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पीएम मोदी की प्रशंसा में जस्टिस अरुण मिश्रा के बयान से सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन असहमत
Wed, 26 Feb 2020 09:54 PM IST
अनवर अंसारी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: अनवर अंसारी
Updated Wed, 26 Feb 2020 09:54 PM IST
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जस्टिस अरूण मिश्रा
- फोटो : india today
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सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने इंटरनेशनल ज्यूडीशियल कांफ्रेस में शीर्ष अदालत के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा को लेकर उनके विचारों से असहमति जताई है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने मीडिया में भेजे गए एक बयान में कहा कि शनिवार को इस सम्मेलन में मोदी के बारे में न्यायमूर्ति मिश्रा के बयान का उसने बहुत ही पीड़ा और चिंता के साथ संज्ञान लिया है।
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एसोसिएशन के अध्यक्ष दुष्यंत दवे और इसके दूसरे सदस्यों के हस्ताक्षर वाले बयान में कहा गया है कि एससीबीए उपरोक्त बयान पर अपनी कड़ी असहमति व्यक्त करती है और इसकी कड़े शब्दों में भर्त्सना करती है। एससीबीए का मानना है कि संविधान के अंतर्गत न्यायपालिका की स्वतंत्रता बुनियादी ढांचा है और इस स्वतंत्रता को अक्षरश: संरक्षित करना होगा।
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विज्ञप्ति में कहा गया है कि एससीबीए का मानना है कि ऐसा कोई भी बयान न्यायपालिका की स्वतंत्रता को कम करके परिलक्षित करता है और इसलिए वह न्यायाधीशों से अनुरोध करती है कि भविष्य में न तो ऐसे बयान दें और न ही उच्चतर पदाधिकारियों सहित कार्यपालिका के साथ किसी प्रकार की नजदीकी दिखायें।
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एसोसिएशन ने कहा कि एससीबीए का यह मानना रहा है कि इस तरह की निकटता न्यायाधीशों के निर्णय लेने की प्रक्रिया पर असर डाल सकती है और वाद के नतीजों को लेकर वादियों के मन में संदेह पैदा कर सकती है।
न्यायमूर्ति मिश्रा ने 22 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भूरि भूरि प्रशंसा की थी और उन्हें अंतराष्ट्रीय स्तर का स्वप्नदर्शी बताया था। उन्होने मोदी को बहुमुखी प्रतिभा वाला बताया था जो वैश्विक स्तर का सोचते हैं और स्थानीय स्तर पर काम करते हैं।
न्यायमूर्ति मिश्रा ने सम्मेलन उद्घाटन कार्यक्रम में धन्यवाद प्रस्ताव पेश करते हुए प्रधानमंत्री और केंद्रीय कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद को 1500 पुराने हो चुके कानूनों को खत्म करने के लिए बधाई भी दी थी।