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Karnataka HC: 'मां-बाप की अनदेखी पर प्रायश्चित का मौका नहीं', हाईकोर्ट ने कहा- देखभाल करना बच्चों का कर्तव्य
Fri, 14 Jul 2023 11:58 PM IST
गुलाम अहमद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
Published by: गुलाम अहमद
Updated Fri, 14 Jul 2023 11:58 PM IST
सार
Karnataka: कर्नाटक हाईकोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें दो भाइयों ने अपनी बुजुर्ग मां को गुजारा भत्ता देने से छूट की मांग की थी।
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Karnataka High Court
- फोटो : PTI
विस्तार
कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि जो बेटे अपने मां-बाप की देखभाल नहीं करते, उन्हें प्रायश्चित का मौका नहीं दिया जा सकता। भगवान की पूजा करने से पहले, माता-पिता, शिक्षकों और अतिथियों का सम्मान करना चाहिए, लेकिन आज की पीढ़ी मां-बाप की देखभाल करने में विफल हो रही है। इनकी संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है जो अच्छी बात नहीं है।
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जस्टिस कृष्ण एस. दीक्षित की पीठ ने दो भाइयों गोपाल और महेश की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह भी रेखाांकित किया कि विवाह अधिकारों को फिर से स्थापित करने के लिए एक कानून है, लेकिन मां को बेटों के साथ रहने के लिए मजबूर करने को लेकर कानून में कोई प्रावधान नहीं है।
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याचिकार्ताओं ने दिया ये तर्क
दोनों भाइयों ने दलील दी थी कि वे अपनी मां की देखभाल के लिए 10-10 हजार रुपये गुजारा भत्ता का भुगतान करने में सक्षम नहीं हैं। हालांकि भाइयों ने दावा किया कि वे अपनी मां की देखभाल करने के लिए तैयार हैं, लेकिन उनकी बहनें साजिश कर मां को अपने घर में रहने के लिए मजबूर कर रही हैं। लेकिन, कोर्ट इस तर्क से सहमत नहीं हुआ। कोर्ट ने कहा, एक बेटे को किराया मिल रहा है। अगर बेटियां न होती तो मां सड़क पर होती। जस्टिस दीक्षित ने मां की देखभाल करने के लिए बेटियों की सराहना की।
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पत्नी का रख सकते हैं ध्यान तो मां का क्यों नहीं
पीठ ने पूछा, अगर कोई आदमी पत्नी की देखभाल कर सकता है, तो वह अपनी मां की देखभाल क्यों नहीं कर सकता? पीठ ने वेदों और उपनिषदों का उल्लेख करते हुए कहा, मां की देखभाल करना बच्चों का कर्तव्य है। बुढ़ापे में मां की देखभाल बेटों को करनी चाहिए। चूंकि दोनों बेटे शारीरिक रूप से स्वस्थ हैं, इसलिए यह दावा नहीं किया जा सकता कि वे भरण-पोषण नहीं दे सकते। पीठ ने बेटों को अपनी मां को 20 हजार रुपये गुजारा भत्ता देने का भी आदेश दिया।