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US: भारत-यूएस संबंधों को अमेरिकी संसद का मिला मजबूत समर्थन, मतभेदों पर चिंता भी उभर रही
Tue, 19 May 2026 12:53 PM IST
नितिन गौतम
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Tue, 19 May 2026 12:53 PM IST
सार
टैरिफ विवाद को लेकर भारत और अमेरिका के रिश्तों में तनाव पैदा हो गया था। हालांकि अमेरिकी संसद के दोनों दलों के सांसद भारत के साथ अमेरिका के रिश्तों को बेहद अहम मानते हैं। आइए जानते हैं कि उन्होंने भारत-अमेरिका के रिश्तों को लेकर क्या-क्या कहा।
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india us trade deal
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अमेरिका के सांसदों ने भारत और अमेरिका के संबंधों को मजबूत करने की वकालत की है। अमेरिकी सांसदों ने कहा है कि व्यापार और टैरिफ जैसे मुद्दों पर दोनों देशों की सरकारों के बीच मतभेद होने के बावजूद भारत-अमेरिका संबंधों को अमेरिकी कांग्रेस में मजबूत द्विदलीय समर्थन हासिल है। साथ ही अमेरिकी सांसदों ने भारत से वैश्विक मुद्दों पर बड़ी भूमिका निभाने की अपील भी की।
'भारत, अमेरिका के सबसे अहम भू-राजनीतिक साझेदारों में से एक'
अमेरिकी राजधानी में 'कैपिटल हिल समिट 2026' का आयोजन किया गया। यह सम्मेलन अमेरिका-भारत फ्रेंडशिप काउंसिल द्वारा आयोजित किया गया था। इस संगठन के सह-संस्थापक स्वदेश चटर्जी ने भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते के समर्थन में अमेरिकी सांसदों का समर्थन जुटाने में अहम भूमिका निभाई थी। इस कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए डेमोक्रेट सांसद रो खन्ना और एमी बेरा ने कहा कि भारत को यूक्रेन युद्ध जैसे वैश्विक संकटों के समाधान में अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। मोंटाना से रिपब्लिकन सीनेटर स्टीव डाइन्स ने कहा कि भारत, अमेरिका के सबसे अहम भू-राजनीतिक साझेदारों में से एक है और दोनों देशों के साझा रणनीतिक हित केवल व्यापार और कूटनीति तक सीमित नहीं हैं।
टैरिफ विवाद का जिक्र करते हुए डाइन्स ने कहा, 'भारत जैसे अहम साझेदार के साथ इस तरह के तनाव की जरूरत नहीं थी।' उन्होंने जनवरी में अपनी भारत यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय नेतृत्व ने टैरिफ मुद्दे पर अपनी चिंता सीधे उनके सामने रखी थी। बाद में फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई फोन बातचीत में भी यह मुद्दा उठा था।
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अमेरिकी सांसदों ने संबंधों में तनाव की बात मानी
कैलिफोर्निया से सांसद एमी बेरा ने माना कि व्यापार और टैरिफ को लेकर दोनों देशों के बीच कुछ तनाव पैदा हुआ है, लेकिन अमेरिकी कांग्रेस अब भी भारत के साथ मजबूत रिश्तों के पक्ष में है। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस के नजरिए से पिछले तीन दशकों में कुछ नहीं बदला है। बिल क्लिंटन से लेकर जॉर्ज बुश, बराक ओबामा, डोनाल्ड ट्रंप और जो बाइडेन तक हर प्रशासन में भारत-अमेरिका संबंध लगातार मजबूत हुए हैं।'
बेरा ने कहा कि वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहे भारत को अब बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियां भी उठानी होंगी। रो खन्ना ने कहा कि रूस के साथ पुराने संबंधों को देखते हुए भारत यूक्रेन युद्ध खत्म कराने में महत्वपूर्ण कूटनीतिक भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा, 'अगर आप वैश्विक नेता बनना चाहते हैं, तो जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हट सकते।' उन्होंने कहा, 'अमेरिका और भारत दोनों बहु-नस्लीय लोकतंत्र हैं और इसी साझा लोकतांत्रिक सोच के आधार पर भविष्य की साझेदारी आगे बढ़नी चाहिए।”
'सिस्टम फिलहाल चेतावनी के संकेत दे रहा'
नॉर्थ कैरोलिना से डेमोक्रेट सांसद डेबोरा रॉस ने कहा कि भारत और अमेरिका लोकतंत्र और स्वतंत्रता के साझा मूल्यों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा, 'भारत-अमेरिका साझेदारी दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण साझेदारियों में से एक है और लोकतंत्र तथा वैश्विक प्रगति के भविष्य के लिए इसका सफल होना बेहद जरूरी है।' भारत में अमेरिका के पूर्व राजदूत रिचर्ड वर्मा ने कहा कि व्यापार और वीजा से जुड़े हालिया तनावों ने भारत-अमेरिका संबंधों की कुछ कमजोरियों को उजागर किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर बढ़ती भारत-विरोधी बयानबाजी का जिक्र करते हुए कहा, 'सिस्टम फिलहाल चेतावनी के संकेत दे रहा है।'
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'भारत, अमेरिका के सबसे अहम भू-राजनीतिक साझेदारों में से एक'
अमेरिकी राजधानी में 'कैपिटल हिल समिट 2026' का आयोजन किया गया। यह सम्मेलन अमेरिका-भारत फ्रेंडशिप काउंसिल द्वारा आयोजित किया गया था। इस संगठन के सह-संस्थापक स्वदेश चटर्जी ने भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते के समर्थन में अमेरिकी सांसदों का समर्थन जुटाने में अहम भूमिका निभाई थी। इस कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए डेमोक्रेट सांसद रो खन्ना और एमी बेरा ने कहा कि भारत को यूक्रेन युद्ध जैसे वैश्विक संकटों के समाधान में अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। मोंटाना से रिपब्लिकन सीनेटर स्टीव डाइन्स ने कहा कि भारत, अमेरिका के सबसे अहम भू-राजनीतिक साझेदारों में से एक है और दोनों देशों के साझा रणनीतिक हित केवल व्यापार और कूटनीति तक सीमित नहीं हैं।
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टैरिफ विवाद का जिक्र करते हुए डाइन्स ने कहा, 'भारत जैसे अहम साझेदार के साथ इस तरह के तनाव की जरूरत नहीं थी।' उन्होंने जनवरी में अपनी भारत यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय नेतृत्व ने टैरिफ मुद्दे पर अपनी चिंता सीधे उनके सामने रखी थी। बाद में फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई फोन बातचीत में भी यह मुद्दा उठा था।
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अमेरिकी सांसदों ने संबंधों में तनाव की बात मानी
कैलिफोर्निया से सांसद एमी बेरा ने माना कि व्यापार और टैरिफ को लेकर दोनों देशों के बीच कुछ तनाव पैदा हुआ है, लेकिन अमेरिकी कांग्रेस अब भी भारत के साथ मजबूत रिश्तों के पक्ष में है। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस के नजरिए से पिछले तीन दशकों में कुछ नहीं बदला है। बिल क्लिंटन से लेकर जॉर्ज बुश, बराक ओबामा, डोनाल्ड ट्रंप और जो बाइडेन तक हर प्रशासन में भारत-अमेरिका संबंध लगातार मजबूत हुए हैं।'
बेरा ने कहा कि वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहे भारत को अब बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियां भी उठानी होंगी। रो खन्ना ने कहा कि रूस के साथ पुराने संबंधों को देखते हुए भारत यूक्रेन युद्ध खत्म कराने में महत्वपूर्ण कूटनीतिक भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा, 'अगर आप वैश्विक नेता बनना चाहते हैं, तो जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हट सकते।' उन्होंने कहा, 'अमेरिका और भारत दोनों बहु-नस्लीय लोकतंत्र हैं और इसी साझा लोकतांत्रिक सोच के आधार पर भविष्य की साझेदारी आगे बढ़नी चाहिए।”
'सिस्टम फिलहाल चेतावनी के संकेत दे रहा'
नॉर्थ कैरोलिना से डेमोक्रेट सांसद डेबोरा रॉस ने कहा कि भारत और अमेरिका लोकतंत्र और स्वतंत्रता के साझा मूल्यों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा, 'भारत-अमेरिका साझेदारी दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण साझेदारियों में से एक है और लोकतंत्र तथा वैश्विक प्रगति के भविष्य के लिए इसका सफल होना बेहद जरूरी है।' भारत में अमेरिका के पूर्व राजदूत रिचर्ड वर्मा ने कहा कि व्यापार और वीजा से जुड़े हालिया तनावों ने भारत-अमेरिका संबंधों की कुछ कमजोरियों को उजागर किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर बढ़ती भारत-विरोधी बयानबाजी का जिक्र करते हुए कहा, 'सिस्टम फिलहाल चेतावनी के संकेत दे रहा है।'