Economy: गहरे कर्ज के जाल में फंसे राज्य, श्रीलंका जैसे हालात होने के आसार, मुफ्तखोरी से बीमारी लाइलाज
रिजर्व बैंक के आंकड़े बताते हैं कि पंजाब जैसे राज्यों का कुल कर्ज 53.3 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। राजस्थान का कुल कर्ज उसकी जीएसडीपी का 40.5 प्रतिशत, बिहार का 36.7 प्रतिशत, पश्चिम बंगाल का 37.1 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश का 29.1 प्रतिशत है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राज्य की खराब आर्थिक स्थिति को देखते हुए वेतन-भत्ते लेने से इनकार कर दिया है। उन्होंने विधानसभा में कहा है कि उनकी सरकार के सभी मंत्री दो महीने तक अपने सभी वेतन-भत्ते नहीं लेंगे। लेकिन क्या इससे राज्य की आर्थिक स्थिति सुधर जाएगी? देश के कई राज्य गहरे कर्ज के जाल में उलझे हुए हैं। पंजाब और हिमाचल प्रदेश जैसे कई राज्य अपनी कर्ज लेने की क्षमता खो चुके हैं, लेकिन इसके बाद भी आवश्यक खर्चों को जुटाने के लिए उन्हें बार-बार नया कर्ज लेना पड़ रहा है।
लगातार कर्ज में फंसने से उनकी स्थिति बहुत हद तक श्रीलंका की तरह हो गई है जो गहरे कर्ज के जाल में फंसने के कारण कंगा्ली की हालत में पहुंच गया था। भाजपा ने हिमाचल प्रदेश की खराब स्थिति के लिए कांग्रेस सरकार की गलत नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, कमोबेश सभी दलों द्वारा शासित राज्यों की स्थिति आर्थिक मोर्चे पर नाजुक बनी हुई है।
रिजर्व बैंक के आंकड़े बताते हैं कि देश के राज्यों का कुल कर्ज उनकी सकल उत्पाद क्षमता के 31.3 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। पंजाब जैसे राज्यों का कुल कर्ज 2020-21 में ही उनकी जीएसडीपी के 49.1 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। अब यह 53.3 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। इसी समय में राजस्थान का कुल कर्ज उसकी जीएसडीपी का 40.5 प्रतिशत, बिहार का 36.7 प्रतिशत, पश्चिम बंगाल का 37.1 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश का 29.1 प्रतिशत हो चुका है।
भारी कर्ज का अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ता है, यह देखने के लिए भी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट काफी है। आरबीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब ने 2014-15 से 2018-19 में पंजाब ने केवल पांच पैसा आर्थिक संसाधन जुटाने पर खर्च किया, जबकि इसी दौरान उसे अपनी आय का लगभग 45 पैसा केवल कर्ज का ब्याज और आवश्यक देनदारियों को चुकाने के लिए देना पड़ा। आंध्र प्रदेश ने इसी दौरान अपनी कुल आय का एक चौथाई केवल ब्याज और अन्य आवश्यक देनदारी चुकाने में लगाया जबकि वह राज्य का आर्थिक संसाधन जुटाने के लिए केवल दस पैसा ही खर्च कर सका। ध्या्न देने की बात है कि यदि राज्य आर्थिक संसाधन जुटाने पर खर्च नहीं करेंगे तो इससे राज्य की आय तो घटेगी ही, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी नहीं बनेंगे। इससे पूरी अर्थव्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था के संकट में पड़ने का खतरा पैदा हो जाता है। यह आंकड़ा बताता है कि कर्ज के जाल में उलझने के बाद इसका राज्यों पर क्या असर पड़ता है।
आर्थिक मामलों के जानकारों का कहना है कि यह किसी राज्य की आर्थिक स्थिति के लिए बेहतर हालात नहीं है। किसी राज्य को अपनी कुल जीएसडीपी का अधिकतम 20 प्रतिशत ही कर्ज लेना चाहिए। इससे अधिक कर्ज लेने के बाद राज्य सरकार शिक्षा-स्वास्थ्य जैसे कल्याणकारी कार्यों के लिए पर्याप्त धन नहीं खर्च कर पाती क्योंकि उसकी अधिकतम आय ब्याज चुकाने में खर्च हो जाता है। ऐसे में राज्यों को अधिक कर्ज लेने से रोकने के उपाय भी किए जाने चाहिए।
भाजपा ने क्या कहा
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ल ने शुक्रवार को एक प्रेस कांफ्रेंस कर हिमाचल प्रदेश की खराब आर्थिक हालत के लिए कांग्रेस की गलत नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश जैसा राज्य अपने छोटे आकार के बाद भी बहुत अधिक औद्योगिक निवेश प्राप्त कर चुका है। ऐसे में उसकी हालत बेहतर होनी चाहिए। लेकिन कांग्रेस सरकार ने गलत नीतियां लागू कर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को इस हद तक खराब कर दिया है कि वह अपने कर्मचारियों को वेतन देने तक की स्थिति में भी नहीं है।
प्रेम शुक्ला का आरोप है कि कांग्रेस चुनावों के समय मतदाताओं को खटाखट योजना के अंतर्गत हर महीने नकद पैसा देने का वादा करती है, लेकिन चुनाव जीतने के बाद वह पैसा देने की स्थिति में नहीं होती। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हिमाचल प्रदेश चुनाव में ओपीएस देने का वादा भी किया था, लेकिन अब वह वेतन तक देने की स्थिति में नहीं है। ऐसे में कांग्रेस को केवल पैसे बांटने की बात कर वोट हासिल करने की बजाय जमीनी मुद्दों पर चुनाव लड़ना चाहिए।
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.