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Supreme Court: ललित मोदी और उनकी मां के बीच संपत्ति का होगा बंटवारा, रिटायर्ड जज आरवी रवींद्रन कराएंगे सुलह

Mon, 01 Aug 2022 10:20 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Mon, 01 Aug 2022 10:20 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ललित मोदी और उनकी मां बीना मोदी के बीच लंबे समय से लंबित पारिवारिक संपत्ति विवाद को निपटाने के लिए जस्टिस आरवी रवींद्रन को मध्यस्थ बनाया है। गौरतलब है कि दिवंगत उद्योगपति केके मोदी की संपत्ति को लेकर मां-बेटे के बीच विवाद चल रहा है।

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Supreme Court appoints ex-Judge Raveendran to settle property dispute between Lalit Modi and his mother
ललित मोदी - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सोमवार को ललित मोदी (Lalit Modi) और उनकी मां बीना मोदी के बीच लंबे समय से लंबित पारिवारिक संपत्ति विवाद को निपटाने के लिए जस्टिस आरवी रवींद्रन (Ex-Judge Raveendran) को मध्यस्थ बनाया है। गौरतलब है कि दिवंगत उद्योगपति केके मोदी (KK Modi) की संपत्ति को लेकर मां-बेटे के बीच विवाद चल रहा है। सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा कि दोनों पक्षों के वकीलों ने इस पर सहमति जताई थी वे पूरे मन से मध्यस्थता के लिए राजी हुए हैं। गौरतलब है कि जस्टिस आरवी रवींद्रन सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश हैं। 

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सीजेआई एनवी रमण की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। इस पीठ में चीफ जस्टिस के अलावा न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी और न्यायमूर्ति हिमा कोहली भी शामिल हैं। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद पीठ ने कहा कि चूंकि ये मामला पारिवारिक संपत्ति से जुड़ा है, ऐसे में हम मानते हैं कि कि इसे मध्यस्थता के रास्ते निपटाया जाए। पीठ ने आगे कहा कि इस विवाद को सुलझाने के लिए पीठ शीर्ष अदालत के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति आरवी रवींद्रन को मध्यस्थ के रूप में नियुक्त करती है। पिछली सुनवाई में पीठ ने यह भी कहा था कि केके मोदी की डीड में भी इसकी व्यवस्था दी गई है। ललित मोदी भी इस मामले में मध्यस्थता के इच्छुक हैं। 
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इस दौरान शीर्ष अदालत ने दोनों पक्षों को मध्यस्थता के दौरान होने वाली गतिविधियों को गुप्त रखने की हिदायत भी दी है। बता दें कि दोनों के बीच चल रहे संपत्ति विवाद को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहले भी इस तरह की पहल कर चुका है। बीते साल भी इस मामले में सर्वोच्च अदालत ने मां-बेटे को मध्यस्थता की सलाह दी थी और दोनों पक्षों से कहा था कि वे अपनी पसंद के मध्यस्थ का नाम बताएं। 

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