{"_id":"6353395cb9069353360a71fe","slug":"supreme-court-asks-to-central-government-about-the-facility-of-feeding-children-in-public-places","type":"story","status":"publish","title_hn":"Supreme Court: सार्वजनिक स्थानों पर बच्चों को दूध पिलाने की सुविधा की मांग पर केंद्र से मांगा जवाब","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Supreme Court: सार्वजनिक स्थानों पर बच्चों को दूध पिलाने की सुविधा की मांग पर केंद्र से मांगा जवाब
Sat, 22 Oct 2022 05:59 AM IST
Jeet Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Sat, 22 Oct 2022 05:59 AM IST
सार
याचिका में कहा गया है कि फीडिंग व चाइल्ड केयर रूम बुनियादी सुविधाओं के तहत मुहैया कराना जरूरी है, लेकिन इस संबंध में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : Social media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सार्वजनिक स्थानों पर बच्चों को स्तनपान कराने के लिए अलग कमरा मुहैया कराने संबंधी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस जेके माहेश्वरी की पीठ ने गैर सरकारी संगठन मातृस्पर्श की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई की। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता नेहा रस्तोगी, अनिमेष रस्तोगी और अभिमन्यु श्रेष्ठ ने कहा कि यह जीवन और निजता के अधिकार से जुड़ा मामला है, जिसपर जल्द निर्णय लिया जाना चाहिए।
विज्ञापन
याचिका में दलील दी गई कि सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की गरिमा की रक्षा के लिए स्तनपान और चाइल्ड केयर रूम मुहैया कराना जरूरी है, क्योंकि बड़ी संख्या में महिलाएं रोजगार के लिए घरों से निकलती हैं।
विज्ञापन
याचिका में कहा गया है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 42 और 47 के तहत राज्य नीति निदेशक सिद्धांतों में लोगों का जीवन और महिलाओं और बच्चों के सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार, महिलाओं और बच्चों की स्वास्थ्य देखभाल को राज्य के कर्तव्य बताया गया है। फीडिंग व चाइल्ड केयर रूम बुनियादी सुविधाओं के तहत मुहैया कराना जरूरी है, लेकिन इस संबंध में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
विज्ञापन
, लिहाजा सार्वजनिक स्थानों पर इन सुविधाओं की स्थापना के लिए व्यापक दिशा निर्देशों की जरूरत है। याचिकाकर्ता मातृ स्पर्श, अव्यान फाउंडेशन सार्वजनिक स्थानों पर अपने स्तर पर ब्रेस्टफीडिंग रूम, चाइल्ड केयर रूम और क्रेच स्थापित कर रहा है, लेकिन इस कार्य में सरकार की व्यापक मदद और स्पष्ट दिशा-निर्देश की दरकार है।
शीर्ष अदालत की मप्र हाईकोर्ट के आदेश पर रोक, नहीं होगी सीबीआई जांच
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसके तहत राज्य में 2017 के बाद से शुरू हुए सभी नर्सिंग कॉलेजों की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। चीफ जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने मप्र हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच के आदेश को चुनौती देने वाली ग्वालियर के प्रिस्टन कॉलेज की याचिका पर सुनवाई ने यह रोक लगाई। कॉलेज की तरफ से पेश वकील ने कहा कि 2017 और उसके बाद से अस्तित्व में आए सभी नर्सिंग कॉलेजों की संबद्धता की जांच कराने का हाईकोर्ट का आदेश उचित नहीं है। इसके बाद शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है।
ईडी निदेशक का कार्यकाल बढ़ाने को लेकर केंद्र की याचिका पर नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक संजय कुमार मिश्रा का कार्यकाल बढ़ाने के लिए उसके आदेश में संशोधन की मांग वाली केंद्र की याचिका पर ‘कॉमन कॉज’ संस्था को नोटिस जारी किया है। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने कॉमन कॉज के वकील प्रशांत भूषण को यह नोटिस जारी किया जिसका जवाब सात नवंबर तक दाखिल करना है।
डाॅक्टरों की सुरक्षा के दिशा-निर्देशों की मांग वाली याचिका पर केंद्र, आईएमए को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों पर बढ़ते हमलों के आरोप और देशभर में उनकी सुरक्षा के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने की मांग वाली याचिकाओं पर केंद्र व भारतीय चिकित्सा परिषद समेत अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने राजस्थान सरकार को भी नोटिस जारी किया है।
दरअसल, दिल्ली डॉक्टर्स फोरम, आईएमए (द्वारका) और सुनीत कुमार उपाध्याय ने दौसा में प्रसूती रोग विशेषज्ञ एवं उनकी पत्नी अर्चना शर्मा की कथित खुदकुशी की सीबीआई जांच कराने की मांग की है। अर्चना को राजस्थान में डिलीवरी के दौरान अत्याधिक खून निकलने के कारण एक महिला की मौत के बाद भीड़ ने बुरी तरह प्रताड़ित किया था। जिसके बाद अर्चना ने आत्महत्या कर ली थी।
पीठ ने इस मामले में केंद्र, आईएमए व अन्य को दस्ती नोटिस जारी करने और 23 नवंबर तक इस पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। दस्ती नोटिस वादी के हाथों में सौंपा जाता है। मेडिकल एसोसिएशन (द्वारका) के वकील शशांक देव सुधी ने कहा, देश भर में डॉक्टरों पर हमला किया जा रहा है, भले ही किसी मरीज की मौत स्वास्थ्य कारणों से हो, जो चिकित्सा पेशेवरों के नियंत्रण से बाहर है। उन्होंने कहा, थानों में मेडिकल सेल भी नहीं है। पुलिस अधिकारी चिकित्सा शब्दावली को भी नहीं समझते हैं। डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए व्यापक दिशा-निर्देश तैयार करने की आवश्यकता है।
चार महीने से नजरबंद विधि छात्र की मां की याचिका पर विचार से इन्कार
सुप्रीम कोर्ट ने असामाजिक गतिविधियों की रोकथाम वाले केरल के कानून के तहत चार महीने से नजरबंद विधि छात्र की मां कोझिकोड निवासी जशीला टीएमकी अर्जी पर विचार से इन्कार कर दिया। अदालत ने कहा, याचिकाकर्ता के वकील यह साबित करने में विफल रहे कि राज्य सलाहकार बोर्ड ने नजरबंदी के खिलाफ उनके मामले का समर्थन किया था।
इसके बाद वकील ने याचिका वापस ले ली। केरल के कोझिकोड की मूल निवासी जशीला टीएम ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। याचिका कर्ता ने कहा, वह 110 दिनों से अधिक समय से नजरबंद है। केरल हाईकोर्ट ने सितंबर में कानून प्रवर्तन अधिकारियों को उसकी नजरबंदी पर कानून विभाग की राय सुरक्षित करने के लिए समय दिया था। याचिका में बिना किसी देरी के छात्र को हिरासत में लेने के आदेश को रद्द करने और उसे आजाद करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।