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Supreme Court: वायुसेना में महिलाओं को स्थायी कमीशन देने में कोई भेदभाव नहीं, केंद्र ने दाखिल किया जवाब

Wed, 10 Dec 2025 08:53 PM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Wed, 10 Dec 2025 08:53 PM IST
सार

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि आईएएफ में महिलाओं के स्थायी कमीशन में कोई भेदभाव नहीं हुआ। 2019 से 177 महिलाओं और 243 पुरुषों को स्थायी कमीशन मिला।

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Supreme Court: Centre Denies Discrimination in Granting Permanent Commission to Women Officers in IAF
सुप्रीम कोर्ट (फाइल तस्वीर) - फोटो : ANI

विस्तार

केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया कि भारतीय वायुसेना (आईएएफ) में शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने में किसी भी तरह का भेदभाव नहीं हुआ है। सरकार ने बताया कि 2019 से अब तक 243 पुरुष और 177 महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन दिया जा चुका है।

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मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्ज्वल भूयान और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने महिलाओं की ओर से दायर उन याचिकाओं पर सुनवाई पूरी कर ली, जिनमें स्थायी कमीशन न मिलने पर आपत्ति जताई गई थी। कोर्ट अब अपना फैसला सुरक्षित रख चुका है।
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केंद्र का पक्ष: 'न कोई भेदभाव, न कोई पक्षपात'
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि 2022 में केंद्र की मंजूरी के बाद NDA के माध्यम से महिलाओं की भर्ती शुरू हुई और प्रशिक्षण पूरा होने पर उन्हें सीधे स्थायी कमीशन दिया जाएगा। भाटी ने बताया कि जिन महिला अधिकारियों ने भेदभाव का आरोप लगाया है, उन्हें 2019 की एचआर नीति के तहत तीन बार मौका दिया गया, लेकिन वे न्यूनतम प्रदर्शन मानक पर खरा नहीं उतरीं या उपलब्ध सीटों के मुताबिक मेरिट में नहीं आ सकीं। उन्होंने कहा कि सीमित वैकेंसी के कारण सभी अधिकारियों को स्थायी कमीशन देना संभव नहीं है।
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याचिकाकर्ताओं का दावा: 'महिलाओं को बराबरी का मौका नहीं मिला'
महिला अधिकारियों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मानेका गुरुस्वामी ने कहा कि एचआर नीति में बदलाव के कारण कई महिलाओं को स्थायी कमीशन से वंचित कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि गर्भावस्था या मातृत्व अवकाश पर होने के कारण भी कुछ महिलाओं के मामलों की समीक्षा सही तरीके से नहीं हुई, जो संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। गुरुस्वामी ने कहा कि महिलाओं को पुरुष अधिकारियों जितना समान अवसर नहीं दिया गया।

कोर्ट की टिप्पणी: 'देश आपकी सेवा पर गर्व करता है'
सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि एसएससी महिला अधिकारी किसी भी भूमिका में हों (जमीन पर या हवा में) देश उनकी सेवाओं पर गर्व करता है। उन्होंने यह भी कहा कि एसएससी अधिकारियों में अनिश्चितता लंबे समय के लिए ठीक नहीं, लेकिन न्यूनतम मानकों पर कोई समझौता नहीं हो सकता। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों से 19 दिसंबर तक लिखित जवाब मांगे हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सेना, नौसेना और वायुसेना तीनों में महिलाओं के स्थायी कमीशन से जुड़े मामलों पर साझा फैसला सुनाया जाएगा।

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