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Exclusive: 'मध्य भारत में मानसून पहुंचने में देरी, सावधानी से धान की फसल चुनें', अमर उजाला से बोले महापात्रा

Tue, 28 Jan 2025 05:03 AM IST
शिव शुक्ला मनीष मिश्र
मनीष मिश्र Published by: शिव शुक्ला Updated Tue, 28 Jan 2025 05:03 AM IST
सार

‘मिशन मौसम’ पर भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने खास बातचीत में कहा कि हल्की बारिश के दिन कम हो रहे हैं। ज्यादा बारिश के दिन बढ़े हैं। कम समय में ज्यादा बारिश हो रही है। इससे मृदा का क्षरण होता है। तेज बारिश में पानी जमीन के अंदर सोख नहीं पाता। भूजल रिचार्ज कम हो जाता है।

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Special conversation with Mrityunjay Mahapatra, DG of Indian Meteorological Department on Mission Mausam
मृत्युंजय महापात्रा - फोटो : ANI

विस्तार

मध्य भारत में मानसून देरी से पहुंचने से कम हो रही बारिश की अवधि और पंचायत स्तर तक मौसम का सटीक पूर्वानुमान पहुंचाने के लिए शुरू हुए ‘मिशन मौसम’ पर भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा से मनीष मिश्र की विशेष बातचीत।  

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आज मानसून की चाल क्यों बदल रही है?  
जलवायु परिवर्तन की वजह से काफी बदलाव आए हैं। मानसून 5 जून को केरल के पास पहुंचता है, जिसके बाद 15 जुलाई तक पूरा देश और राजस्थान को कवर कर रहा था। अभी हमने आधुनिक डेटा के हिसाब से दक्षिण भारत में मानसून पहले की तरह ही पहुंच रहा है, इसके कोई बदलाव नहीं है, लेकिन राजस्थान और उत्तर-पश्चिमी भारत में एक हफ्ते पहले पहुंच रहा है। मध्य भारत में मानसून 10-15 दिन की देरी से पहुंच रहा है। महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, यूपी, एमपी, उड़ीसा आदि में इसका असर दिख रहा है। पहले 5 सितंबर से मानसून की वापसी होती थी, हमारी डेट के हिसाब से अब 17 सितंबर से राजस्थान से वापसी करता है। पूरे देश से 12 अक्तूबर के आसपास वापसी होती थी, वैसी ही है। अब इसे देखते हुए किसानों को धान की फसल का चयन करना चाहिए। जिससे उत्पादन प्रभावित नहीं हो। इसका नतीजा है कि उत्तर पश्चिम भारत में मानसून की अवधि बढ़ी है, और मध्य भारत में 10-15 दिन अवधि कम हुई है। वहीं पेनिनसुलर भारत में मानसून की अवधि में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इस तरह से किसानों को मध्य भारत में अपनी खरीफ खेती की गतिविधियों को किसान एक सप्ताह से दो सप्ताह आगे बढ़ा सकते हैं।

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मिशन मौसम’ से पूर्वानुमान की सटीकता कितनी बेहतर होगी?
इससे काफी बदलाव आएंगे। अभी हमारे पास 40 मौसम राडार हैं। इससे 85 प्रतिशत देश का क्षेत्रफल कवर होता है। अगले दो वर्षों में मिशन मौसम के अंतर्गत ये राडार बढ़कर 126 हो जाएंगे। इससे हर जगह मौसम राडार होंगे, जिससे पहाड़ों, समतल और समुद्री किनारे मौसम की बेहतर जानकारी मिल सकेगी। इससे जो कम समय के पूर्वानुमान हैं वो लगभग 100% सही होंगे। इसी के साथ 15 विंड प्रोफाइलर और 25 माइक्रोवेव रेडियोमीटर होंग जिससे लगातार हवा और आर्द्रता को जांचा जा सकेगा। इससे हर-हर मौसम और हर घर मौसम का लक्ष्य पूरा होगा। इसके बाद हम क्लाइमेट स्मार्ट देश बनने में सक्षम होंगे।

पहले जैसे हम पूरे देश का औसत वर्षा पूर्वानुमान देते थे, आज अलग-अलग हिस्सों में कैसे होगी, उसकी जानकारी पहुंचा रहे हैं। जो किसानों के लिए काफी सहायक होगी। हर दिन हम जिला स्तर पर दो बार बारिश के पूर्वानुमान की जानकारी देते हैं, कि किस जिले में कितनी बारिश होगी। बारिश के मौसम में हम हर तीन घंटे पर पूर्वानुमान बताते हैं। मिशन मौसम से पूर्वानुमान ज्यादा सटीक होगा। इसके साथ-साथ इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ेगा तो पंचायत स्तर और गांव के स्तर पर मौसम के पूर्वानुमान को देना आसान होगा।

 मौसम विज्ञान विभाग कैसे जानकारी गांवों तक पहुंचा रहा है?
आईएमडी का जो पूर्वानुमान है इसमें 40-50 प्रतिशत का सुधार हुआ है। सेवाएं लोगों तक पहुंचाने के लिए कई कदम उठाए हैं। अभी ब्लॉक स्तर पर मौसम का पूर्वानुमान दे रहे हैं। साथ-साथ पंचायत स्तर पर भी मौसम के पूर्वानुमान की जानकारी पहुंचाई जा रही है।  पंचायत स्तर पर जानकारी पहुंचाने के लिए कई तरह के मॉडल्स पर काम कर रहे हैं। ब्लॉक स्तर पर एक व्हाट्सएप ग्रुप बना रहे हैं। जिसमें गांवों के पांच किसानों को जोड़ा जाए जिससे गांवों तक जानकारी पहुंचाई जा सके। इसके लिए हम इंफ्रास्ट्रक्चर को लगातार अपग्रेड कर रहे हैं। जो किसान मौसम की जानकारी के हिसाब से खेती करते हैं, उन्हें दूसरे किसानों की अपेक्षा 12,500 रुपये का फायदा होता है।

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किसानों को खुद को कैसे बदलना होगा?
हल्की बारिश के दिन कम हो रहे हैं। ज्यादा बारिश के दिन बढ़े हैं। कम समय में ज्यादा बारिश हो रही है। इससे मृदा का क्षरण होता है। तेज बारिश में पानी जमीन के अंदर सोख नहीं पाता। भूजल रिचार्ज कम हो जाता है। निचले क्षेत्रों में बाढ़ आ जाती है। ये संकट जलवायु परिवर्तन की वजह से बढ़ रहे हैं। बिजली गिरने की घटनाएं बढ़ी हैं। इससे सबसे अधिक किसानों को नुकसान हो रहा है।
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