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Study: सुधार के नाम पर दुनियाभर में बदल दिए गए 44 फीसदी नदियों के मुहाने, करीब आधे एशिया में मौजूद
Wed, 01 May 2024 06:47 AM IST
निर्मल कांत
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 01 May 2024 06:47 AM IST
सार
शोध में पाया कि विकासशील देशों ने मुहानों के सबसे अधिक क्षेत्र को खोया, जो इस दौरान भूमि-उद्धार के करीब 90 फीसदी (923 वर्ग किलोमीटर) क्षेत्र के बराबर है। जब कोई देश मध्यम आय की राह पर अग्रसर होता है तो वह अक्सर विकास की गति को और तेज करना चाहता है।
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प्रदूषित नदी। (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : एएनआई (फाइल)
विस्तार
वैश्विक स्तर पर बांधों और भूमि सुधार परियोजनाओं ने ढाई लाख एकड़ क्षेत्र में मौजूद मुहाने को शहरी क्षेत्रों या कृषि भूमि में बदल दिया है। यह क्षेत्र आकार में मैनहट्टन से करीब 17 गुना बड़ा है। भू-सुधार के तहत भूमि से पानी को सुखाना और तलछट जमा करना शामिल है। वैश्विक स्तर पर 44 फीसदी नदी मुहानों को बदल दिया गया है। इससे सबसे ज्यादा प्रभावित तेजी से विकसित होते देश हो रहे हैं। अध्ययन जर्नल अर्थ्स फ्यूचर में प्रकाशित हुआ है।
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शोधकर्ताओं ने वैश्विक स्तर पर नदियों के 2,396 मुहानों का अध्ययन किया है, जिनका मुंह (अगला भाग) 90 मीटर से अधिक चौड़ा था। इसके लिए 1984 से 2019 तक लैंडसैट से प्राप्त रिमोट सेंसिंग आंकड़ों की मदद ली गई है। इन मुहानों के 1,027 वर्ग किलोमीटर यानी 2 लाख 50 हजार एकड़ क्षेत्र को शहरी या कृषि भूमि में बदल दिया। इनमें से करीब आधे यानी 47 फीसदी मुहाने एशिया में स्थित हैं।
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विकासशील देशों ने खोई सबसे अधिक जमीन
शोध में पाया कि विकासशील देशों ने मुहानों के सबसे अधिक क्षेत्र को खोया, जो इस दौरान भूमि-उद्धार के करीब 90 फीसदी (923 वर्ग किलोमीटर) क्षेत्र के बराबर है। जब कोई देश मध्यम आय की राह पर अग्रसर होता है तो वह अक्सर विकास की गति को और तेज करना चाहता है।
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मुहाने जरूरी सुरक्षा दीवार
अध्ययन के अनुसार मुहाने बेहद महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र होते हैं जहां मीठे पानी की नदियां खारे समुद्र से मिलती हैं। यह जमीन और समुद्र के बीच की महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं जो न केवल वन्य जीवों को आवास प्रदान करते हैं साथ ही कार्बन के भण्डारण में भी मददगार होते हैं। इसके साथ ही यह परिवहन के केंद्र के रूप में काम करते हैं। खराब या खोए हुए मुहाने पानी की गुणवत्ता को नुकसान पहुंचाते हैं, वन्यजीवों के आवास भी कम हो गए हैं। इसके अलावा सबसे बड़ा नुकसान यह हुआ है कि तूफानों के खिलाफ तटीय सुरक्षा कमजोर हो गई है।