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दुनिया झेलेगी अब तक का सबसे शक्तिशाली अल नीनो?: शोधकर्ताओं ने सुझाए पांच कदम, सेहत पर मंडरा सकता है खतरा

Fri, 09 Oct 2026 06:19 PM IST
देवेश त्रिपाठी पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: देवेश त्रिपाठी Updated Fri, 09 Oct 2026 06:19 PM IST
सार

इस साल के अंत में शक्तिशाली अल नीनो की आशंका के बीच शोधकर्ताओं ने स्वास्थ्य संबंधी खतरों को कम करने के लिए पहले से तैयारी करने पर जोर दिया है। भारत सहित कई क्षेत्रों में तापमान, बारिश और चरम मौसमी घटनाओं में बदलाव देखने को मिल सकता है। इससे संक्रामक बीमारियों, कुपोषण और गर्मी से होने वाली परेशानियों का जोखिम बढ़ सकता है।

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सुपर अल नीनो - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

इस साल के अंत में अब तक का सबसे शक्तिशाली अल नीनो विकसित होने की आशंकाओं के बीच शोधकर्ताओं ने इससे निपटने के लिए पांच कदम सुझाए हैं। उनका कहना है कि इन उपायों से दुनिया भर में लोगों को संभावित प्रभावों के लिए बेहतर तरीके से तैयार किया जा सकता है और स्वास्थ्य संबंधी नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।
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ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल के नेतृत्व में शोधकर्ताओं की टीम ने कहा कि संभावित खतरों का व्यापक आकलन करना इस दिशा में अहम है। इससे संक्रामक बीमारियों के प्रसार, कुपोषण और गर्मी से जुड़ी समस्याओं जैसे शरीर में पानी की कमी और लू लगने के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
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शोधकर्ताओं ने की क्या अपील?
शोधकर्ताओं की ये सिफारिशें चिकित्सा पत्रिका 'द लैंसेट' में प्रकाशित एक पत्र के रूप में सामने आई हैं। इनमें संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अपील की गई है कि अल नीनो की आधिकारिक घोषणा होने पर स्वास्थ्य की रक्षा और बीमारियों की रोकथाम के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं।
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शोधकर्ताओं के मुताबिक, अल नीनो चक्र का पूर्वानुमान कई महीने पहले लगाया जा सकता है। इसलिए इसके प्रभाव को कम करने के लिए पहले से तैयारी की जानी चाहिए। खासकर उन देशों में अधिक सतर्कता जरूरी है, जहां इसका खतरा ज्यादा है।

विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने भी जताई चिंता
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने सितंबर 2026 की शुरुआत में जारी अपडेट में कहा था, "अल नीनो की स्थिति पूरी तरह स्थापित हो चुकी है और इसके और मजबूत होने की आशंका है।" अल नीनो एक जलवायु संबंधी स्थिति है, जो समुद्र की सतह के तापमान में बढ़ोतरी से जुड़ी है। अध्ययनों में पाया गया है कि इसके कारण कई क्षेत्रों में चरम मौसमी घटनाएं बढ़ सकती हैं।

डब्ल्यूएमओ ने कहा, "उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में असाधारण रूप से गर्म परिस्थितियां इसके और मजबूत होने में मदद कर रही हैं। बहुत शक्तिशाली अल नीनो दुनिया भर में बारिश और तापमान के पैटर्न को काफी हद तक बदल सकता है और चरम मौसम की घटनाओं को बढ़ावा दे सकता है।"

भारत समेत किन देशों में अल नीनो का खतरा?
शोधकर्ताओं के अनुसार, अल नीनो का सीधा असर दुनिया के कई हिस्सों में महसूस किया जा सकता है। भारत, पूर्वी एशिया, दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका के कुछ हिस्सों और पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में चरम मौसमी घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है। शोधकर्ताओं ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को बढ़ाने में अल नीनो की भूमिका व्यापक रूप से स्वीकार की जाती है, लेकिन इससे पैदा होने वाले अतिरिक्त खतरों का अब तक बड़े पैमाने पर आकलन नहीं किया गया है।

शोध दल की प्रमुख लेखिका और यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल में जलवायु विज्ञान की वरिष्ठ शोध सहयोगी रूबी लीबर ने कहा, "मौजूदा अल नीनो कई क्षेत्रों को अधिक चरम जलवायु परिस्थितियों की ओर धकेल रहा है। ऐसे में अलग-अलग देशों और स्थानों के खतरों को बेहतर ढंग से समझने, मापने और उनकी पहचान करने की तत्काल और अभूतपूर्व जरूरत है।"

अल नीनो से निपटने के लिए क्या हैं पांच अहम सुझाव?
शोधकर्ताओं ने सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के लिए पांच प्रमुख कदम सुझाए हैं।
  • पहला: राष्ट्रीय सरकारों को लोगों के स्वास्थ्य पर अल नीनो के संभावित प्रभावों का आकलन करने में मदद दी जाए। इसके साथ ही शुरुआती चेतावनी प्रणाली विकसित करने समेत जरूरी एहतियाती उपाय लागू किए जाएं।
  • दूसरा: जलवायु और स्वास्थ्य के बीच संबंधों का आकलन करने वाले अल नीनो केंद्रित अध्ययनों का दायरा बढ़ाया जाए। इन अध्ययनों के निष्कर्षों का इस्तेमाल नीतियां बनाने और उन्हें लागू करने में किया जाए।
  • तीसरा: अल नीनो के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों की लगातार समीक्षा की जाए। इससे इसके बदलते असर की व्यापक तस्वीर सामने आएगी और उन क्षेत्रों की पहचान हो सकेगी, जहां अभी पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं है।
  • चौथा: जलवायु और स्वास्थ्य संबंधी उपायों की लागत और उनसे होने वाले लाभ का आकलन किया जाए। इसमें शुरुआती चेतावनी प्रणाली, स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता बढ़ाना, शहरों में बाढ़ से सुरक्षा और खाद्य व्यवस्था को मजबूत करना शामिल है।
  • पांचवां: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग बढ़ाया जाए, ताकि वैज्ञानिक अध्ययन के जरिए यह बेहतर ढंग से समझा जा सके कि किसी आपदा या चरम मौसमी घटना का कितना असर मानव गतिविधियों से प्रेरित जलवायु परिवर्तन और कितना अल नीनो के कारण हुआ है।

रूबी लीबर ने कहा, "साझेदारी में काम करना बेहद जरूरी है। वैश्विक संगठनों को तत्काल इस दिशा में कदम उठाने चाहिए और वैज्ञानिक आकलन में हुई प्रगति का इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि यह अधिक सटीक तरीके से समझा जा सके कि प्रभावों का कितना हिस्सा मानव जनित जलवायु परिवर्तन और कितना अल नीनो के कारण है।" उन्होंने कहा, "अल नीनो से जुड़े प्रभावों की अलग से पहचान करके हम अधिक लक्षित और किसी विशेष घटना के अनुरूप कदम उठा सकते हैं।"
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