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केंद्र बताए दागी नेताओं के मुकदमों की सुनवाई के लिए कितनी विशेष अदालतें बनीं: सुप्रीम कोर्ट

Tue, 21 Aug 2018 09:24 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 21 Aug 2018 09:24 PM IST
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supreme court asks how many special courts formed for trial of criminal cases against politicians
सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार से  पूछा कि पिछले साल दिए गए आदेश के बाद राजनेताओं से जुड़े केसों की सुनवाई के लिए कितनी विशेष अदालतें बनाई गईं। कोर्ट ने सभी जानकारियां सहित 28 अगस्त तक जवाब देने की तारीख तय की है। 

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बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 14 दिसंबर 2017 को केंद्र सरकार को राजनेताओं से जुड़े मुकदमों की सुनवाई के लिए 12 विशेष अदालत बनाने और इनमें 1 मार्च से सुनवाई शुरू करने का आदेश दिया था। 
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जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पीठ ने आज केंद्र सरकार से पूछा, "ये विशेष कोर्ट सेशन कोर्ट हैं या मजिस्ट्रियल, और इनके अधिकार क्षेत्र क्या हैं।" 

पीठ ने सरकार से इन कोर्ट में लंबित पड़े मामलों की संख्या भी बताने को कहा है।

अदालत ने यह भी पूछा कि इन विशेष कोर्ट के ऊपर अन्य अदालतें बनाने का इरादा है या सरकार इन्हें पहले ही बना चुकी हैं। 

दिल्ली हाईकोर्ट की ओर से पेश काउंसिल ने बताया कि देश में दो विशेष अदालतें बनाई जा चुकी हैं, जिनमें एक सेशन कोर्ट और एक मजिस्ट्रियल कोर्ट है। 

केंद्र का जवाब अधूरा

सुनवाई के दौरान मामले में याचिकाकर्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने पीठ को बताया कि केंद्र सरकार ने इस बारे में हलफनामा दायर किया है लेकिन इसकी एक कॉपी उन्हें नहीं मिली है। 
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वहीं सरकार का पक्ष रख रहे काउंसिल ने कहा कि सरकार ने मार्च में ही हलफनामा दायर किया था। पीठ ने उनसे कहा कि इसकी कॉपी याचिकाकर्ता को दे दी जाए। 

सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार के हलफनामे को अधूरा बताया क्योंकि सरकार ने हलफनामे में कहा कि वे राज्यों से मिली जानकारी को संयोजित कर रहे हैं। 

कोर्ट ने एक नवंबर 2017 को मांगी गई जानकारी के बारे में 28 अगस्त तक जवाब देने को कहा है। 

कितने मुकदमों में एक साल के भीतर फैसला 

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल एक नवंबर को सरकार से पूछा था कि, "1581 सांसदों और विधायकों (2014 के चुनाव में नामांकन पत्र में घोषणा के आधार पर) पर दर्ज मुकदमों में से, 10 मार्च 2014 को दिए गए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक एक साल की समय अवधि के भीतर कितने मामलों में फैसला आया।" 


कोर्ट ने पूछा कि इन मुकदमों में फैसला के मुताबिक कितने सांसदों और विधायकों को दोषी या बरी किया गया। साथ ही कोर्ट ने 2014 से 2017 (वर्तमान तारीख तक) के बीच पूर्व या मौजूदा विधायकों और सांसदों पर दर्ज आपराधिक मुकदमों की जानकारी देने को भी कहा।

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