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'सुभाष चंद्र बोस' इस गांव की तकदीर बदलने की बात कह कर गए थे
Tue, 18 Dec 2018 08:29 PM IST
Avdhesh Kumar
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Tue, 18 Dec 2018 08:29 PM IST
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यही वो मकान है, जहाँ नेताजी 9 दिन तक रहे थे
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नेता जी 'सुभाष चंद्र बोस' इस गांव के लोगों को इनकी तकदीर बदलने की बात कह कर चले गए। 1944 में बोस और उनकी सेना को नौ दिन तक शरण देने वाले ग्रामीणों से उन्होंने वादा किया था कि आजादी मिलते ही सबसे पहले इस गांव की दशा सुधारी जाएगी। यहां पर अच्छा स्कूल होगा, स्वच्छ पेयजल मिलेगा, राइस मिल लगेगी और लोगों को रोजगार की तलाश में कहीं बाहर न भटकना पड़े, इसका भी कुछ इंतजाम किया जाएगा।
उन्होंने गांव को गोद लेने की बात कही थी। नेता जी चले गए और फिर कभी नहीं लौटे। नागालैंड का 'रुजाजो' गांव आज भी उनकी राह देख रहा है। आजादी के 70 साल बीत गए, मगर 874 घरों वाला यह गांव न तो हैरिटेज स्थलों की सूची में जगह पा सका और न ही नेता जी द्वारा दिए गए भरोसे की किसी ने सुध ली।
नेता जी, जिस घर में रहे थे, वह भी अब जर्जर हो चला है
गांव में सबसे अधिक आयु वाले बपोसूयुवी स्वोरो (101) उस वक्त के एकमात्र गवाह हैं, जब नेताजी इस गांव में आए थे। सोमवार को अमर उजाला डॉट कॉम से बातचीत करते हुए उन्होंने बताया कि नेता जी अपनी फौज के साथ पहले निकटवर्ती जेसामी गांव में पहुंचे और फिर वहां से रुजाजो आए। चूंकि वह लड़ाई का दौर था, ब्रिटिश आर्मी लगातार बम गिरा रही थी।
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इसलिए सुभाष चंद्र बोस ने इस गांव को अपना मुख्यालय बना लिया। नेताजी यहां नौ दिन तक रहे। वे एक पत्थर के टीले पर बैठक करते थे। ब्रिटिश आर्मी का विमान उनकी टोह लेने के लिए गांव के ऊपर मंडराता रहता था। बमबारी भी चलती रही। इसी वजह से नेताजी ने बैठक स्थल बदल लिया। उन्होंने गांव के बाहर थोड़ी ऊँचाई पर बांस के पेड़ों के बीच अपना अस्थायी मीटिंग रुम बनाया। नेताजी के साथ हजारों सैनिक भी गांव में ही रह रहे थे।
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उन्होंने गांव को गोद लेने की बात कही थी। नेता जी चले गए और फिर कभी नहीं लौटे। नागालैंड का 'रुजाजो' गांव आज भी उनकी राह देख रहा है। आजादी के 70 साल बीत गए, मगर 874 घरों वाला यह गांव न तो हैरिटेज स्थलों की सूची में जगह पा सका और न ही नेता जी द्वारा दिए गए भरोसे की किसी ने सुध ली।
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नेता जी, जिस घर में रहे थे, वह भी अब जर्जर हो चला है
गांव में सबसे अधिक आयु वाले बपोसूयुवी स्वोरो (101) उस वक्त के एकमात्र गवाह हैं, जब नेताजी इस गांव में आए थे। सोमवार को अमर उजाला डॉट कॉम से बातचीत करते हुए उन्होंने बताया कि नेता जी अपनी फौज के साथ पहले निकटवर्ती जेसामी गांव में पहुंचे और फिर वहां से रुजाजो आए। चूंकि वह लड़ाई का दौर था, ब्रिटिश आर्मी लगातार बम गिरा रही थी।
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इसलिए सुभाष चंद्र बोस ने इस गांव को अपना मुख्यालय बना लिया। नेताजी यहां नौ दिन तक रहे। वे एक पत्थर के टीले पर बैठक करते थे। ब्रिटिश आर्मी का विमान उनकी टोह लेने के लिए गांव के ऊपर मंडराता रहता था। बमबारी भी चलती रही। इसी वजह से नेताजी ने बैठक स्थल बदल लिया। उन्होंने गांव के बाहर थोड़ी ऊँचाई पर बांस के पेड़ों के बीच अपना अस्थायी मीटिंग रुम बनाया। नेताजी के साथ हजारों सैनिक भी गांव में ही रह रहे थे।
जब आजादी मिलेगी तो मैं इस गांव को गोद लूंगा
विलेज काउंसिल चीफ (वीसीसी) जोलेल हू
बपोसूयुवी स्वोरो ने बताया, नौ दिन तक गांव के हर आदमी ने नेताजी का सहयोग किया। चूंकि खाने को ज्यादा कुछ नहीं था, मगर चावल लोगों के पास भरपूर मात्रा में था। जिन लोगों के पास धान पड़ा था, उन्होंने नेताजी की फौज इंडियन नेशनल आर्मी (आईएनए) का पेट भरने के लिए रातों-रात चावल निकाला। नेताजी जब यहां से जाने लगे तो बोले, आप चिंता न करें। मुझे यह गांव याद रहेगा।
आजादी मिलते ही मैं इस गांव को गोद लूंगा। यहां पर सबसे पहले पीने का साफ पानी और एक राइस मिल लगवाने का इंतजाम करुंगा। जब नेताजी जा रहे थे तो गांव वालों की आंखों में आंसू थे, लेकिन नेताजी जरा सा भी विचलित नहीं हुए। उन्होंने कई लोगों को गले लगाया और कहा, मुझे अपनी बात याद रहेगी। इतना कहकर नेताजी और उनकी फौज से गांव से कूच कर गई। पीछे बचा तो केवल इंतजार जो आज भी है।
आजादी मिलते ही मैं इस गांव को गोद लूंगा। यहां पर सबसे पहले पीने का साफ पानी और एक राइस मिल लगवाने का इंतजाम करुंगा। जब नेताजी जा रहे थे तो गांव वालों की आंखों में आंसू थे, लेकिन नेताजी जरा सा भी विचलित नहीं हुए। उन्होंने कई लोगों को गले लगाया और कहा, मुझे अपनी बात याद रहेगी। इतना कहकर नेताजी और उनकी फौज से गांव से कूच कर गई। पीछे बचा तो केवल इंतजार जो आज भी है।
गांव में सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं
गांव में सबसे अधिक आयु वाले बपोसूयुवी स्वोरो (101), इसी मकान में रहे थे नेताजी
विलेज काउंसिल चीफ (वीसीसी) जोलेल हूं का कहना है कि आजादी के बाद से लेकर अभी तक न जाने कितने नेताओं को इस गांव को हैरीटेज घोषित कराने के लिए लिखा जा चुका है, मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। यहां तक कि वह मकान, जिसमें नेताजी नौ दिन तक रहे, अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। गांव में मोबाइल टावर, अच्छा सरकारी स्कूल, हर घर में स्वच्छ पेयजल, राइस मिल और रोजगार, इनमें से कुछ नहीं है।
वीसीसी की ओर से पीएम, सीएम और केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री को भी लिखकर गांव को हैरिटेज स्थल घोषित कराने की मांग की गई है। 2017 में यहां आईसीएचआर द्वारा एक सेमिनार भी आयोजित कराया गया, जिसमें नागालैंड के राज्यपाल पीबी आचार्य और त्रिपुरा के तत्कालीन गवर्नर तथागत राय के अलावा कई दूसरी हस्तियां भी पहुंची थी। ग्रामीणों ने उन्हें भी मांग पत्र सौंपा था।
वीसीसी की ओर से पीएम, सीएम और केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री को भी लिखकर गांव को हैरिटेज स्थल घोषित कराने की मांग की गई है। 2017 में यहां आईसीएचआर द्वारा एक सेमिनार भी आयोजित कराया गया, जिसमें नागालैंड के राज्यपाल पीबी आचार्य और त्रिपुरा के तत्कालीन गवर्नर तथागत राय के अलावा कई दूसरी हस्तियां भी पहुंची थी। ग्रामीणों ने उन्हें भी मांग पत्र सौंपा था।
बनारस की 'सुभाष संस्था' अब गांव की तकदीर बदलने के लिए आगे आई है
नेताजी अपनी फ़ौज के साथ इसी गाँव में रहे थे।
बनारस में नेताजी के कार्यों से युवाओं को अवगत कराने का काम कर रही सुभाष संस्था अब रुजाजो की सुध लेने के लिए आगे बढ़ी है। गांव के दौरे पर गए संस्था के प्रभारी तमल सान्याल का कहना है कि वे नेताजी द्वारा इस गांव को लेकर किए गए सभी वायदों को पूरा कराएंगे। सबसे पहले मोबाइल टावर को लेकर स्थानीय अफसरों से बातचीत की जा रही है। इसके बाद यहां एक बड़ा राइस मिल खोलने की लड़ाई लड़ी जाएगी। साथ ही गांव को हैरिटेज का दर्जा दिलाने के लिए केंद्रीय स्तर पर इस प्रस्ताव को आगे बढाएंगे।
गांव में हस्तकला केंद्र, सामुदायिक हाल और दो तालाबों को पुनर्जीवित करने की योजना पर आगे बढ़ रहे हैं। 23 जनवरी को नेताजी का जन्म दिन है, इस बार हमारा प्रयास है कि केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री को बुलाकर गांव को हैरिटेज घोषित कराने का प्रस्ताव संबंधित संस्था के पास भिजवा दिया जाए।
गांव में हस्तकला केंद्र, सामुदायिक हाल और दो तालाबों को पुनर्जीवित करने की योजना पर आगे बढ़ रहे हैं। 23 जनवरी को नेताजी का जन्म दिन है, इस बार हमारा प्रयास है कि केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री को बुलाकर गांव को हैरिटेज घोषित कराने का प्रस्ताव संबंधित संस्था के पास भिजवा दिया जाए।