वकील और देश की सुप्रीम कोर्ट के कई न्यायाधीश भी इस सम्मेलन में शरीक हुए।