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Kerala: निमिषा प्रिया की फांसी पर सीएम विजयन का बड़ा बयान, कहा- हम उसे बचाने वालों के साथ के साथ खड़े हैं
Mon, 14 Jul 2025 03:39 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Mon, 14 Jul 2025 03:39 PM IST
सार
यमन में फांसी की सजा पाए केरल की रहन वाली नर्स निमिषा प्रिया को लेकर राज्य के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वे निमिषा प्रिया को बचाने वालों के साथ खड़े हैं। वहीं उन्होंने इस मामले में पीएम मोदी को भी पत्र लिखा है। बता दें कि, निमिषा को 16 जुलाई को फांसी दी जानी है।
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पिनाराई विजयन, सीएम, केरल
- फोटो : ANI
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विस्तार
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने यमन में मौत की सजा का सामना कर रही भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि केरल सरकार पूरी मजबूती से उन सभी के साथ खड़ी है जो निमिषा को बचाने और रिहा कराने के लिए काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है ताकि निमिषा प्रिया की जान बचाई जा सके।
सीएम विजयन एक्स पर किया पोस्ट
उन्होंने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, 'माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है, जिसमें यमन में कैद निमिषा प्रिया को रिहा कराने के लिए त्वरित हस्तक्षेप की मांग की है। केरल सरकार उनके निर्दोष साबित होने और सुरक्षित वापसी के लिए प्रयास कर रहे सभी लोगों के साथ मजबूती से खड़ी है।'
16 जुलाई को निमिषा प्रिया को होगी फांसी
बता दें कि, 37 वर्षीय भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को 16 जुलाई 2025 को फांसी दी जानी है। यमन की एक अदालत ने उन्हें वहां के एक नागरिक की हत्या और उसके शव को नष्ट करने के मामले में दोषी ठहराया है। इस फैसले को यमन के सर्वोच्च न्यायिक परिषद ने नवंबर 2023 में भी बरकरार रखा था।
यह भी पढ़ें - CJI: सीजेआई बीआर गवई को अस्पताल में कराया गया भर्ती, तेलंगाना दौरे के समय हुए थे संक्रमण के शिकार
आज सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई
सोमवार को भारत के सुप्रीम कोर्ट में भी इस मामले पर सुनवाई हुई। निमिषा प्रिया की तरफ से दायर याचिका में भारत सरकार से आग्रह किया गया है कि वह मामले में दखल दे और उनकी जान बचाने के प्रयास करे। निमिषा की वकील ने कोर्ट को बताया कि अब एकमात्र विकल्प मुआवजा राशि देकर माफी का बचा है, जिसे मृतक के परिवार को दिया जा सकता है – यदि वे इसे स्वीकार करने को तैयार हों।
भारत सरकार की ओर से क्या कहा गया?
भारत के अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि भारत सरकार पूरी कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि यमन के संबंधित अधिकारियों और विशेष रूप से इस केस के सरकारी वकील से बातचीत चल रही है ताकि फांसी पर रोक लगाई जा सके और समझौते की प्रक्रिया को समय मिले। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि भारत सरकार के पास सीमित अधिकार हैं और इसे एक बहुत जटिल मुद्दा बताया।
मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने गहरी चिंता जताते हुए कहा कि अगर निमिषा प्रिया की जान चली गई तो यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण होगा। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अगली सुनवाई 18 जुलाई, शुक्रवार के लिए तय की है।
यह भी पढ़ें - SC: 'अभिव्यक्ति की आजादी का गलत इस्तेमाल हुआ', पीएम मोदी के आपत्तिजनक कार्टून पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
कौन हैं निमिषा प्रिया?
निमिषा प्रिया केरल की रहने वाली एक नर्स हैं, वे कुछ साल पहले नौकरी के सिलसिले में यमन गई थीं। उनपर आरोप है कि उन्होंने एक यमनी नागरिक की हत्या की थी। मामले में स्थानीय अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी मंजूर किया।
कैसे बच सकती है निमिषा की जान?
इस मामले में अगर मृतक के परिवार से मुआवजा की राशि के जरिए समझौता होता है, तो फांसी टल सकती है। भारत सरकार प्रयास कर रही है कि यमन सरकार फांसी पर अस्थायी रोक लगाए। इसके लिए राजनयिक स्तर पर भी बातचीत चल रही है।
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सीएम विजयन एक्स पर किया पोस्ट
उन्होंने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, 'माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है, जिसमें यमन में कैद निमिषा प्रिया को रिहा कराने के लिए त्वरित हस्तक्षेप की मांग की है। केरल सरकार उनके निर्दोष साबित होने और सुरक्षित वापसी के लिए प्रयास कर रहे सभी लोगों के साथ मजबूती से खड़ी है।'
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Wrote to Hon'ble PM Shri @narendramodi Ji urging urgent intervention to secure the release of Nimisha Priya, who remains imprisoned in Yemen. The Govt of Kerala stands firmly with all those working towards her exoneration and safe return. pic.twitter.com/IekEHsxi3h
विज्ञापन विज्ञापन— Pinarayi Vijayan (@pinarayivijayan) July 14, 2025
16 जुलाई को निमिषा प्रिया को होगी फांसी
बता दें कि, 37 वर्षीय भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को 16 जुलाई 2025 को फांसी दी जानी है। यमन की एक अदालत ने उन्हें वहां के एक नागरिक की हत्या और उसके शव को नष्ट करने के मामले में दोषी ठहराया है। इस फैसले को यमन के सर्वोच्च न्यायिक परिषद ने नवंबर 2023 में भी बरकरार रखा था।
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आज सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई
सोमवार को भारत के सुप्रीम कोर्ट में भी इस मामले पर सुनवाई हुई। निमिषा प्रिया की तरफ से दायर याचिका में भारत सरकार से आग्रह किया गया है कि वह मामले में दखल दे और उनकी जान बचाने के प्रयास करे। निमिषा की वकील ने कोर्ट को बताया कि अब एकमात्र विकल्प मुआवजा राशि देकर माफी का बचा है, जिसे मृतक के परिवार को दिया जा सकता है – यदि वे इसे स्वीकार करने को तैयार हों।
भारत सरकार की ओर से क्या कहा गया?
भारत के अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि भारत सरकार पूरी कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि यमन के संबंधित अधिकारियों और विशेष रूप से इस केस के सरकारी वकील से बातचीत चल रही है ताकि फांसी पर रोक लगाई जा सके और समझौते की प्रक्रिया को समय मिले। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि भारत सरकार के पास सीमित अधिकार हैं और इसे एक बहुत जटिल मुद्दा बताया।
मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने गहरी चिंता जताते हुए कहा कि अगर निमिषा प्रिया की जान चली गई तो यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण होगा। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अगली सुनवाई 18 जुलाई, शुक्रवार के लिए तय की है।
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कौन हैं निमिषा प्रिया?
निमिषा प्रिया केरल की रहने वाली एक नर्स हैं, वे कुछ साल पहले नौकरी के सिलसिले में यमन गई थीं। उनपर आरोप है कि उन्होंने एक यमनी नागरिक की हत्या की थी। मामले में स्थानीय अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी मंजूर किया।
कैसे बच सकती है निमिषा की जान?
इस मामले में अगर मृतक के परिवार से मुआवजा की राशि के जरिए समझौता होता है, तो फांसी टल सकती है। भारत सरकार प्रयास कर रही है कि यमन सरकार फांसी पर अस्थायी रोक लगाए। इसके लिए राजनयिक स्तर पर भी बातचीत चल रही है।
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