आईआईटी में सेल्फ स्टडी करने वाले ही गाड़ते हैं झंडे, शोध में खुलासा
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आईआईटी की तैयारी के नाम पर बेशक गली गली में कोचिंग इंस्टीट्यूट खुल गए हों और कोटा जैसे शहर की पहचान उसके कोचिंग संस्थानों के रूप में हो रही हो लेकिन घर पर ही तैयारी करने वालों के सामने ये सब फीके पड़ रहे हैं।
यह खुलासा हुआ है हाल ही में हुए एक शोध में, जिसमें सामने आया है कि आईआईटी एग्जाम पास करने वालों में कोचिंग से तैयारी करने वालों के मुकाबले सेल्फ स्टडी करने वाले छात्र ज्यादा सफल रहते हैं। हालांकि गांव के मुकाबले शहरी इलाके के छात्र इस परीक्षा में आज भी पिछड़े हुए हैं।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार इस साल आईआईटी की परीक्षा कराने वाली आईआईटी गुवाहाटी द्वारा करवाए गए शोध में यह बात सामने आई है। इस साल सफल होने वाले 10,576 छात्रों में से 52.4 फीसदी यानि 5539 छात्र सेल्फ स्टडी करके ही इस प्रतिष्ठित परीक्षा में पास होने में सफल रहे, जबकि कोचिंग में महंगी फीस देकर पढ़ाई करने वाले मात्र 44.5 फीसदी यानि 4,711 छात्र ही आईआईटी तक पहुंचे। दो फीसदी छात्र ऐसे रहे जिन्होंने व्यक्तिगत ट्यूशन और पत्राचार कोर्स से तैयारी की।
अनपढ़ मां बाप के बच्चों ने भी मारी आईआईटी में बाजी
आईआईटी गुवाहाटी द्वारा जारी किए गए शोध के विस्तृत आंकडों में सामने आया है कि आईआईटी प्रवेश परीक्षा में सफल रहने वाले 75 फीसदी छात्र शहरी इलाकों के थे, जबकि बाकी छात्र ग्रामीण इलाकों से आने वाले हैं। हालांकि स्थानीय बोर्डों के मुकाबले सबसे ज्यादा सीबीएसई के 5,849 बच्चे इस परीक्षा में अव्वल रहे।
इसके अलावा शोध में एक ट्रेंड और सामने आया है जिसमें आईआईटी, एनआई और ट्रिपल आईआईटी के लिए क्वालीफाई करने वाले कुल 36,566 छात्रों में से 10200 छात्रों के माता पिता सरकारी नौकरी में हैं, जबकि 5,814 बिजनेशमैन और 4,097 प्राइवेट जॉब में हैं। खेती करने वाले किसानों के 3,213 बच्चे भी इस एग्जाम को पास करने में सफल रहे हैं। जबकि शिक्षक माता पिता के 1,700 बच्चे भी प्रवेश परीक्षा में सफल रहे।
हालांकि आईआईटी कोचिंग के लिए देशभर में मशहूर कोटा का इस परीक्षा में भी बोलबाला है। कोटा के कुल 1,700 छात्रों ने आईआईटी परीक्षा में सफलता हासिल की है। खास बात ये है कि हर बार आईआईटी में सर्वाधिक छात्र देने वाला तमिलनाडु इस बार टॉप 12 की लिस्ट में भी नहीं है।
शोध में एक और रोचक बात सामने आई है जिसमें आईआईटी परीक्षा में झंडे गाड़ने वाले छात्रों में से 1,000 के मां बाप अनपढ़ और 5,090 मात्र दसवीं पास ही हैं। जबकि 14,619 के ग्रेजुएट और 8,893 के अभिभावक पोस्टग्रेजुएट हैं। इसके अलावा 6,929 छात्रों के मां बाप की सालाना कमाई तो एक लाख से भी कम है।