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अध्ययन: सुबबूल का बीज टाइप-2 मधुमेह के इलाज में कारगर; भारतीय वैज्ञानिकों की खोज, इंसुलिन प्रतिरोध पर नियंत्रण
Tue, 17 Dec 2024 06:11 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Tue, 17 Dec 2024 06:11 AM IST
सार
शोधकर्ताओं के अनुसार सुबबूल के बीज और फलियों में इंसुलिन प्रतिरोध को नियंत्रित करने की क्षमता होती है। इसलिए यह पौधा टाइप टू मधुमेह और इंसुलिन प्रतिरोध से जुड़ी समस्याओं के इलाज में मदद करता है।
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सुबबूल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
टाइप-टू मधुमेह के इलाज में औषधीय पौधा सुबबूल का बीज बेहद कारगर है। भारतीय वैज्ञानिकों ने इसकी खोज की है और इससे चार सक्रिय यौगिक विकसित किए हैं। जर्नल एसीएस ओमेगा में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार मधुमेह और संबंधित बीमारियों के उपचार के लिए यह पौधा बेहद उपयोगी है।
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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के स्वायत्त संस्थान गुवाहाटी के इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडी इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी (आईएएसएसटी) के शोधकर्ताओं के अनुसार सुबबूल के बीज और फलियों में इंसुलिन प्रतिरोध को नियंत्रित करने की क्षमता होती है। इसलिए यह पौधा टाइप टू मधुमेह और इंसुलिन प्रतिरोध से जुड़ी समस्याओं के इलाज में मदद करता है। भारत में 18 साल से अधिक आयु के 7.7 करोड़ लोग मधुमेह टाइप टू से पीड़ित हैं और करीब 2.5 करोड़ प्रीडायबिटिक हैं। इस औषधीय पौधे के इस्तेमाल से कोल्ड और फ्लू से राहत, तनाव से राहत, बेहतर पाचन और शरीर की मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली में मदद मिलती है। इनमें एंटीबायोटिक, एंटीवायरल और एंटीफंगल गुण पाए जाते हैं। भारत में करीब 18,000 फूलदार पौधों की प्रजातियों में से 7,000 से अधिक का औषधीय पौधों के रूप में उपयोग किया जाता है।
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सांसों की बदबू व दांतों की सेहत के लिए फायदेमंद
सुबबूल सांसों से आने वाली बदबू और मुंह से जुड़ी बीमारियों के लिए भी कारगर है। यह दांतों के स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है। इस पेड़ के छिलके और फली का उपयोग दांत दर्द के इलाज के लिए भी किया जाता है। पेड़ की कोमल शाखाओं का उपयोग दातुन के लिए किया जाता है क्योंकि यह विभिन्न दंत संक्रमणों को ठीक करता है। इसकी छाल में एंटीबैक्टीरियल और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। इसका इस्तेमाल करने से त्वचा की सूजन, जलन और लालिमा कम होती है।
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प्रोटीन और फाइबर का भी समृद्ध स्रोत
सुबबूल या ल्यूकेना एक तेजी से बढ़ने वाला फलदार पेड़ है जो आमतौर पर उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय इलाकों में पाया जाता है। पत्तियों और बीजों को सूप या सलाद के रूप में कच्चा और पकाकर खाया जाता है जो प्रोटीन और फाइबर का एक समृद्ध स्रोत है, जिसके कारण विभिन्न जातीय समुदाय इसका पारंपरिक उपयोग करते हैं। यह कम पानी और कम देखरेख पर भी बहुत तेजी से बढ़ता है। इसका उपयोग ईंधन एवं बायोमास के लिये बहुत उपयोगी पाया गया है। हालांकि इसकी लकड़ी बहुत कमजोर होती है।