राम मंदिर: श्रीश्री बोले- अभी और वक्त लगेगा, ओवैसी का जवाब- 'देश को कर रहे गुमराह'
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राम मंदिर शुरुआती दौर से ही आध्यात्मिक से ज्यादा राजनैतिक मुद्दा रहा है। समय-समय पर राममंदिर पर हुई सियासत ने कई राजनैतिक पार्टियों को जीवन देने का काम किया है। जिसके परिणाम स्वरूप सरकारों को गिराने और बनाने का खेल शुरू हुआ। जब भी देश में चुनाव होते हैं तो राममंदिर को बनाने का नारा तेजी से लगता है, क्योंकि सियासत के खिलाड़ी जानते हैं कि राममंदिर वोट पाने का सबसे तेज और सरल उपाय है।
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वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में चुनाव हो चुके हैं और गुजरात में होने वाले हैं। इस बीच राम मंदिर विवाद को सुलझाने की पुरजोर कोशिश की जा रही है। विवाद सुलझाने के लिए मध्यस्थता कर रहे आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर गुरुवार को राम जन्मभूमि के सभी दावेदारों से मुलाकात करने अयोध्या पहुंचे।
रविशंकर ने मणिराम दास जी की छावनी के महंत नृत्य गोपालदास से करीब 15 मिनट तक बंद कमरे में मुलाकात की। देर शाम वह मस्जिद पक्षकार इकबाल अंसारी से मुलाकात करने उनके घर भी गए। उन्होंने कहा कि उनकी मुलाकात से बहुत से लोग निराश हैं लेकिन बहुत सारे लोग उनसे उम्मीद लगाकर भी बैठे हैं।
मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हम सौदा या संघर्ष की बात करने नहीं आये हैं, हम सौहार्द की बात करने आये हैं। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के सहयोग से अयोध्या में राम का भव्य मंदिर बनेगा और पूरे देश को प्रेम का संदेश मिलेगा।
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इससे पहले बुधवार को श्री श्री रविशंकर ने लखनऊ में सीएम योगी से इस मुद्दे पर मुलाकात की थी। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा था कि मेरे पास इस मसले को हल करने का कोई फॉर्मूला नहीं है। मामले पर बातचीत जारी है।
वहीं, आर्ट ऑफ लिविंग के गौतम विग ने बताया कि श्री श्री, हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों को सुन रहे हैं और मामले पर आम सहमति की कोशिश कर रहे हैं। जिससे कि आपसी सौहार्द्र बना रहे। बातचीत के दौरान दोनों ही पक्ष सकारात्मक हैं। कोशिश है कि दिसंबर में होने वाली सुनवाई शुरू होने से पहले कुछ नतीजा निकले।
सुन्नी वक्फ बोर्ड को राम मंदिर के लिए करोड़ों रुपये का ऑफर?
श्री श्री रविशंकर के अयोध्या पहुंचने के बाद एक बड़ा खुलासा हुआ है। खुलासे में बताया गया कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को राम मंदिर के लिए करोड़ों रुपये का ऑफर दिया गया है। हालांकि निर्मोही अखाड़ा इस दावे से पलट गया है।
Talking about giving 1-20 crores. From where did so much money come? There are 10 members in Sunni Waqf board. Why aren't they revealing which member they spoke to? This isn't a private property, case is pending in court. They should stop such lies: Asaduddin Owaisi #RamTemple pic.twitter.com/yZwBPFqYqo
— ANI (@ANI) November 16, 2017
इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक राम मंदिर के पक्षकार निर्मोही अखाड़े के महंत दिनेंद्र दास ने ये दावा किया था कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को 1 करोड़ से लेकर 20 करोड़ रुपये तक दिए जा सकते हैं। महंत दिनेंद्र दास ने कहा इस मुद्दे पर लगातार बातचीत चल रही है।
राम मंदिर पर नेताओं में जारी है उठापटक
राम मंदिर विवाद पर श्री श्री की मध्यस्थता पर तमाम दलों के नेताओं के बीच घमासान जारी है। हर नेता अपनी सुविधा के मुताबिक बयान दे रहा है, जिससे उसके सियासी भविष्य की दिशा तैयार की जा सके। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने श्री श्री पर तीखा हमला बोला है।
ओवैसी ने रविशंकर को झूठा बताते हुए कहा कि वह कहते हैं कि उन्होंने दोनों पक्षों से बात की जबकि सच यह है कि उन्होंने न ही किसी से व्यक्तिगत मुलाकात की है और न ही किसी से फोन पर बात की है। ओवैसी ने कहा कि यह सब देश को गुमराह करने जैसा है। पैसे देकर किसी मुद्दे को सुलझाया नहीं जा सकता।
वहीं श्री श्री के प्रयासों को यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से भी झटका मिला है। योगी ने कहा कि अब बातचीत में देर हो गई है। एक टीवी चैनल पर की गई बातचीत में योगी ने कहा कि रविशंकर से राम मंदिर के मुद्दे पर विस्तार से बात नहीं हुई।
भाजपा के पूर्व सांसद रामविलास वेदांती ने श्रीश्री रविशंकर द्वारा मध्यस्थता करने को लेकर कहा कि 'मध्यस्थता करने के लिए श्रीश्री रविशंकर कौन हैं? उन्हें अपने एनजीओ और विदेशी धन की जमाखोरी जारी रखना चाहिए।
वहीं सपा नेता आजम खां ने श्री श्री और योगी की मुलाकात को ढोंग बताते हुए कहा कि दो योगी साथ मिलकर ग्यारह हो गए हैं, अभी ये मामला सुप्रीम कोर्ट में है, उसके बाद अल्लाह की अदालत शुरू होती है। उन्होंने कहा कि इनका रामचंद्र, अयोध्या और मक्का-मदीना करना ढोंग है।