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SC: फालतू याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट खफा, आरक्षण खत्म करने की मांग खारिज, 25 हजार का जुर्माना ठोका

Wed, 05 Jul 2023 05:44 AM IST
वीरेंद्र शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: वीरेंद्र शर्मा Updated Wed, 05 Jul 2023 05:44 AM IST
सार

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने आरक्षण प्रणाली को समाप्त करने और इसे वैकल्पिक पद्धति से बदलने की मांग वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया। पीठ ने कहा, यह याचिका फालतू की है।

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Supreme Court angry on frivolous petitions Demand to end reservation rejected
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने अनावश्यक याचिकाएं दायर करने पर कड़ा रुख अपनाते हुए याचिकाकर्ताओं को कड़ी फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने तीन जनहित याचिकाओं को बेवजह बताकर खारिज करते हुए जुर्माना लगाया है। साथ ही, लैंगिक भेदभाव से जुड़ी याचिका पर एक विधि छात्र को नसीहत भी दी।
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मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने आरक्षण प्रणाली को समाप्त करने और इसे वैकल्पिक पद्धति से बदलने की मांग वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया। पीठ ने कहा, यह याचिका फालतू की है। साथ ही, याचिकाकर्ता वकील सचिन गुप्ता पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। पीठ ने आदेश में कहा, यह याचिका अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग है। हम याचिकाकर्ता को सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता कल्याण कोष में 25 हजार रुपये का भुगतान करने का निर्देश देते हैं। भुगतान की रसीद दो सप्ताह में पेश की जाए। पीठ ने जाति व्यवस्था के पुनर्वर्गीकरण की मांग वाली उसी याचिकाकर्ता की एक अन्य जनहित याचिका को भी खारिज कर दिया।
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लैंगिक भेदभाव से जुड़ी याचिका पर कहा सांविधानिक प्रावधानों को खत्म करना होगा
सुप्रीम कोर्ट ने एक अन्य मामले में सुनवाई करते हुए उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें संविधान में लैंगिक भेदभाव वाले शब्दों का इस्तेमाल नहीं करने वाली शब्दावली को हटाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा, वह याचिकाएं दायर करने के बजाय पढ़ाई पर ध्यान दे। याचिकाकर्ता विधि का छात्र है। सीजेआई जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, आप ऐसी याचिकाएं दायर करने के बजाय लॉ स्कूलों में क्यों नहीं पढ़ते? हमें जुर्माना लगाना शुरू करना होगा। आप चाहते हैं कि हम संविधान में पुरुष सर्वनामों को खत्म कर दें? चेयरमैन का उपयोग...। हमें सांविधानिक प्रावधानों को खत्म करना होगा, क्योंकि इसमें चेयरपर्सन नहीं कहा गया है...एक महिला को भी नियुक्त किया जा सकता है। वहीं, जस्टिस नरसिम्हा ने कहा, हम जुर्माना लगाएंगे। आप अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें। आपके पास बहुत समय है।
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