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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन में बदलाव, अब पदाधिकारियों का कार्यकाल होगा दो साल, जानें नए नियम

Fri, 29 May 2026 11:25 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Fri, 29 May 2026 11:25 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के चुनावों और कार्यप्रणाली में बड़े सुधार लागू किए हैं। अब एससीबीए पदाधिकारियों का कार्यकाल एक साल की जगह दो साल होगा, जो 2027 से लागू होगा। अदालत ने मतदान और चुनाव लड़ने के लिए नए पात्रता नियम भी तय किए हैं।

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Supreme Court Changes Bar Association Office Bearers Tenure Now Set at Two Years
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन हुए ये बदलाव - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन यानी एससीबीए के चुनाव और उसकी कार्यप्रणाली में बड़े बदलाव लागू किए हैं। अदालत ने एससीबीए के पदाधिकारियों का कार्यकाल एक साल से बढ़ाकर दो साल करने का फैसला लिया है। हालांकि यह नया नियम वर्ष 2027 से लागू होगा। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए मतदान के नए नियम भी तय किए हैं। अदालत के इस फैसले को एससीबीए के इतिहास में बड़ा सुधार माना जा रहा है।
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सुप्रीम कोर्ट ने कार्यकाल बढ़ाने का फैसला क्यों लिया?
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि बार एसोसिएशन में स्थिरता और बेहतर कामकाज के लिए कार्यकाल बढ़ाना जरूरी है। अभी तक एससीबीए पदाधिकारियों का कार्यकाल केवल एक साल का होता था। अदालत का मानना है कि इतने कम समय में किसी भी पदाधिकारी के लिए योजनाओं को पूरी तरह लागू करना मुश्किल होता है। इसलिए अब कार्यकारी समिति का कार्यकाल दो साल किया गया है। अदालत ने साफ किया कि यह व्यवस्था 2027 से लागू होगी ताकि नई चुनाव प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से लागू किया जा सके।
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चुनाव लड़ने और दोबारा मौका पाने के लिए क्या नया नियम बनाया गया?
सुप्रीम कोर्ट ने पदाधिकारियों के लिए ‘कूलिंग ऑफ’ नियम भी लागू किया है। अदालत ने कहा कि कोई भी पदाधिकारी अपना कार्यकाल पूरा करने के तुरंत बाद फिर चुनाव नहीं लड़ सकेगा। उसे दोबारा चुनाव मैदान में उतरने से पहले एक साल का इंतजार करना होगा। अदालत का मानना है कि इससे बार एसोसिएशन में नए लोगों को नेतृत्व का मौका मिलेगा और चुनाव प्रक्रिया में संतुलन बना रहेगा। अदालत ने इन सुधारों को लागू करने के लिए एससीबीए चुनाव कराने हेतु एक महीने का अतिरिक्त समय भी दिया है।
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मतदान के लिए वकीलों की पात्रता कैसे तय की गई?
सुप्रीम कोर्ट ने मतदान के लिए नए पात्रता नियम भी तय किए हैं। अदालत ने कहा कि वही वकील मतदान कर सकेंगे, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट में कम से कम 50 बार पेशी दी हो। महिला वकीलों के लिए यह सीमा 30 पेशी रखी गई है। वहीं दिव्यांग वकीलों के लिए केवल पांच पेशियां पर्याप्त होंगी। अदालत ने यह भी कहा कि कुल पेशियों में कम से कम 75 प्रतिशत उपस्थिति शारीरिक रूप से अदालत में होनी चाहिए। इसकी पुष्टि अदालत के रिकॉर्ड और आदेशों के आधार पर की जाएगी।


एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड के लिए क्या नियम बनाए गए?
एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड यानी एओआर के लिए भी अलग पात्रता तय की गई है। अदालत ने कहा कि ऐसे वकीलों को मतदान का अधिकार पाने के लिए पिछले दो वर्षों में औसतन 20 दाखिले प्रति वर्ष करने होंगे। दिव्यांग एओआर के लिए यह सीमा पांच दाखिले प्रति वर्ष रखी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा, फरीदाबाद और गाजियाबाद यानी पूरे एनसीआर में रहने वाले सभी वरिष्ठ अधिवक्ता मतदान के पात्र होंगे। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नामित वरिष्ठ अधिवक्ताओं को भी मतदान का अधिकार मिलेगा।

किन सिफारिशों के आधार पर लागू किए गए सुधार?
सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि ये बदलाव पूर्व जस्टिस एल. नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों के आधार पर किए गए हैं। अदालत ने एससीबीए और दूसरे पक्षों के सुझावों पर भी विचार किया। अदालत का कहना है कि इन सुधारों से एससीबीए की चुनाव प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी, निष्पक्ष और प्रभावी बनेगी। साथ ही बार एसोसिएशन में कामकाज की निरंतरता और जवाबदेही भी मजबूत होगी। कानूनी विशेषज्ञ इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के लिए एक बड़ा संस्थागत सुधार मान रहे हैं।
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