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SC Update: CJI बोले- न्यायिक सक्रियता को न्यायिक दुस्साहस या न्यायिक आतंकवाद में नहीं बदलना चाहिए

Mon, 17 Nov 2025 03:53 AM IST
लव गौर न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: लव गौर Updated Mon, 17 Nov 2025 03:53 AM IST
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Supreme Court 17th Nov Monday news updates Sahara employees salaries Air pollution stubble burning plea others
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)

मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने सोमवार को कहा कि भारत में न्यायिक सक्रियता बनी रहेगी और जहां कहीं भी विधायिका या कार्यपालिका नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने में विफल रहती हैं, वहां देश की संवैधानिक अदालतों, चाहे वे हाईकोर्ट हों या सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करने की जरूरत है। लेकिन साथ ही, न्यायिक सक्रियता को न्यायिक दुस्साहस या न्यायिक आतंकवाद में नहीं बदलना चाहिए।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एफआई रेबेलो की किताब ‘आवर राइट्स: एसेज ऑन लॉ, जस्टिस एंड द कॉन्स्टिट्यूशन’ के विमोचन समारोह में बोलते हुई सीजेई ने कहा कि मुझे लगता है कि  न्यायमूर्ति रेबेलो ने बहुत स्पष्ट रूप से बताया है कि न्यायाधीशों को किस सीमा के भीतर न्यायिक सक्रियता का सहारा लेना चाहिए। उन्होंने बताया है कि किस तरह कानून और संविधान ने भारत जैसे विविधतापूर्ण देश को एकजुट रखने का मार्ग प्रशस्त किया है।
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न्यायमूर्ति गवई ने कहा कि पिछले 75 वर्षों में विधानमंडल, संसद, कार्यपालिका और न्यायपालिका ने हमेशा व्यावहारिक तरीके से काम किया है। मुझे विश्वास है कि यह किताब, जो न्यायाधीशों, वकीलों और मेरे जैसे विधि के छात्रों के लिए एक खजाना साबित होगी, हम सभी को सामाजिक और आर्थिक समानता की यात्रा पर चलने में मदद करने के लिए एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाएगी। 

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वायु प्रदूषण: पराली जलाने से संबंधित याचिका पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट सोमवार को पराली जलाने से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई करेगा, जिससे दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता का स्तर और बिगड़ रहा है। शीर्ष अदालत ने पहले पंजाब और हरियाणा सरकारों से स्थिति को नियंत्रित करने के लिए की गई कार्रवाई से अवगत कराने को कहा था।


मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई, न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने पहले 17 नवंबर को याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति व्यक्त की थी। मुख्य न्यायाधीश ने कहा था, "पंजाब और हरियाणा सरकारें पराली जलाने पर नियंत्रण के लिए उठाए गए कदमों पर जवाब दें।" इससे पहले 3 नवंबर को शीर्ष अदालत ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) को एक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था, जिसमें दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए अब तक उठाए गए कदमों का विवरण दिया गया हो।

सैन्य क्षेत्र के अंदर स्थित एक मस्जिद में आम लोगों को नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें यह शिकायत थी कि चेन्नई में सैन्य क्षेत्र के अंदर स्थित एक मस्जिद में आम लोगों को नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं दी जा रही है। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि वहां सुरक्षा से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें अप्रैल 2025 के मद्रास हाईकोर्ट की खंडपीठ के आदेश को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट की बेंच ने एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ दायर अपील को खारिज कर दिया था।

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा था कि वह सेना के प्रशासनिक फैसले में दखल नहीं दे सकती कि पूजा या किसी अन्य कारण से सेना परिसर में बाहरी लोगों को प्रवेश नहीं मिलेगा। याचिकाकर्ता के वकील ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि 'मस्जिद-ए-आलिशान' में बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक केवल कोरोना महामारी के समय लगाई गई थी।

पीठ ने वकील से कहा, यह सुरक्षा का मामला है और कई बातें जुड़ी हुई हैं। हम इसकी कैसे अनुमति दे सकते हैं?  वकील ने कहा कि 1877 से 2022 तक वहां कोई सुरक्षा समस्या नहीं हुई। इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली इस याचिका को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा गया था कि सेना के अधिकारी सैन्य आवास में स्थित इस मस्जिद में आम लोगों को नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं दे रहे हैं।

हवाई किराये में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव रोकने संबंधी याचिका पर केंद्र से जवाब तलब
सुप्रीम कोर्ट ने हवाई किराये में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव रोकने संबंधी याचिका पर केंद्र व अन्य से जवाब मांगा है। याचिका में भारत में निजी विमानन कंपनियों की ओर से हवाई किराये और अन्य शुल्कों में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए बाध्यकारी नियामक दिशानिर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया है।

शीर्ष अदालत सामाजिक कार्यकर्ता एस लक्ष्मीनारायणन की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गई। उन्होंने नागरिक उड्डयन क्षेत्र में पारदर्शिता और यात्री सुरक्षा के लिए एक मजबूत, स्वतंत्र नियामक स्थापित करने की मांग की है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने केंद्र, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय और भारतीय विमानपत्तन आर्थिक नियामक प्राधिकरण को नोटिस जारी कर याचिका पर जवाब मांगा और मामले की सुनवाई चार हफ्ते बाद निर्धारित की। इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रवींद्र श्रीवास्तव और अधिवक्ता चारु माथुर और अभिनव वर्मा उपस्थित हुए। याचिका में दावा किया गया है कि सभी निजी एयरलाइनों ने बिना किसी विश्वसनीय औचित्य के, इकोनॉमी क्लास के यात्रियों के लिए मुफ्त चेक-इन बैगेज भत्ते को 25 किलो से घटाकर 15 किलो कर दिया है, इससे पहले टिकट सेवा का हिस्सा जो था, वह एक नए राजस्व स्रोत में परिवर्तित हो गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने भाकपा की याचिका पर सुनवाई की अनुमति दी
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) की ओर से दायर उस याचिका पर सुनवाई करने की अनुमति दी, जिसमें तमिलनाडु में सार्वजनिक स्थलों से राजनीतिक दलों के स्थायी ध्वज स्तंभों को हटाने के मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने तमिलनाडु सरकार और अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी किए और उनसे इस याचिका पर जवाब मांगा। बेंच ने निर्देश दिया कि वर्तमान स्थिति को बरकरार रखा जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को अन्य लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ा, जिनमें इसी तरह का मुद्दा उठाया गया है।

मद्रास हाईकोर्ट ने अपने एकल न्यायाधीश के आदेश को बरकरार रखा था, जिसमें तमिलनाडु में सभी राजनीतिक दलों और समुदाय तथा धार्मिक संगठनों को 12 सप्ताह के भीतर सार्वजनिक स्थानों पर लगाए गए स्थायी झंडा-स्तंभ हटाने का निर्देश दिया गया था।

सहारा कर्मचारियों के बकाया वेतन पर आज सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट आज सोमवार को सहारा समूह कंपनियों के उन कर्मचारियों की अंतरिम याचिकाओं पर सुनवाई करेगा, जिन्होंने कई महीनों से लंबित वेतन के भुगतान की मांग की है। मामले को सीजेआई बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ सूचीबद्ध करेगी।

14 अक्तूबर को कोर्ट ने केंद्र, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) तथा अन्य पक्षों से सहारा इंडिया कमर्शियल कॉर्पोरेशन लि. (एसआईसीसीएल) की याचिका पर जवाब मांगा था। एसआईसीसीएल ने अपनी 88 प्रमुख संपत्तियां अदाणी प्रॉपर्टीज प्रा.लि. को बेचने की अनुमति मांगी है। इस याचिका पर 17 नवंबर को सुनवाई प्रस्तावित है। शुक्रवार को कर्मचारियों के वकीलों ने सीजेआई से अनुरोध किया कि उनकी वेतन संबंधी याचिकाओं को भी सोमवार की सुनवाई में शामिल किया जाए क्योंकि कर्मचारियों को लंबे समय से भुगतान नहीं हुआ है। 
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