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नोटिस और सम्मन भेजने के लिए होगा ई-मेल और मैसेजिंग एप का इस्तेमाल, सुप्रीम कोर्ट ने दी मंजूरी

Fri, 10 Jul 2020 10:27 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Fri, 10 Jul 2020 10:27 PM IST
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Supreme Court allows email, fax, instant messaging apps like WhatsApp for service of notices and summons
सुप्रीम कोर्ट

देश में कोरोना वायरस की स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को न्यायिक प्रक्रियाओं में तकनीकी का अधिक इस्तेमाल करने का फैसला किया है। इसके तहत कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अब अदालत सम्मन और नोटिस जारी करने के लिए ई-मेल, फैक्स और व्हाट्सएप जैसे इंस्टैंट मैसेजिंग एप का इस्तेमाल करेगी। 

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सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले कोविड-19 के चलते लागू लॉकडाउन के दौरान वकीलों और वादियों को होने वाली समस्याओं का स्वत: संज्ञान लिया था। इस में अदालत ने मध्यस्थता कार्यवाही शुरू करने और चेक बाउंस होने के मामलों के लिए कानून के तहत निर्दिष्ट समयसीमा की अवधि 15 मार्च से अगले आदेश तक बढ़ाने का फैसला किया था।
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मुख्य न्यायाधीश एसए बोबड़े, न्यायाधीश आर सुभाष रेड्डी और एएस बोपन्ना वाली पीठ ने यह आदेश पारित किया। अदालत ने यह आदेश अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल की ओर से जारी याचिका पर दिया। 
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अदालत ने आदेश में कहा, लॉकडाउन के दौरान नोटिस और सम्मन की सेवाओं के मामले में यह देखा गया है कि डाकघर जाना संभव नहीं था। इस तरह की सेवा (नोटिस और सम्मन) ईमेल, फैक्स या त्वरित संदेश सेवा के माध्यम से की जा सकती है। हालांकि, अदालत ने व्हाट्सएप का नाम नहीं लिया और जीरॉक्स का उदाहरण देते हुए कहा कि कंपनी का नाम फोटोस्टेट का अर्थ बताने के लिए इस्तेमाल किया गया है।


 कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल की उस आशंका को खारिज किया जिसमें उन्होंने कहा था कि व्हाट्सएप के जरिए नोटिस और सम्मन भेजना सही नहीं है क्योंकि यह पूरी तरह से इन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म है। कोर्ट ने कहा कि इसका 'ब्ल्यू टिक' फीचर का इस्तेमाल साक्ष्य अधिनियम के तहत अदालत के नोटिसों की सेवा को साबित करने के लिए किया जा सकता है और यदि एप को निष्क्रिय किया जाता है, तो यह साबित नहीं किया जा सकता है और इसलिए ऐसी सेवाओं का उपयोग किया जा सकता है।

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