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Supreme Court: क्या दोषी ठहराए गए नेता राजनीतिक दल का नेतृत्व कर सकते हैं, सुप्रीम कोर्ट करेगा विचार
Wed, 13 Aug 2025 07:42 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Wed, 13 Aug 2025 07:42 AM IST
सार
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने 2017 की जनहित याचिका में उठाए गए मुद्दे को एक दिलचस्प सवाल करार दिया। पीठ ने कहा कि इस पर जरूर विचार होना चाहिए कि क्या किसी सांविधानिक अदालत को यह निर्देश देना चाहिए कि अनुच्छेद 19 के तहत अधिकार के बावजूद, एक नेता सिर्फ इसलिए पार्टी बनाने के हकदार नहीं होंगा क्योंकि वह मतदान करने का हकदार नहीं हैं।
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सुप्रीम कोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट इस प्रश्न पर विचार करने को सहमत हो गया कि क्या दोषी ठहराया गया नेता किसी पार्टी का नेतृत्व कर सकता है। शीर्ष अदालत ने कहा कि यह विचार करने योग्य मुद्दा है कि जिस नेता को दोषसिद्धि और मतदान के अयोग्य घोषित किया गया हो क्या उसे किसी दल का नेतृत्व करने के सांविधानिक अधिकार से भी वंचित किया जाना चाहिए।
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जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने 2017 की जनहित याचिका में उठाए गए मुद्दे को एक दिलचस्प सवाल करार दिया। पीठ ने कहा कि इस पर जरूर विचार होना चाहिए कि क्या किसी सांविधानिक अदालत को यह निर्देश देना चाहिए कि अनुच्छेद 19 के तहत अधिकार के बावजूद, एक नेता सिर्फ इसलिए पार्टी बनाने के हकदार नहीं होंगा क्योंकि वह मतदान करने का हकदार नहीं हैं। पीठ ने अश्विनी कुमार उपाध्याय की जनहित याचिका पर अगली सुनवाई 19 नवंबर को तय कर दी।
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जस्टिस कांत ने कहा, सिर्फ इसलिए कि किसी व्यक्ति को उसके वैधानिक अधिकार के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया है, आप उसे उसके सांविधानिक अधिकार से स्वतः ही वंचित नहीं कर सकते।
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उपाध्याय ने व्यक्तिगत रूप से पेश होते हुए कहा कि वोट देने से अयोग्य घोषित किया गया व्यक्ति उम्मीदवारों को पार्टी टिकट नहीं दे सकता। इस मुद्दे की जांच जरूरी है, क्योंकि यह एक अस्पष्ट क्षेत्र है। विधि आयोग समेत कई आयोगों ने दोषी व्यक्ति को राजनीतिक दल का प्रमुख बनने की अनुमति न देने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उपाध्याय ने कहा कि जो व्यक्ति वोट नहीं दे सकता या चुनाव नहीं लड़ सकता, वह जेल से भी राजनीतिक पार्टी बनाता है और ऐसे राजनीतिक दल पूरे देश पर शासन करते हैं। जस्टिस कांत ने पूछा, मान लीजिए कि कल संसद यह कानून बना देती है कि कोई भी व्यक्ति 80 वर्ष की आयु के बाद सार्वजनिक पद पर नहीं रहेगा, तो क्या आप उसे राजनीतिक दल का नेतृत्व करने से भी वंचित कर सकते हैं? उपाध्याय ने दोषी ठहराए गए व्यक्तियों को अयोग्य ठहराए जाने की अवधि तक राजनीतिक दल बनाने और उनके पदाधिकारी बनने पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है।