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श्रीनगर की सेंट्रल जेल आतंकियों के लिए बनी हुई है जन्नत, रूल बुक किसी मजाक से कम नहीं
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 08 Feb 2018 10:24 AM IST
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सेंट्रल जेल, श्रीनगर
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लश्कर-ए-तयैबा के आतंकी नवीद जट को रिहा कराने के लिए आतंकवादियों ने श्रीनगर के अस्पताल पर हमला कर उसे रिहा करा लिया। नवीद जट के फरार होने से जेल की सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है। आशंका जताई जा रही है कि आतंकवादियों के फरार होने में जेल के स्टाफ की मिली भगत है। सूत्रों के मुताबिक श्रीनगर की जेल, आतंकियों के लिए ऐशगाह का अड्डा बनी हुई है। यहां आतंकियों को हर वह सुविधा मुहैया कराई जाती है जो जिंदगी को आसान बनाती है।
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टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक जेल में कैदियों को स्मार्टफोन, डाटा पैक, कश्मीरी वाजवान मटन दिया जा रहा है। और तो और आंतकियों से मिलने के लिए धड़ल्ले से लोग आते जाते हैं। जेल की रूल बुक मजाक बनी हुई है क्योंकि प्रशासनिक अधिकारियों ने इसकी तरफ ध्यान देना बंद कर दिया है। अखबार ने इस पर कई सवाल खड़े किए हैं जो संकेत दे रहे हैं कि जेल के स्टाफ के साथ मिलकर नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है।
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जानकारी के मुताबिक जेल के अंदर कैद एक आतंकी हर हफ्ते अपनी प्रेस रिलीज जारी करता है तो एक आतंकी जेल के भीतर ही धर्मगुरू का खिताब पा चुका है। बाहर के लोग उससे मिलने और ताबिज बनवाने के लिए आते हैं। इसके अलावा दूसरे जेल में बंद साथियों, कश्मीर और पाकिस्तान तक के संगठनों से संपर्क, जेल के भीतर से ही किया जाता है।
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अखबार ने मिलीभगत के लिए जेल के फार्मासिस्ट मंसूर अहमद पर सवाल खड़े किए है। मंसूर अहमद पिछले 10 सालों से एक ही जेल में पोस्टेड है। दावा है कि मंसूर ही आतंकवादियों को इलाज के नाम पर श्नीनगर के अस्पतालों में आने जाने की व्यवस्था करता है। करीब 10 साल पहले श्रीनगर की जेल पर छापा पड़ा था। छापे के दौरान जेल से मटन काटने वाले चॉपर और सेलफोन बरामद हुए थे। इस छापे के बाद दूसरा छापा आजतक नहीं पड़ा। जिसकी वजह से आजतक हालात वैसे ही बने हुए हैं।
मामले के सामने आने के बाद जम्मू कश्मीर के स्वास्थ्य मंत्री बाली भगत ने कहा कि हम इस मामले की जांच कराएंगे कि कैसे एक फार्मासिस्ट एक ही जेल में 10 सालों तक रह सकता है। वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच में सब साफ हो जाएगा। फिलहाल आतंकी नवीद जट के के फरार होने पर फार्मासिस्ट और डॉक्टर को ड्यूटी से हटा दिया गया है।