SC: रोहिंग्या शरणार्थियों को लेकर कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब; INI CET की काउंसलिंग के नतीजों पर रोक नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत में लिए गए रोहिंग्या शरणार्थियों की रिहाई को लेकर दी गई याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने आईएनआई सीईटी की काउंसलिंग के नतीजों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।
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सुप्रीम कोर्ट ने देश में अनिश्चितकाल के लिए हिरासत में लिए गए रोहिंग्या शरणार्थियों की रिहाई की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने केंद्र को 27 अगस्त तक जवाब देने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र और अन्य को याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा। पीठ में जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा भी हैं। जनहित याचिका में देश में युवा महिलाओं और बच्चों समेत रोहिंग्या शरणार्थियों तथा शरण चाहने वालों को अनिश्चितकाल तक हिरासत में रखने को चुनौती दी गई है। इसमें कहा गया है कि यह कानून के स्थापित प्रक्रियाओं का उल्लंघन है। याचिका रीता मनचंदा ने दायर की है।
याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व वकील उज्जैनी चटर्जी, टी. मयूरा प्रियन, रचिता चावला और श्रेय रवि डंभारे ने किया। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट ने अपील की कि वह प्रतिवादियों को निर्देश दे कि वे रोहिंग्या बंदियों को रिहा करें। इन्हें विदेशी अधिनियम, 1946 और पासपोर्ट अधिनियम (भारत में प्रवेश), 1929 के तहत दो वर्षों से अधिक समय से हिरासत में रखा गया है। याचिका के अनुसार, याचिकाकर्ता रीता मनचंदा दक्षिण एशियाई संघर्षों और शांति स्थापना में विशेषज्ञता रखने वाली एक प्रतिष्ठित विद्वान हैं।
आईएनआई सीईटी की काउंसलिंग के नतीजों पर रोक नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय महत्व के संयुक्त प्रवेश परीक्षा (आईएनआई-सीईटी)-2024 की काउंसलिंग के अंतिम राउंड (ओपन राउंड) के परिणामों की घोषणा पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया है। याचिकाकर्ताओं के वकील पीबी सुरेश ने तर्क दिया कि सीट आवंटन के परिणामों की घोषणा को दो दिनों के लिए रोका जा सकता है। वहीं, एम्स के वकील दुष्यंत पाराशर ने कहा कि परिणाम पर रोक का अगले वर्षों में दाखिले पर व्यापक असर पड़ेगा।
चीफ जस्टिस (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने डॉ सुकृति नंदा एम व अन्य की याचिका पर कहा, पीजी मेडिकल प्रवेश के लिए (काउंसलिंग) परिणामों की घोषणा को रोकना एक गंभीर मामला है। अदालत ने मामले पर विचार के लिए 20 अगस्त की तारीख तय की है।