सूफिज्म ही है इस्लाम और मुस्लिम की असली पहचानः मदनी
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देश-दुनिया को मुस्लिम चरम पंथ का खतरा सता रहा है। चंद लोगों के गलत कामों की वजह से पूरे मुस्लिम समुदाय को संदेह की नजरों से देखा जाने लगा है। उपर से अमेरिकी राष्ट्रपति के पद पर डोनाल्ड ट्रंप की जीत को मुस्लिमों के लिए चेतावनी के तौर पर प्रचारित किया जा रहा है। देश के आंतरिक हिस्से में भी समाज में सौहार्द की कमी नजर आ रही है। तीन तलाक और सामान्य नागरिक संहिता सरीखे मुद्दे पर सरकार और मुस्लिम संगठन आमने-सामने हैं। इन विभिन्न मुद्दों पर मुस्लिम समाज की चिंता को जानने के लिए जमीयत उलमा ए हिंद के राष्ट्रीय महासचिव मौ. महमूद मदनी से एम. संजय ने बतचीत की, पेश है प्रमुख अंश।
सवाल : मदनी जी देश-दुनिया के सामने मुस्लिम कट्टरपंथ एक नई चुनौती बनकर उभर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने तो अपनी जीत के लिए सीधे-सीधे मुस्लिम समाज को निशाना बनाया है। मुस्लिम समाज इस चुनौती से कैसे निपटेगा?
देखिए, कुछ लोगों के गलत स्वार्थ के वजह से पूरे मुस्लिम धर्म को गलत नजरों से देखा जाना ठीक नहीं है। मुस्लिमों को हताश होने की जरूरत नहीं है। मुस्लिम धर्म को देखने के लिए सूफीवाद को समझने की जरूरत है। सूफीवाद ही इस्लाम और मुस्लिमों की असली पहचान है। हजरत ख्वाजा मोइनउद्दीन चिश्ती साहब ने पूरे मुस्लिम देश समेत भारत और उसके पड़ोसी देशों के लिए इस्लाम की जो व्याख्या की है वही इस्लाम की ताकत है। इस्लाम में चरमपंथ का स्थान नहीं है। उन्होंने इस्लामीक भाईचारे के बजाय वैश्विक भाईचारे की बात की थी। धर्म से ज्यादा पूरे इंसानियत के बीच भाईचारा जरूरी। सूफी का चलन दुनिया को जोड़ने वाला है।
सवाल: धर्म के नाम पर समाज के बीच खाई बढ़ रही है। इसके लिए मुस्लिमों को जिम्मेदार ठहराते हुए उन्हें कटघरे में घेरा जा रहा है?
हम भारत के नगारीक मजबूरी के वजह से नहीं बल्कि अपनी पसंद की वजह से हैं। हिंदूस्तान हमारा देश है। हर समाज और देश में कुछ कमियां है, उसे गिनाने की जरूरत नहीं है। समाज की कमियों को समाज के जरिए दूर किया जाना चाहिए। हम ये देश छोड़ नहीं सकते। हम यहां रहना चाहते हैं, यहां हमारे मोइनउद्दीन चिश्ती अजमेर शरीफ हैं। ख्वाजा के संदेश को लेकर आगे बढ़ेंगे। समाज के बीच आपसी सौहार्द बढ़ाने की जरूरत।
सवाल: सरकार की ओर से सामान्य नागरिक संहिता लागू किए जाने की चर्चा है। इसे मुस्लिम समुदाय किस रूप में देख रहा है?
सामान्य नागरिक संहित के मामले में हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करेंगे। भारत के हर नागरिक को संविधान के जरिए कुछ अधिकार प्राप्त हैं। संविधान ने हम लोगों को भी अधिकार दिए हैं। इसमें छेड़छाड़ करने से संविधान निर्माताओं की सोच प्रभावित होगी। यह हमें स्वीकार नहीं। देश के सांप्रदायिक सदभाव को ध्यान में रखते हुए ही संविधान बना है। संविधान की मर्यादा और समाज में सदभाव कायम रखना हर हिन्दूस्तानी की जिम्मेदारी। हम अपनी जिम्मेदारी निभाते रहेंगे।
सवाल: तीन तलाक को लेकर मामला गर्म है, आखिर पूरा मामला क्या है?
मुस्लिम महिलाओं की सुरक्षा और स्वतंत्रता का नारा देकर इस्लाम की बारीकियों को समझे बिना उसका मजाक बनाने की कोशिश की जा रही है। मुस्लिम कानून महिलाओं को जितने अधिकार और संरक्षण प्रदान करता है। महिलाओं को उतना अधिकार किसी भी पर्सनल लॉ बोर्ड ने नहीं दिए है।
दुनिया ने इस्लाम की बेहत्तर जीवनशैली को अपनाया है। इस्लाम में महिलाओं को कानून द्वारा अधिकार प्राप्त है। तलाक का प्रावधान दुनिया ने हमसे लिया है। हां महिलाओं के अधिकार को लेकर मुस्लिम समाज से कुछ गलतीयां हुई हैं। लेकिन इसका मतलब कतई नहीं की हम इस्लाम को छोड दें। हां हम अपने अंदर सुधार के लिए तैयार हैं। बिना किसी उचित कारण तीन तलाक देने वालों का बहिष्कार होना चाहिए। इसपर मुस्लिम समाज का निर्णय अटल है, हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं होगा।
सवाल: आपने दलित-मुस्लिम गठजोड़ की वकालत की है। यह कवायद यूपी चुनाव के मद्देनजर तो नहीं?
सियासी नहीं यह सामाजिक प्रयास है। जात-पात के बीच भेदभाव बढ़ रहा है। छूआछूत के वजह से दलित और आदिवासी प्रताडित हो रहे हैं। यह समाज की जरूरत है कि मुस्लिम बंधू आगे आकर दलित-आदिवासियों के बीच विश्वास बढ़ाएं। इसके राजनीतिक मायने नहीं है। मकसद समाज से छूआछूत हटाना है।