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Coronavirus: कोरोना की कुछ ही क्षणों में होगी पहचान! तीन वैज्ञानिकों की टीम ने कड़ी मेहनत से बनाई खास तकनीक
Mon, 17 Jul 2023 04:22 AM IST
शिव शरण शुक्ला
परीक्षित निर्भय
परीक्षित निर्भय
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Mon, 17 Jul 2023 04:22 AM IST
सार
मूल रूप से तमिलनाडु के निवासी डॉ. सेल्वाकुमार एडवर्ड राजा ने बताया कि वह प्रोटीन आधारित बायोसेंसर की खोज के लिए ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड विश्वविद्यालय में है। यह तकनीक सार्वजनिक स्थानों पर आसानी से इस्तेमाल की जा सकती है, जो काफी सस्ती भी है।
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कोरोना की जांच करता स्वास्थ्य कर्मी
- फोटो : एजेंसी
विस्तार
ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के वैज्ञानिक ने अपने शोध से पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। ऑस्ट्रेलिया के दो बड़े वैज्ञानिकों के साथ मिलकर खमीर से एक ऐसी धूल तैयार की है जो कोरोना वायरस की कुछ ही क्षण में पहचान कर सकती है। इन्होंने वाइन, बीयर और ब्रेड में मिलने वाले नैनो प्रोब्स के जरिए धूल को विकसित किया।
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मूल रूप से तमिलनाडु के निवासी डॉ. सेल्वाकुमार एडवर्ड राजा ने बताया कि वह प्रोटीन आधारित बायोसेंसर की खोज के लिए ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड विश्वविद्यालय में है। यह तकनीक सार्वजनिक स्थानों पर आसानी से इस्तेमाल की जा सकती है, जो काफी सस्ती भी है। कोविड-19 बायोमार्कर का पता लगाने के लिए इस धूल का इस्तेमाल हवाई अड्डों, अस्पतालों, स्टेडियम और सीवर में भी किया जा सकता है। ई मेल के जरिये एक सवाल पर शोधकर्ता ने कहा, हम अक्सर खमीर को बायोफैक्टरी से जोड़ कर देखते हैं जबकि हम यह नहीं जानते कि वे सबसे पुराने औद्योगिक सूक्ष्मजीव हैं। इनका भविष्य में अन्य संक्रामक रोगों की पहचान में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
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लंबे समय से ब्रेड-बीयर में इस्तेमाल
डॉ. सेल्वाकुमार ने कहा, लंबे समय से ब्रेड और बीयर में खमीर एक सस्ता और प्रचुर मात्रा में घटक रहा है। इसके अद्वितीय रासायनिक गुणों के कारण अब इसका उपयोग नैदानिक प्रौद्योगिकियों में किया जा सकता है।
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किसी भी वेरिएंट की करेगा पहचान
शोधकर्ताओं के अनुसार, फ्लोरोसेंट, इलेक्ट्रोकेमिकल या डाई-आधारित विश्लेषण तकनीकों का उपयोग नैनो प्रोब की जांच करने के लिए किया जाता है ताकि यह देखा जा सके कि वे किसी वायरस के संपर्क में आए हैं या नहीं।
सिर्फ संक्रमण की जांच पर्याप्त नहीं
डॉ. एडवर्ड राजा ने कहा, कोरोना वायरस में लगातार बदलाव हो रहे हैं। दुनिया ने अब तक कई स्वरूप का सामना किया है। इसका मतलब है कि अब यह जांचना पर्याप्त नहीं है कि कोई संक्रमित हुआ है या नहीं। अब हमें जल्दी से यह पहचानने में सक्षम होना चाहिए कि मरीज में कौन सा स्वरूप है और यह कहां से आया है? इसके इलाज के लिए क्या करने की जरूरत है? इनका जवाब खमीर के नैनोप्रोब से मिलेगा।