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Soyabean Prices: MP में इस फसल को लेकर बड़े आंदोलन की तैयारी में किसान, क्यों 5 हजार गांवों पर है इतना फोकस?

Sat, 31 Aug 2024 05:39 PM IST
श्वेता महतो डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली।
डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: श्वेता महतो Updated Sat, 31 Aug 2024 05:39 PM IST
सार

आंदोलन के पहले चरण में सितंबर के पहले सप्ताह में हर गांव में ग्राम पंचायत सचिव को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिया जाएगा। आंदोलन के लिए संयुक्त किसान मोर्चा ने करीब 5000 गांव चुने हैं। अन्य गांवों में भी ज्ञापन के लिए किसानों से संपर्क किया जा रहा है।

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Soybean Prices: Farmers are preparing for a big movement regarding this crop in Madhya Pradesh
मध्य प्रदेश में मोहन सरकार के लिए मुसीबत बनेंगे अन्नदाता - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

 मध्यप्रदेश में किसान 1 सितंबर से बड़ा आंदोलन करने जा रहे हैं। ये आंदोलन सोयाबीन के उचित भाव नहीं मिलने को लेकर किया जा रहा है। राज्य में सोयाबीन की फसल का भाव पिछले 10 साल के सबसे निचले स्तर पर है। मौजूदा भाव 10 वर्ष पहले भी इतना ही था। इसे लेकर किसानों में काफी रोष है।
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दरअसल, पिछले कई दिनों से सोयाबीन के भाव को लेकर किसान सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं और लगातार पोस्ट डालकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। ऐसे में मध्यप्रदेश के सभी किसान संगठनों ने एक साथ आकर एक बड़े आंदोलन की तैयार की है। संयुक्त किसान मोर्चा के नेता राहुल राज ने अमर उजाला से कहा कि पिछले कई वर्षों से मध्यप्रदेश के किसान भारी वर्षा के कारण सोयाबीन में घाटा उठा रहे हैं। बावजूद देश को तिलहन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए किसानों ने सोयाबीन की बुवाई बंद नहीं की। सरकार खाद्य तेल में आयात-निर्यात की नीति किसान हितैषी नहीं, बल्कि कॉरपोरेट हितैषी है, इसलिए जब हमारी फसल बाजार में पहुंचती हैं, तो निर्यात बंद कर दिया जाता है और आयात खोल दिया जाता है। ऐसी स्थिति में कीमतें गिर जाती हैं, जो सही नहीं है।
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राज का कहना है कि सोयाबीन के दाम 10 साल पुराने दामों पर आ गए हैं। किसानों को 2013-14 में जो दाम मिल रहे थे, उसी दाम पर सोयाबीन बेचने को मजबूर हैं। पिछले कुछ सालों में सोयाबीन के दाम में लगातार गिरावट आ रही है। हर साल सीजन से पहले दाम गिर जाते हैं, लेकिन इस साल दाम गिरकर 3500 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गए हैं, इससे किसानों के लिए उत्पादन की लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। आज सोयाबीन का समर्थन मूल्य 4892 रुपये है। वर्तमान महंगाई के कारण जहां खाद, बीज, कीटनाशक सहित सभी कृषि संसाधन महंगे हैं, इस मूल्य में किसान की लागत पूरी तरह से निकल पाना संभव नहीं है। इसलिए राज्य सरकार को सोयाबीन के समर्थन मूल्य पर 1108 रुपये का अतिरिक्त बोनस देकर सोयाबीन का मूल्य 6000 रुपये प्रति क्विंटल तय करना चाहिए।
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गांवों में आंदोलनकी ये है प्लानिंग
आंदोलन के पहले चरण में सितंबर के पहले सप्ताह में हर गांव में ग्राम पंचायत सचिव को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिया जाएगा। आंदोलन के लिए संयुक्त किसान मोर्चा ने करीब 5000 गांव चुने हैं। अन्य गांवों में भी ज्ञापन के लिए किसानों से संपर्क किया जा रहा है। इस आंदोलन की रूपरेखा मध्यप्रदेश के सभी किसान संगठनों और सोयाबीन उत्पादक संघ की ओर से तय की गई है। इसके तहत सभी किसान सितंबर के पहले सप्ताह (1-7 सितंबर) में अपनी-अपनी ग्राम पंचायतों में सोयाबीन का मूल्य 6000 रुपये किए जाने के मुद्दे पर ज्ञापन देंगे।
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