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बार कोटे से सिविल जज को जिला जज बनाने पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

Fri, 17 May 2019 01:05 AM IST
Avdhesh Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Avdhesh Kumar Updated Fri, 17 May 2019 01:05 AM IST
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Supreme Court bar on civil judge to make District Judge from bar quota
सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वकीलों के कोटे(बार कोटा) से सिविल जज को जिला जज नहीं नियुक्त किया जा सकता। शीर्ष अदालत ने इस संबंध में और कोई अंतरिम आदेश देने से इनकार दिया। न्यायमूर्ति अरूण कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा की पीठ ने कहा कि यह जरूर है कि अंतरिम आदेश के जरिए कुछ मामलों में बार कोटे से सिविल जजों को जिला जज नियुक्त किया गया है लेकिन अब हम भविष्य में और इस तरह की नियुक्ति की इजाजत नहीं दे सकते। पीठ ने कहा कि अब इस संदर्भ में और अंतरिम आदेश पारित नहीं किया जा सकता। 
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पीठ ने इस मामले को महत्वपूर्ण बताते हुए इस लंबित मसले को चीफ जस्टिस केपास भेजते हुए उचित पीठ केसमक्ष सुनवाई कराने का आग्रह किया है। यह मामला करीब चार वर्ष से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। पीठ ने कहा कि बार केकोटे से वकीलों को सीधे जिला जज नियुक्त करने का कोटा है, जिससे कि वकील केटैलेंट को तरजीह दी जा सके। वहीं इन सर्विस अभ्यर्थियों(सिविल जज) के लिए पदोन्नति के तहत जिला जज नियुक्त करने का अलग कोटा है। पीठ ने यह तय प्रक्रिया है। 
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि चूंकि अभी इस मसले का अंतिम निपटारा नहीं हो सका है कि सिविल जजों को वकीलों के कोटे से जिला जज बनाया जा सकता है या नहीं, इसलिए हम अंतरिम आदेशों के जरिए इस तरह की और नियुक्ति का निर्देश नहीं दे सकते। कोर्ट ने कहा कि हम यह चाहते कि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाए जिससे कि पूर्व स्थिति बहाल करना लगभग असंभव हो जाए। 
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कोर्ट ने कहा कि अंतरिम आदेश को नजीर नहीं बनाई जा सकती। अदालत ने यह भी कहा कि अगर अंतिम निर्णय इन-सर्विस अभ्यर्थियों के पक्ष में नहीं हुआ तो और स्थिति और भी जटिल हो जाएगी। पीठ ने यह भी साफ किया कि  हमअंतरिम आदेशों के जरिए नियुक्तियों में कोई दखल नहीं दे रहे हैं।
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