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Supreme Court: विशेषज्ञ डॉक्टरों के खाली पदों पर SC खफा, कहा- सरकार व UPPSC डाल रहे एक-दूसरे के पाले में गेंद
Thu, 17 Nov 2022 05:24 AM IST
देव कश्यप
राजीव सिन्हा, नई दिल्ली।
राजीव सिन्हा, नई दिल्ली।
Published by: देव कश्यप
Updated Thu, 17 Nov 2022 05:24 AM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि जिस तरह से इस मामले में राज्य सरकार आगे बढ़ रही है और जिस तरह से आयोग के साथ संचार की कमी है, इस बात से हम काफी दुखी हैं। खाली पद न भरे जाने के कारण इन्हें अगली भर्ती प्रक्रिया में शामिल किए जाने की आवश्यकता है।
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सुप्रीम कोर्ट।
- फोटो : ANI
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में विशेषज्ञ डॉक्टरों के 2,382 रिक्त पदों को भरने में देरी पर उत्तर प्रदेश सरकार और यूपी लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि सरकार और आयोग एक दूसरे के पाले में गेंद डाल रहे हैं। साथ ही, चेताया कि राज्य सरकार और आयोग से यह काम नहीं हो पा रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी किसी अन्य एजेंसी को दे दी जाएगी।
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जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस अभय एस ओका की पीठ ने भर्ती प्रक्रिया में देरी पर खेद व्यक्त किया। पीठ ने कहा कि जिस तरह से इस मामले में राज्य सरकार आगे बढ़ रही है और जिस तरह से आयोग के साथ संचार की कमी है, इस बात से हम काफी दुखी हैं। खाली पद न भरे जाने के कारण इन्हें अगली भर्ती प्रक्रिया में शामिल किए जाने की आवश्यकता है।
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अदालत ने गौर किया कि राज्य सरकार ने 10 जून, 2022 को राज्य आयोग से रिक्तियों को फिर से प्रकाशित करने का अनुरोध किया। आयोग को उस पत्र का जवाब देने में चार महीने लग गए। आयोग ने 19 अक्तूबर, 2022 को आगे की जानकारी के लिए एक पत्र भेजा था। इसी तरह मानदंड से संबंधित प्रावधान की कमियों को लेकर भी सरकार और आयोग के बीच पत्राचार जारी है।
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इसमें क्षैतिज आरक्षण, दिव्यांग श्रेणी के उपवर्गीकरण व विभिन्न निकायों की ओर से प्रदान की जाने वाली डिग्री/ डिप्लोमा के लिए समकक्ष मानदंड से संबंधित प्रावधान की कमियों को इंगित किया गया। कोर्ट को बताया गया कि सिर्फ आवश्यक जानकारी मिलने पर ही आयोग रिक्त पदों पर चयन के लिए विज्ञापन प्रकाशित कर सकता है। पीठ ने कहा कि यह आयोग के कामकाज की स्थिति है, जबकि इस मामले की निगरानी शीर्ष अदालत कर रही है। यह उनकी अक्षमता के स्तर को दर्शाता है।
आयोग की मांग ठुकराई, दो दिसंबर तक बताएं सही स्थिति
शीर्ष अदालत ने सुनवाई की अगली तारीख दो दिसंबर तय की है। पीठ ने कहा कि आयोग की ओर से और समय देने की मांग को हम अस्वीकार करते हैं। दोनों प्राधिकार अगली तारीख तक सूचित करेंगे कि विज्ञापन जारी करने के लिए सभी जानकारी तैयार है या नहीं। पीठ ने कहा, अगले सप्ताह सोमवार से होने वाली संयुक्त बैठक में समाधान निकाला जाना चाहिए।