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ममता बनर्जी: चुनाव चिह्न फ्रीज करने के चुनाव आयोग के फैसले को दी चुनौती, सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

Mon, 21 Sep 2026 12:30 PM IST
नितिन गौतम पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Mon, 21 Sep 2026 12:30 PM IST
सार

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें आयोग ने टीएमसी के चुनाव चिह्न और नाम को फ्रीज करने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी याचिका पर तुरंत सुनवाई की मंजूरी दे दी है और मामले को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। 

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Supreme court agrees urgent listing of Mamata Banerjee plea challenging EC decision to freeze party name symbo
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर तुरंत सुनवाई के लिए मंजूरी दे दी। इस याचिका में तृणमूल कांग्रेस का नाम और पार्टी का चुनाव चिह्न फ्रीज करने के चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती दी गई है। टीएमसी की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच के सामने तुरंत सुनवाई की मांग की थी।
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सिब्बल ने कहा, 'वे एक नोटिफिकेशन जारी करते हैं और नोटिफिकेशन के बीच में ही वे चुनाव चिह्न को फ्रीज कर देते हैं। यह क्या हो रहा है? हम चाहते हैं कि इस मामले को तुरंत सूचीबद्ध किया जाए।' इसके बाद पीठ ने मामले को तुरंत सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। 
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चुनाव आयोग ने क्या दिया था फैसला?
चुनाव आयोग ने शुक्रवार को ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी के विरोधी गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए थे। इससे एक दिन पहले आयोग ने अपने अंतरिम फैसले में दोनों गुटों को 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम का इस्तेमाल करने से रोक दिया था और विवाद पर अंतिम फ़ैसला होने तक पार्टी के चुनाव चिह्न को फ्रीज कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में बनर्जी ने चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी को प्रतिवादी बनाया है। 18 सितंबर को बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस का नाम और 'जोड़ा घास-फूल' चुनाव चिह्न फ्रीज करने के चुनाव आयोग के फैसले की आलोचना की थी। उन्होंने पार्टी की पहचान खोने की तुलना एक मां के अपने बच्चे को खोने के दर्द से की थी और इसे देश के लोकतांत्रिक इतिहास में एक 'काला दिन' बताया था।

बनर्जी ने कहा था कि वह इस अंतरिम व्यवस्था को समझौते के तौर पर स्वीकार नहीं करेंगी और पार्टी की असली पहचान और उसके 'फूल-घास' वाले चुनाव चिह्न को वापस पाने के लिए राजनीतिक, लोकतांत्रिक और कानूनी तौर पर आखिरी दम तक लड़ेंगी।

चुनाव आयोग ने उपचुनाव के लिए दिया अंतरिम फैसला
चुनाव आयोग ने नंदीग्राम और रेजीनगर में 6 अक्तूबर को होने वाले उपचुनावों के लिए ममता बनर्जी के गुट को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' चुनाव चिह्न आवंटित किए हैं। वहीं विरोधी गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'लिफाफा' चुनाव चिह्न दिया है।


पूर्वी मेदिनीपुर जिले की नंदीग्राम और मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव 6 अक्तूबर को होने हैं और वोटों की गिनती 9 अक्तूबर को होगी। पश्चिम बंगाल में ये उपचुनाव इसलिए कराने पड़े क्योंकि शुभेंदु अधिकारी नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से जीते थे और उन्होंने नंदीग्राम सीट छोड़ने का फ़ैसला किया, जबकि AJUP नेता हुमायूं कबीर नौदा और रेजीनगर दोनों सीटों से जीते थे और उन्होंने रेजीनगर सीट छोड़ने का फैसला किया।

विधानसभा चुनाव में हार के बाद हुई थी टीएमसी में टूट
चुनाव आयोग का यह आदेश मई में विधानसभा चुनाव में हार के बाद टीएमसी विधायक दल में हुई बगावत के बाद आया है, जो बाद में संसद तक फैल गई। जून में, 58 बागी विधायकों ने ममता गुट के उम्मीदवार सोवनदेब चट्टोपाध्याय की जगह निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी को पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष का नेता चुना और स्पीकर से मान्यता हासिल की। पांच दिन बाद, यह बगावत संसद तक पहुंच गई, जहां काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में पार्टी के 20 लोकसभा सांसदों ने NCPI का साथ दिया और स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए का समर्थन किया।
 
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