म्यांमार की नई सरकार में सू की बनेंगी पीएम
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म्यांमार में नई लोकतांत्रिक सरकार में नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) की नेता आंग सान सू की प्रधानमंत्री जैसी भूमिका में होंगी। उनके लिए खास तौर से पीएम जैसा एक नया पद बनाया जा रहा है।
नोबेल शांति पुरस्कार विजेता सू की पार्टी एनएलडी ने बीते साल हुए चुनावों में ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी, जिसके बाद देश में दशकों से सत्ता संभाल रही सेना के शासन का अंत हो गया।
हालांकि संविधान के मुताबिक, पति और बेटे के विदेशी नागरिक होने के चलते सू की को देश के राष्ट्रपति पद से वंचित होना पड़ा। इस बीच, भारत और अमेरिका ने म्यांमार में नई सरकार के सत्ता संभालने का स्वागत किया है।
एक विधेयक के मसौदे में यह नया पद बनाया गया है, जिसे अगले कुछ हफ्तों में संसद में पेश किया जाएगा। नया पद एक तरह से सरकार को सलाहकारी भूमिका वाला होगा। सू की पहले से ही कई सरकार पदों पर अपनी पकड़ बनाई हुई हैं।
उन्होंने कई बार कहा है कि वह पर्दे के पीछे से म्यांमार की सत्ता चलाएंगी। बुधवार को उनकी पसंद के और उनके सहपाठी रहे हतिन क्याव ने म्यांमार के नए राष्ट्रपति पद की शपथ ली। वहीं सू की ने भी देश के विदेश मंत्री का पद संभाल लिया है।
हतिन क्याव बने म्यांमार के नए राष्ट्रपति
म्यांमार में बुधवार को ऐतिहासिक सत्ता हस्तांतरण होने के साथ ही लोकतंत्र के नए युग की शुरुआत हो गई। आंग सान सू की के सहपाठी एवं विश्वासपात्र हतिन क्याव ने बुधवार को म्यांमार के नए राष्ट्रपति पद की शपथ ली। म्यांमार की राजधानी नाएप्यीडॉ में पूर्व जनरल थीन सेन ने हतिन क्याव को देश की सत्ता हस्तांतरित कर दी।
इसके साथ ही नोबेल पुरस्कार विजेता एवं लोकतंत्र समर्थक नेता आंग सान सू की की पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) ने 50 साल के सैन्य शासन के बाद देश की सत्ता अपने हाथ में ले ली।
दरअसल, म्यांमार की सैन्य सरकार की ओर से बनाए गए संविधान के तहत सू की के राष्ट्रपति बनने पर प्रतिबंध है, लेकिन इसमें घोषणा की गई है कि सू की अप्रत्यक्ष रूप से शासन चला पाएंगी। ऐसे में यह स्पष्ट है कि हतिन क्याव उनके इशारे पर सरकार चलाएंगे। मालूम हो कि म्यांमार में पिछले साल नवंबर में हुए चुनाव में सू की की एनएलडी पार्टी ने जबरदस्त जीत दर्ज करते हुए 80 फीसदी सीटों पर कब्जा जमाया था।
इसके बाद म्यांमार की राजधानी नाएप्यीडॉ में हतिन क्याव का राष्ट्रपति पद का शपथ लेना सत्ता हस्तांतरण का आखिरी चरण था। अब नई नागरिक सरकार के सामने बदहाल अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने और सामाजिक सुधार की चुनौती है।