फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court agrees to hear plea of NGO challenging reduction of age of consent

Supreme Court: सहमति से संबंध बनाने की उम्र को लेकर NGO की याचिका पर होगी 'सुप्रीम' सुनवाई; की गई है यह मांग

Sat, 26 Aug 2023 08:03 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sat, 26 Aug 2023 08:03 PM IST
सार

याचिका को लेकर सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने केंद्र को नोटिस जारी किया है। साथ ही याचिका को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की ओर से दायर लंबित लंबित याचिका के साथ टैग कर दिया।
 

विज्ञापन
Supreme Court agrees to hear plea of NGO challenging reduction of age of consent
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सहमति से संबंध बनाने के लिए उम्र की सीमा में कटौती के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अपनी सहमति दे दी है। बता दें कि एनजीओ बचपन बचाओ आंदोलन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करके सहमति से संबंध बनाने की उम्र में किसी भी कटौती का विरोध किया है। एनजीओ की याचिका में कहा गया है कि यह बड़ी संख्या में यौन शोषण के शिकार बच्चों, खासकर लड़कियों के हितों को खतरे में डालता है। 

विज्ञापन


याचिका को लेकर सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने केंद्र को नोटिस जारी किया है। साथ ही याचिका को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की ओर से दायर लंबित लंबित याचिका के साथ टैग कर दिया।
विज्ञापन


बता दें कि एनसीपीसीआर ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पिछले साल के आदेश को चुनौती दी थी जिसमें कहा गया था कि एक नाबालिग मुस्लिम लड़की अपनी पसंद के व्यक्ति से शादी कर सकती है। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को नोटिस जारी कर केंद्र से जवाब मांगा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


एनजीओ की याचिका में कई दिशा-निर्देशों की मांग के अलावा, अदालतों को पोक्सो अधिनियम के तहत आपराधिक कार्यवाही से निपटने के दौरान नाबालिग पीड़िता के आकस्मिक संबंधों और अनैतिक रवैये के बारे में टिप्पणियां करने से बचने का निर्देश देने की भी मांग की है। याचिका में तमिलनाडु के पुलिस महानिदेशक के कार्यालय से 3 दिसंबर, 2022 को जारी परिपत्र को भी चुनौती दी, जिसमें पुलिस अधिकारियों को आपसी रोमांटिक मामलों में आरोपियों की गिरफ्तारी में जल्दबाजी न दिखाने का निर्देश दिया गया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उनमें से अधिकांश ‘आपसी रोमांटिक रिश्तों’ की श्रेणी में आते हैं। 


गौरतलब है कि हाल ही में बॉम्बे हाईकोर्ट ने किशोरों के लिए सहमति से यौन संबंध बनाने की उम्र सीमा कम करने की राय दी थी। अदालत ने कहा था कि कई देशों ने किशोरों के लिए सहमति से यौन संबंध बनाने की उम्र कम कर दी है और अब समय आ गया है कि हमारा देश और संसद भी दुनिया भर में हो रही घटनाओं से अवगत हो। न्यायमूर्ति भारती डांगरे (Bharati Dangre) की एकल पीठ ने 10 जुलाई को पारित एक आदेश में यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम के प्रावधानों के तहत आपराधिक मामलों की बढ़ती संख्या पर चिंता व्यक्त की, जहां आरोपियों को तब भी दंडित किया जाता है जब पीड़ित किशोर होने के बावजूद यह कहते हैं कि वे सहमति से रिश्ते में थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed