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11 राज्य दो हफ्ते में बताएं अब तक लोकायुक्त क्यों नहीं, SC का 5 साल पहले लागू कानून पर सवाल

Sat, 24 Mar 2018 05:11 AM IST
ब्यूरो/एजेंसी, नई दिल्ली
ब्यूरो/एजेंसी, नई दिल्ली Updated Sat, 24 Mar 2018 05:11 AM IST
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Supreme Court asks 11 states to tell why Lokayukta not appointed on law made 5 years ago
सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने 11 राज्यों के मुख्य सचिवों से पूछा है कि पांच साल पहले ही लागू हो चुके कानून के बावजूद उनके यहां अब तक लोकायुक्त की नियुक्ति क्यों नहीं हुई है। न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने जम्मू-कश्मीर, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, पुड्डुचेरी, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश और पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिवों को लोकायुक्त न होने का दो हफ्ते में कारण बताने को कहा है। 
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पीठ ने राज्यों से यह भी पूछा है कि उक्त राज्यों में लोकायुक्त की नियुक्ति कब तक होगी। शीर्ष अदालत भाजपा नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय की याचिका पर सुनवाई कर रही है। इस मामले की अगली सुनवाई 12 अप्रैल को होगी।
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पीठ ने ओडिशा के मुख्य सचिव से भी पूछा है कि क्या राज्य में लोकायुक्त या उपलोकायुक्त कार्यरत है, क्योंकि शीर्ष अदालत को इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। उक्त राज्यों में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त या उपलोकायुक्त की नियुक्ति नहीं होने के संबंध में पीठ के समक्ष दस्तावेज आने के बाद मुख्य सचिवों को तलब किया गया है।
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शीर्ष अदालत ने सभी 11 राज्यों से यह भी पूछा है कि एक निश्चित समय बताएं कि आखिर 2013 में ही कानून बन जाने के बावजूद वह अपने यहां लोकायुक्त की नियुक्ति कब तक कर देंगे। याचिकाकर्ता और दिल्ली के भाजपा नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय के वकील गोपाल शंकरनारायणन से पीठ ने कहा कि वह इस बात का भी आकलन करें कि किन राज्यों में लोकायुक्त हैं और किन में नहीं।

क्या कहता है कानून

Supreme Court asks 11 states to tell why Lokayukta not appointed on law made 5 years ago
क्या कहता है कानून

वर्ष 2013 में पास हुए कानून की धारा 63 के मुताबिक सभी राज्यों को लोकायुक्त की नियुक्ति करना अनिवार्य है। 23 फरवरी को केंद्र ने शीर्ष अदालत को बताया था कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकपाल की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली चयन समिति इस मसले पर बैठक करेगी।

इससे पहले समिति में नेता प्रतिपक्ष के न होने के कारण नियुक्ति प्रक्रिया में पेच फंस चुका है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि इसका कोई औचित्य नहीं है कि नियम में संशोधन होने तक लोकपाल की नियुक्ति को स्थगित रखा जाए।
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