अमित शाह का बड़ा दावा: 2019 से 274 भगोड़ों का प्रत्यर्पण; बताया 2014 में पीएम मोदी के सामने थी क्या चुनौतियां?
गोवा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने केंद्र सरकार के कार्यकाल के दौरान आंतरिक सुरक्षा से जुड़े अभियानों और उपलब्धियों का ब्योरा पेश किया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद आए बदलाव, नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई और पूर्वोत्तर में सशस्त्र समूहों के साथ हुए समझौतों का जिक्र किया। शाह ने विदेश भागे अपराधियों को वापस लाने, उनकी संपत्तियां जब्त करने और रेड कॉर्नर नोटिस पर कार्रवाई के आंकड़े भी साझा किए।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
उन्होंने कहा कि जब नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद संभाला था, तब देश के सामने तीन बड़ी चुनौतियां थीं। इनमें जम्मू-कश्मीर की स्थिति और वहां बढ़ता आतंकवाद, नक्सलवाद और पूर्वोत्तर में विभिन्न सशस्त्र समूहों की मौजूदगी शामिल थी। अमित शाह ने कहा कि उस समय देश के अलग-अलग हिस्सों में लगातार बम धमाके हो रहे थे और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बड़े आंदोलन हो रहे थे। उन्होंने कहा कि ऐसे माहौल में प्रधानमंत्री मोदी ने देश की कमान संभाली थी।
अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में हुए क्या बदलाव?
जम्मू-कश्मीर का जिक्र करते हुए अमित शाह ने कहा, "अगर हम आज प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 2019 से अब तक के सफर को देखें तो जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद अलगाववाद की भावना काफी कम हुई है। आतंकवाद के आंकड़े धीरे-धीरे शून्य की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं और जम्मू-कश्मीर विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। जम्मू-कश्मीर और देश के बाकी हिस्सों के बीच मानसिक दूरी कम करने के लिए भी सफल प्रयास किए गए हैं।"
#WATCH | Dona Paula, Goa: Union Home Minister Amit Shah says, "...Ever since PM Modi became the Prime Minister of this country, the Ministry of Home Affairs of the Govt of India has taken numerous steps to strengthen the nation's internal security. When PM Modi assumed the office… pic.twitter.com/leWIkttOUA
— ANI (@ANI) September 6, 2026
नक्सलवाद के खात्मे पर क्या बोले अमित शाह?
उन्होंने कहा, "पांच दशक पुरानी नक्सलवाद की समस्या अब अतीत की बात बन गई है। जिन लोगों ने तिरुपति से पशुपतिनाथ तक रेड कॉरिडोर बनाने की कल्पना की थी, उन्होंने आज हथियार डाल दिए हैं, आत्मसमर्पण किया है और मुख्यधारा में शामिल होने की दिशा में आगे बढ़े हैं।" शाह ने कहा कि पूर्वोत्तर में भी करीब 10 हजार युवाओं ने हथियार डाले हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने उनके साथ 14 से अधिक समझौते किए हैं और अब पूर्वोत्तर भी विकास के रास्ते पर आगे बढ़ना शुरू कर चुका है।
देश के भगोड़ों के खिलाफ हुई क्या कार्रवाई?
भगोड़ों के खिलाफ कार्रवाई का जिक्र करते हुए शाह ने कहा, "2019 से हमने विभिन्न तरह के अपराध करने के बाद देश से भागे भगोड़ों के खिलाफ अभियान शुरू किया है। 2019 से जुलाई 2026 के बीच हमने 36 देशों से 274 भगोड़ों को सफलतापूर्वक प्रत्यर्पित किया। इनमें आर्थिक अपराध, आतंकवाद, नशीले पदार्थों की तस्करी या गैंगवार में शामिल लोग थे और उन्हें भारतीय अदालतों के सामने लाया गया।"
उन्होंने कहा, "पिछले तीन वर्षों में 401 रेड कॉर्नर नोटिस पर कार्रवाई की गई है। खास तौर पर इस साल जुलाई 2026 तक अकेले 182 रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की पूरी प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की गई। इसके लिए 'भारत-पोल' नाम की नई व्यवस्था बनाई गई है।"
भारत-पोल से जुड़ी कौन-कौन सी एजेंसियां?
शाह ने कहा कि 14 से अधिक केंद्रीय एजेंसियां और सभी राज्यों की पुलिस 'भारत-पोल' से जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि इसके जरिए हर राज्य से भगोड़ों के प्रत्यर्पण की सुविधा के लिए मजबूत व्यवस्था तैयार की गई है। उन्होंने कहा, "2019 से 2026 के बीच भगोड़ों की करीब 17,874 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की गईं और नए आपराधिक कानूनों ने इन भगोड़ों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता तैयार किया है।"
साइबर अपराध के खिलाफ उठाए गए कदमों का जिक्र करते हुए शाह ने कहा, "हमने साइबर अपराध से निपटने के लिए एक व्यवस्थित व्यवस्था भी बनाई है। प्रधानमंत्री मोदी खुद भी इसकी निगरानी कर रहे हैं। आज '1930' नंबर साइबर अपराध से सुरक्षा के लिए एक पक्के समाधान के रूप में सामने आया है।" उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय ने राज्यों के साथ मिलकर तीन नए कानूनों को थाने के स्तर तक लागू करने में सफलता हासिल की है।
तीन नए आपराधिक कानूनों को लेकर क्या बोले शाह?
शाह ने कहा, "मैं गोवा के मुख्यमंत्री और गोवा पुलिस की सराहना करना चाहता हूं। तीन नए आपराधिक कानून लागू होने के बाद बहुत कम समय में उन्होंने गोवा की दोषसिद्धि दर 22 प्रतिशत से बढ़ाकर 53.2 प्रतिशत कर दी।" उन्होंने कहा कि इसका मतलब है कि दर्ज की गई हर प्राथमिकी में दोषसिद्धि सुनिश्चित करने की दर में करीब 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
#WATCH | Dona Paula, Goa: Union Home Minister Amit Shah says, "If we look back today under the leadership of PM Modi from 2019 till now, after the removal of Article 370 in J&K, the feeling of separatism has reduced a lot. The figures of terrorism appear to be gradually shrinking… pic.twitter.com/FXnCllFuUi
— ANI (@ANI) September 6, 2026
शाह ने कहा, "मेरा अनुमान है कि नए कानूनों के तहत दर्ज प्राथमिकी के मामलों में यह अनुपात 70 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है, क्योंकि मौजूदा आंकड़ों में अभी भारतीय दंड संहिता और दंड प्रक्रिया संहिता के दौर के कुछ मामले भी शामिल हैं।"
2029 तक भारत को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, "हमने 2029 तक भारत को नशामुक्त बनाने के बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक रोडमैप तैयार किया है। हम सभी जानते हैं कि नशीले पदार्थों का कारोबार एक ऐसा अपराध है जो हमारी आने वाली पीढ़ियों को बर्बाद करता है। इसके अलावा, नशीले पदार्थों से मिलने वाले 'गंदे पैसे' का इस्तेमाल आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए भी किया जाता है। इससे कई देशों में 'नार्को-टेरर' मॉड्यूल सामने आए हैं और आज यह पूरी दुनिया के सामने एक समस्या है।"
शाह ने कहा, "2019 से हमने इस समस्या के खिलाफ कार्रवाई की है। हमने व्यवस्थाओं में बदलाव किया, नेटवर्क को तोड़ा, वित्तीय कड़ियों को खत्म किया और पीड़ितों को नशे की लत से बाहर निकलने में मदद देने के लिए सहायता उपलब्ध कराई।" उन्होंने कहा, "2014 से पहले यह लड़ाई अलग-अलग स्तर पर और अलग-अलग तरीके से लड़ी जाती थी। छोटे-मोटे अपराधियों को पकड़ने तक ही संतुष्टि हासिल कर ली जाती थी। 2019 से हमने इसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा का प्राथमिक मुद्दा बनाया।"
नशीले पदार्थों के खिलाफ कैसे हो रही कार्रवाई?
शाह ने कहा कि नशीले पदार्थों के खिलाफ लड़ाई केवल कागजी कार्रवाई और अलग-अलग एजेंसियों की कार्रवाई तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसे राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित और लगातार चलने वाला अभियान बनाया गया। उन्होंने कहा, "इसके लिए हमने 2019 में चार स्तरीय नार्को समन्वय केंद्र (एनकॉर्ड) व्यवस्था बनाई। हमने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को समर्पित मादक पदार्थ रोधी कार्यबल बनाने का मॉडल दिया। 2019 में एक संयुक्त समन्वय समिति भी बनाई गई, जिसमें केंद्रीय एजेंसियों, राज्यों और केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों को एक साथ लाकर समन्वित कार्रवाई की गई।"