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अध्ययन: आगजनी से हर साल 50,000 मौतें, तापमान बढ़ने से अगले दस सालों में 20% अधिक मौतों का खतरा
Fri, 04 Apr 2025 06:39 AM IST
शुभम कुमार
अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क
Published by: शुभम कुमार
Updated Fri, 04 Apr 2025 06:39 AM IST
सार
ग्लोबल वार्मिंग की वजह से गर्म और शुष्क परिस्थितियां बनती हैं, जिससे शहरी इलाकों में इनका खतरा बढ़ता है। मॉडलिंग शोध में अनुमान लगाया कि 2100 तक भारी ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन परिदृश्य के तहत वाहनों में आग लगने की घटनाओं में 11.6% और बाहरी आग में 22.2% की वृद्धि हो सकती है।
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आगजनी
विस्तार
जलवायु परिवर्तन और तेजी से बढ़ते वैश्विक तापमान के कारण आने वाले दशकों में शहरों में आग लगने की घटनाओं में बढ़ोतरी होने की आशंका है। ग्लोबल वार्मिंग की वजह से गर्म और शुष्क परिस्थितियां बनती हैं, जिससे शहरी इलाकों में इनका खतरा बढ़ता है। नेचर सिटीज में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, दुनियाभर में आग लगने से हर साल लगभग 50 हजार मौतें और एक लाख 70 हजार लोग घायल होते हैं। शोधकर्ताओं ने 20 देशों के 2,847 शहरों में शहरी अग्निशमन विभागों से आंकड़े एकत्र किए, जिसमें अमेरिका, यूके, ऑस्ट्रेलिया और चीन शामिल हैं।
इसके आधार पर 2011 से 2020 के लिए शहर में आग की घटनाओं का एक वैश्विक डाटा तैयार किया गया। इसके जरिए विभिन्न अंतर-सरकारी जलवायु परिवर्तन पैनल (आईपीसीसी) यानी जलवायु परिदृश्यों के आधार पर शहरी आग के विभिन्न प्रकारों की आवृत्ति पर ग्लोबल वार्मिंग के संभावित प्रभावों का आकलन किया गया। इससे ज्ञात हुआ कि शहरों में आग लगने की घटनाओं में आने वाले एक दशक के बाद 20% से ज्यादा बढ़ोतरी होने की संभावना है।
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वाहनों में आग की घटनाओं में 11.6% की वृद्धि की आशंका
मॉडलिंग शोध में अनुमान लगाया कि 2100 तक भारी ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन परिदृश्य के तहत वाहनों में आग लगने की घटनाओं में 11.6% और बाहरी आग में 22.2% की वृद्धि हो सकती है। लेकिन बुनियादी सुरक्षा उपायों में बढ़ोतरी की वजह से इमारतों में आग लगने की घटनाओं में 4.6% की कमी आ सकती है।
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आंधी-तूफान के साथ गिरेगी बिजली
अध्ययन के अनुसार, गर्म तापमान में वायु में ज्यादा वाष्पित पानी होता है। इससे आंधी-तूफान की संभावना बढ़ जाती है। इस वजह से ज्यादा विनाशकारी तूफान और ज्यादा बिजली गिरने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। गर्म तापमान और नमी में कमी के कारण शुष्क परिस्थितियां बनती हैं, इससे जंगल में आग लगने का मौसम लंबा हो जाता है।
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इसके आधार पर 2011 से 2020 के लिए शहर में आग की घटनाओं का एक वैश्विक डाटा तैयार किया गया। इसके जरिए विभिन्न अंतर-सरकारी जलवायु परिवर्तन पैनल (आईपीसीसी) यानी जलवायु परिदृश्यों के आधार पर शहरी आग के विभिन्न प्रकारों की आवृत्ति पर ग्लोबल वार्मिंग के संभावित प्रभावों का आकलन किया गया। इससे ज्ञात हुआ कि शहरों में आग लगने की घटनाओं में आने वाले एक दशक के बाद 20% से ज्यादा बढ़ोतरी होने की संभावना है।
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वाहनों में आग की घटनाओं में 11.6% की वृद्धि की आशंका
मॉडलिंग शोध में अनुमान लगाया कि 2100 तक भारी ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन परिदृश्य के तहत वाहनों में आग लगने की घटनाओं में 11.6% और बाहरी आग में 22.2% की वृद्धि हो सकती है। लेकिन बुनियादी सुरक्षा उपायों में बढ़ोतरी की वजह से इमारतों में आग लगने की घटनाओं में 4.6% की कमी आ सकती है।
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आंधी-तूफान के साथ गिरेगी बिजली
अध्ययन के अनुसार, गर्म तापमान में वायु में ज्यादा वाष्पित पानी होता है। इससे आंधी-तूफान की संभावना बढ़ जाती है। इस वजह से ज्यादा विनाशकारी तूफान और ज्यादा बिजली गिरने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। गर्म तापमान और नमी में कमी के कारण शुष्क परिस्थितियां बनती हैं, इससे जंगल में आग लगने का मौसम लंबा हो जाता है।