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Sri Lanka: IMF डील से पहले करों में बढ़ोतरी बनी विक्रमसिंघे सरकार के गले की फांस, ट्रेड यूनियनों ने दी चेतावनी

Mon, 13 Mar 2023 06:03 PM IST
शिव शरण शुक्ला वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Mon, 13 Mar 2023 06:03 PM IST
सार

श्रीलंका बीते चार सालों में 2.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर के बेलआउट पैकेज के लिए आईएमएफ की औपचारिक मंजूरी का इंतजार कर रहा है। इस बेलआउट पैकेज के जरिए उसकी कोशिश अब तक के सबसे खराब आर्थिक संकट से उबरने की है।

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Sri Lanka hit by strikes by trade unions against tax reforms ahead of IMF bailout deal
श्रीलंका का झंडा - फोटो : Social Media

विस्तार

श्रीलंका में आईएमएफ से 2.9 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज की मंजूरी हासिल करने के लिए की गई करों में बढ़ोतरी सरकार के गले की फांस बनती जा रही है। इस टैक्स बढ़ोतरी के खिलाफ विभिन्न क्षेत्रों के कर्मचारी पिछले कई दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। इसी क्रम में अधिकांश सरकारी क्षेत्र के ट्रेड यूनियनों ने कर सुधारों के खिलाफ सोमवार को भी हड़ताल की। साथ ही 15 मार्च से आम हड़ताल की चेतावनी भी दी है। जिन क्षेत्रों के कर्मचारी आंदोलन में शामिल हुए हैं, उनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग और बंदरगाह भी शामिल हैं। 

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जानकारी के मुताबिक, कर्ज में डूबे इस देश ने इस हालत से निपटने के लिए आर्थिक उपाय अपनाएं हैं, जिनमें कर वृद्धि, और उपयोगिता दर में वृद्धि शामिल है। साथ ही अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) द्वारा निर्धारित सुधारों का हिस्सा लागू करना बेलआउट पैकेज जारी करने के लिए जरूरी है।
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शिक्षा-स्वास्थ्य और बंदरगाह क्षेत्रों के कर्मचारी कर रहे हड़ताल
रानिल विक्रमसिंघे सरकार द्वारा की गई कर वृद्धि का विरोध कर रहे कर्मचारियों में शिक्षा-स्वास्थ्य और बंदरगाह क्षेत्रों के कर्मचारी शामिल हैं। सोमवार यानी आज की जा रही हड़ताल के क्रम में डॉक्टर्स ट्रेड यूनियन ने कहा कि उसने सोमवार को द्वीप राष्ट्र के नौ में से चार प्रांतों में हड़ताल शुरू की। डॉक्टर्स ट्रेड यूनियन के प्रवक्ता डॉ चामिल विजेसिंघे ने कहा कि सरकार की नीतियों के विरोध में डॉक्टर कल सुबह 8 बजे तक हड़ताल पर रहेंगे। उन्होंने कहा कि हालांकि इस दौरान हम अस्पतालों में केवल आपातकालीन सेवाएं संचालित करेंगे। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि सरकार नई कर नीति वापस ले।
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वहीं, यूनिवर्सिटी टीचर्स ट्रेड यूनियन के प्रवक्ता श्यामन बन्नेहेका ने कहा कि अब निर्णायक संघर्ष का समय आ गया है। अब अधिक इंतजार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि नौ मार्च को काम से दूर रहने वाले श्रमिकों के साथ औद्योगिक कार्रवाई शुरू हुई थी, लेकिन अब हम बुधवार (15 मार्च) से सामूहिक कार्रवाई के लिए अन्य ट्रेड यूनियनों के साथ आंदोलन में शामिल होंगे, जब तक कि सरकार नई कर नीति को वापस नहीं ले लेती।

वहीं, पोर्ट वर्कर्स ट्रेड यूनियन के शामल सुमनरत्ने ने कहा कि हम सरकार की इन कर वृद्धि का विरोध करते हैं। सरकार को इसे वापस लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि बंदरगाह के कर्मचारियों ने बंदरगाह पर 'गो स्लो' ट्रेड यूनियन कार्रवाई शुरू की है। हम 15 मार्च को इतिहास की सबसे बड़ी हड़ताल करने के लिए अन्य ट्रेड यूनियनों में शामिल होंगे। बंदरगाह क्षेत्र की अन्य ट्रेड यूनियनें भी इसमें शामिल हो गई हैं और इसके प्रवक्ता इंजीनियर उपाली रत्नायके ने कहा कि सोमवार से कर्मचारी केवल आपातकालीन कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि हम 14 मार्च को आधे दिन की हड़ताल करेंगे और 15 मार्च को बड़ी हड़ताल के लिए अन्य ट्रेड यूनियनों में शामिल होंगे।


IMF की मंजूरी का इंतजार कर रहा श्रीलंका
बता दें, श्रीलंका की सरकार ने जनवरी से प्रभावी रूप से कर वृद्धि की शुरुआत की थी, सरकार ने यह फैसला अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के बेलआउट पैकेज के लिए उनकी शर्तों के तौर पर लागू किया। श्रीलंका में ट्रेड यूनियनें और प्रोफेशनल एसोसिएशंस आम तौर पर ऊंची आय वाले वर्गों की नुमाइंदगी करती हैं। ये सभी यूनियनें हाल में की गई टैक्स बढ़ोतरी का विरोध कर रही हैं। श्रीलंका में लागू नई टैक्स नीति के मुताबिक एक लाख रुपये प्रति महीने से अधिक कमाने  वाले हर व्यक्ति को टैक्स दायरे में ले आया गया है। साथ ही टैक्स की दर 36 फीसदी कर दी गई है।


इसे भी पढ़ें- Bailout Package: श्रीलंका को मिला ड्रैगन का साथ, 2.9 अरब डॉलर के पैकेज पर 20 मार्च को होगी IMF बोर्ड की बैठक

गौरतलब है कि श्रीलंका बीते चार सालों में 2.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर के बेलआउट पैकेज के लिए आईएमएफ की औपचारिक मंजूरी का इंतजार कर रहा है। इस बेलआउट पैकेज के जरिए उसकी कोशिश अब तक के सबसे खराब आर्थिक संकट से उबरने की है।

श्रीलंका पर 51 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज
श्रीलंका पर 51 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज बकाया है, जिसमें से 28 अरब डॉलर का भुगतान 2027 तक किया जाना है। देश की स्थिति ऐसी है कि भारत ने भोजन और चिकित्सा आपूर्ति के अलावा हजारों टन डीजल और पेट्रोल भेजकर कर्ज में डूबे श्रीलंका की मदद की है। आर्थिक संकट के चलते श्रीलंका को भोजन, दवा, रसोई गैस और अन्य ईंधन, टॉयलेट पेपर और यहां तक की माचिस जैसी जरूरी वस्तुओं की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों को ईंधन और भोजन के लिए दुकानों के बाहर घंटों इंतजार करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। 
 
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