फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court asked a list of over Rs 500 crore debtor Companies

सुप्रीम कोर्ट ने मांगी 500 करोड़ रुपये से अधिक की कर्जदार कंपनियों की सूची

Wed, 04 Jan 2017 08:34 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 04 Jan 2017 08:34 AM IST
विज्ञापन
Supreme Court asked a list of over Rs 500 crore debtor Companies

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को उन कॉरपोरेट कंपनियों की सूची देने केलिए कहा है जिन पर बैंकों का 500 करोड़ रुपये से अधिक का लोन बकाया है। साथ ही शीर्ष अदालत ने सरकार को ऋण वसूली न्यायाधिकरणों(डीआरटी) और अन्य अपीलीय निकायों में दस वर्ष से अधिक समय से लंबित वसूली केमामलों का आंकड़ा पेश करने के लिए कहा है। शीर्ष अदालत ने सरकार को चार हफ्ते के भीतर इस संबंध में हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा है।

विज्ञापन


चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने साथ ही ऋण वसूली न्यायाधिकरणों(डीआरटी) और अन्य अपीलीय निकायों में मूलभूत सुविधाओं के अभाव पर भी नाराजगी जताई है। पीठ ने साफ किया जब तक मूलभूत सुविधाएं, न्यायिक  मैनपावर और संसाधनों का अभाव रहेगा, मामलों का निस्तारण तेजी से नहीं हो पाएगा।
विज्ञापन


मामले लंबित पड़े रहेंगे। पीठ ने सरकार से कहा कि  संशोधित अधिनियम में जो टाइम लाइन निर्धारित किए गए हैं क्या उनसे ऋण वसूली न्यायाधिकरणों(डीआरटी) और अन्य अपीलीय निकायों में मौजूदा मूलभूत सुविधाओं के जरिए मकसद पूरा होना संभव है।

विज्ञापन
विज्ञापन

ऋण वसूली के लिए क्या किया?

Supreme Court asked a list of over Rs 500 crore debtor Companies

अदालत ने सरकार से यह भी जानना चाहा है कि क्या मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर वैज्ञानिक अध्ययन किया गया है। साथ ही अदालत ने सरकार से पूछा है कि ऋण वसूली न्यायाधिकरणों(डीआरटी) और अन्य अपीलीय निकायों में मूलभूत सुविधाओं को दुरूस्त करने के लिए क्या किया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में उस वाकये का भी जिक्र किया गया है जिसमें डीआरएटी, इलाहाबाद केचेयरपर्सन ने चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर कहा था कि उसमें उन्होंने कहा था कि मूल सुविधाओं न होने केकारण वह इस्तीफा देना चाहते हैं।

पीठ ने कहा कि सुविधाओं और मैनपावर पर्याप्त होना चाहिए कि जिससे कि मामले का निपटारा 180 दिनों के भीतर किया जा सके। पीठ ने पाया कि निपटारे की मियाद भले ही 180 दिन है लेकिन अधिकतर मामले वर्षों से लंबित हैं। मालूम हो कि हाल ही में सरकार द्वारा दाखिल हलफनामे में कहा गया था कि पांच लाख करोड़ से अधिक के 70 हजार से अधिक मामले डीआरटी में लंबित हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed