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उस प्रोफेसर की कहानी... जिसने अपना पूरा जीवन बिना बिजली के गुजार दिया

Wed, 08 May 2019 08:45 PM IST
Gaurav Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे Published by: Gaurav Pandey Updated Wed, 08 May 2019 08:45 PM IST
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Story of Dr Hema Sane from Pune who has lived her whole life without electricity
डॉ. हेमा साने - फोटो : एएनआई

बिजली आज जीवन का एक अनिवार्य अंग बन चुकी है। जहां, बिना बिजली जीवन की कल्पना करना भी मुश्किल सा लगता है, वहीं एक महिला ऐसी हैं जिसने अपना पूरा जीवन बिना बिजली के गुजारा और आगे भी वह ऐसे ही रहना चाहती हैं। हम बात कर रहे हैं पुणे की डॉ. हेमा साने की। 79 वर्षीय डॉ. हेमा को प्रकृति और पर्यावरण से इस कदर प्रेम है कि जिस घर में वह रहती हैं उसमें आज तक उन्होंने बिजली का कनेक्शन नहीं लिया है। 

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'मैंने अपनी पूरी जिंदगी में कभी बिजली की जरूरत महसूस नहीं की। लोग अक्सर मुझसे पूछते हैं कि मैं बिना बिजली के कैसे जी लेती हूं, तो मैं उनसे पूछती हैं आप बिजली के साथ कैसे जीते हैं।' 

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डॉ. हेमा कहती हैं कि जीवन की बुनियादी जरूरतें रोटी, कपड़ा और मकान हैं न कि बिजली। आज से पहले एक समय था जब बिजली थी ही नहीं... तब भी तो जीवन चल रहा था। मैं सारे काम बिना बिजली के कर लेती हूं। अपनी संपत्ति के बारे में डॉ. हेमा कहती हैं कि यह संपत्ति उनके कुत्ते, दो बिल्लियों, नेवले और बहुत सारे पक्षियों की है। डॉ. हेमा कहती हैं कि यह संपत्ति उनकी है, मेरी नहीं। मैं तो यहां सिर्फ उनकी देखभाल करने के लिए हूं। 

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Story of Dr Hema Sane from Pune who has lived her whole life without electricity
डॉ. हेमा साने - फोटो : एएनआई

सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय से वनस्पति विज्ञान से पीएचडी धारक डॉ. हेमा कहती हैं कि लोग मुझे पागल बुलाते हैं। मैं पागल हो सकती हूं, लेकिन यह मायने नहीं रखता है। जीवन जीने का यह मेरा तरीका है और मैं अपने मुताबिक ही जिंदगी जी रही हूं। डॉ. हेमा ने कई सालों तक पुणे के गरवारे कॉलेज में प्रोफेसर के तौर पर अपनी सेवाएं दी हैं। अब जब वह सेवानिवृत्त हो चुकी हैं तो उन्होंने अपना जीवन प्रकृति के नाम कर दिया है। 

डॉ. हेमा का घर पुणे के बुधवार पेठ इलाके में है। चारों तरफ से पेड़-पौधों से घिरा उनका घर कई जानवरों और चिड़ियों का बसेरा है। उनकी सुबह जहां चिड़ियों की चहचहाहट के साथ शुरू होती है तो दिन का अंत लैंप की रोशनी के साथ होता है। पर्यावरण और वनस्पति विज्ञान पर कई किताबें लिख चुकीं डॉ. हेमा का दावा है कि पेड़-पौधों और पक्षियों की शायद ही ऐसी कोई प्रजाति होगी जिसके बारे में उन्हें नहीं मालूम होगा। 

उनका कहना है कि ये पक्षी उनके दोस्त हैं। जब भी मैं अपने घर का काम करती हूं, वे आ जाते हैं। अक्सर लोग मुझसे पूछते हैं कि आप इस घर को बेच क्यों नहीं देतीं, आपको अच्छे पैसे मिल जाएंगे। मैं उनसे यही कहती हूं कि अगर घर बेच दिया तो इन पेड़-पौधों और पक्षियों की देखभाल कौन करेगा। मैं यहां इन सबके साथ ही रहना चाहती हूं। 

'मैं किसी को कोई संदेश या सबक नहीं देती, बल्कि मैं बुद्ध की बात दोहराती हूं कि हमें अपने जीवन में अपना रास्ता खुद ही खोजना है।'

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