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Supreme Court: 'दूसरों की गिरफ्तारी चंद सेकंड में, अपने लोगों को नहीं पकड़ पाती सीबीआई'; अदालत की कड़ी टिप्पणी

Wed, 24 Sep 2025 07:12 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Wed, 24 Sep 2025 07:12 AM IST
सार

 जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की पीठ पारधी की मां की ओर से दायर उस अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें घटना के लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों को एक महीने के भीतर गिरफ्तार करने के 15 मई, 2025 के आदेश के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था।

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Supreme Court CBI can arrest others in seconds but can catch own people apex court strongly pulls agency
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश में 26 वर्षीय देवा पारधी की हिरासत में हुई मौत के लिए जिम्मेदार बताए जा रहे दो पुलिस अधिकारियों को गिरफ्तार करने में विफल रहने पर सीबीआई को फटकार लगाई। अदालत ने कहा, अन्य मामलों में कुछ ही सेकंड में छापा मारकर गिरफ्तारी हो जाती है लेकिन अपने ही लोगों को सीबीआई गिरफ्तार नहीं कर पाती। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की पीठ पारधी की मां की ओर से दायर उस अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें घटना के लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों को एक महीने के भीतर गिरफ्तार करने के 15 मई, 2025 के आदेश के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था।

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सीबीआई के रवैए पर सख्त नाराजगी जताती हुए जस्टिस नागरत्ना ने कहा, ऐसे नहीं चल सकता। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद आप कार्रवाई करने में असमर्थ हैं। फिर क्या फायदा? आप लाचारी का बहाना बना रहे हैं। आप कहते हैं कि वह फरार हैं। हम उनका पता नहीं लगा सकते। लाचारी का बहाना न बनाएं। जस्टिस नागरत्ना ने टिप्पणी की, आप जानते हैं कि वे कहां हैं। आप उन्हें बचा रहे हैं।
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शीर्ष अदालत ने सीबीआई को चेतावनी दी कि अगर पारधी के चाचा, जो इस घटना के एकमात्र चश्मदीद गवाह हैं और वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं, के साथ कुछ भी अप्रिय हुआ तो वह एजेंसी को जवाबदेह ठहराएगी। अगर दूसरी बार हिरासत में मौत होती है तो हम आपको नहीं छोड़ेंगे।
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सीबीआई ने दी दलील, आरोपपत्र दायर कर तीन को गिरफ्तार किया है, दो फरार
सीबीआई ने अदालत को बताया कि 15 सितंबर को आरोप पत्र दायर किया गया और तीन अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया है लेकिन दो अधिकारी फरार हैं। सीबीआई की ओर से पेश हुए वकील ने कहा, फरार अधिकारियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए गए हैं। उन्हें भगोड़ा घोषित किया गया है और उनकी संपत्ति कुर्क करने के लिए आवेदन दायर किए गए हैं। छापे मारे गए हैँ और डिजिटल निगरानी की गई है लेकिन अधिकारी अब भी फरार हैं।

मुख्य सचिव, सीबीआई निदेशक के खिलाफ अवमानना कार्यवाही की चेतावनी
दोनों अधिकारियों को गिरफ्तार न करने के सीबीआई के स्पष्टीकरण से असहमत होते हुए जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि अदालत मुख्य सचिव और सीबीआई निदेशक तथा जांच के लिए जिम्मेदार अतिरिक्त अधीक्षक के खिलाफ अवमानना के आरोप तय करेगी। हालांकि अंततः अदालत ने सीबीआई को दोनों अधिकारियों का पता लगाने और उन्हें गिरफ्तार करने के लिए उठाए गए कदमों का विवरण देते हुए बृहस्पतिवार तक स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी। जस्टिस नागरत्ना ने आगे कहा कि अगर अगले दो दिनों के भीतर गिरफ्तारियां कर ली जाती है तो अवमानना की कार्यवाही रद्द की जा सकती है।

एक माह में करनी थी गिरफ्तारी...
न्यायालय ने निर्देश दिया था कि पारधी की मौत के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को एक महीने के भीतर गिरफ्तार किया जाए और सीबीआई गिरफ्तारी के 90 दिनों के भीतर जांच पूरी करे। न्यायालय ने एकमात्र चश्मदीद गवाह गंगाराम पारधी को खतरे का भी जिक्र किया और राज्य सरकार को उसे सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया। मंगलवार को सुनवाई के दौरान, पीठ ने अप्रैल 2025 से फरार चल रहे दो अधिकारियों, संजीव सिंह मावई और उत्तम सिंह कुशवाहा, को गिरफ्तार करने में सीबीआई की असमर्थता पर बार-बार सवाल उठाए।


चाचा को दी जा रही प्रताड़ना...
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि एकमात्र चश्मदीद गवाह गंगाराम पारधी को हिरासत में उत्पीड़न और हमलों का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि देवा पारधी की हिरासत में मौत के लिए प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने गंगाराम को हिरासत में रखने और धमकाने के लिए उसके खिलाफ कई मामले दर्ज किए।

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फरार होने का मतलब संररक्षण देना 
सुनवाई के दौरान पीठ ने सीबीआई से पूछा, दोनों अधिकारियों को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया। जस्टिस नागरत्ना ने टिप्पणी की, फरार होने का मतलब है संरक्षण। मामला चोरी के एक मामले में गिरफ्तारी के बाद देवा पारधी की मौत से जुड़ा है। उसके चाचा गंगाराम पारधी अब भी हिरासत में हैं। पारधी की मां ने आरोप लगाया कि उनके बेटे को पुलिस ने प्रताड़ित किया और मार डाला। मध्य प्रदेश पुलिस ने दावा किया कि उसकी मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई।

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