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राज्यों को डरने की जरूरत नहीं, हम कोई ‘नरभक्षी बाघ’ नहीं : सुप्रीम कोर्ट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sat, 22 Sep 2018 03:00 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट के सामने लंबित मामलों को लेकर राज्यों को डरना नहीं चाहिए। सुप्रीम कोर्ट कोई ‘नरभक्षी बाघ’ नहीं है। शुक्रवार को आंध्र प्रदेश के अवैध खनन के एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की।
जस्टिस मदन बी लोकुर और दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा, ‘हम कोई नरभक्षी बाघ नहीं हैं इसलिए राज्यों को डरना नहीं चाहिए।’ दरअसल आंध्र प्रदेश सरकार ने हाल ही में ट्रिमेक्स समूह द्वारा किए जाने वाले खनन के काम पर रोक लगा दी थी। इस पर निजी कंपनी की ओर से पेश होते हुए वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि कंपनी के खिलाफ अवैध खनन की याचिका आंध्र प्रदेश सरकार पर दबाव बनाने के लिए दाखिल की गई है।
यह मामला अवैध खनन का नहीं था, बल्कि राज्य सरकार ने ऐसा निर्णय सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के कारण लिया था। जब रोहतगी ने कहा कि राज्य सरकार के आदेश से याचिकाकर्ताओं की मंशा पूरी हो गई तो पीठ ने कहा कि राज्य सरकार इतनी कमजोर नहीं है कि एक या दो लोग उसे मजबूर कर सकें।
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वहीं याचिकाकर्ता की तरफ से पेश होते हुए वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि राज्य ने कंपनी का केवल लाइसेंस निलंबित किया है, जबकि लाइसेंस रद्द करके धन वसूला जा सकता था। कोर्ट ने मामले की सुनवाई 27 सितंबर तक टाल दी।
यह है मामला
केंद्र सरकार में पूर्व सचिव रह चुके ईएएस शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर मांग की थी कि ट्रिमेक्स कंपनी द्वारा कराए जा रहे अवैध खनन की जांच एसआईटी या सीबीआई से कराई जाए। याचिका में कहा गया था कि इस अवैध खनन से पर्यावरण और पेड़ों को नुकसान हो रहा है और इस कंपनी का लाइसेंस रद्द किया जाए। इसके साथ ही प्रशासन कंपनी द्वारा की गई अवैध कमाई की भी वसूली करे। इस पर 9 जुलाई को कोर्ट ने केंद्र, आंध्र प्रदेश सरकार और फर्म से याचिका पर जवाब मांगा था।
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जस्टिस मदन बी लोकुर और दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा, ‘हम कोई नरभक्षी बाघ नहीं हैं इसलिए राज्यों को डरना नहीं चाहिए।’ दरअसल आंध्र प्रदेश सरकार ने हाल ही में ट्रिमेक्स समूह द्वारा किए जाने वाले खनन के काम पर रोक लगा दी थी। इस पर निजी कंपनी की ओर से पेश होते हुए वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि कंपनी के खिलाफ अवैध खनन की याचिका आंध्र प्रदेश सरकार पर दबाव बनाने के लिए दाखिल की गई है।
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यह मामला अवैध खनन का नहीं था, बल्कि राज्य सरकार ने ऐसा निर्णय सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के कारण लिया था। जब रोहतगी ने कहा कि राज्य सरकार के आदेश से याचिकाकर्ताओं की मंशा पूरी हो गई तो पीठ ने कहा कि राज्य सरकार इतनी कमजोर नहीं है कि एक या दो लोग उसे मजबूर कर सकें।
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वहीं याचिकाकर्ता की तरफ से पेश होते हुए वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि राज्य ने कंपनी का केवल लाइसेंस निलंबित किया है, जबकि लाइसेंस रद्द करके धन वसूला जा सकता था। कोर्ट ने मामले की सुनवाई 27 सितंबर तक टाल दी।
यह है मामला
केंद्र सरकार में पूर्व सचिव रह चुके ईएएस शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर मांग की थी कि ट्रिमेक्स कंपनी द्वारा कराए जा रहे अवैध खनन की जांच एसआईटी या सीबीआई से कराई जाए। याचिका में कहा गया था कि इस अवैध खनन से पर्यावरण और पेड़ों को नुकसान हो रहा है और इस कंपनी का लाइसेंस रद्द किया जाए। इसके साथ ही प्रशासन कंपनी द्वारा की गई अवैध कमाई की भी वसूली करे। इस पर 9 जुलाई को कोर्ट ने केंद्र, आंध्र प्रदेश सरकार और फर्म से याचिका पर जवाब मांगा था।