फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Sonowal or Himanta: discussion in BJP Parliamentary board meeting

सोनोवाल या हिमंत: भाजपा में माथापच्ची, संसदीय बोर्ड की बैठक में जानी गई सबकी राय

Fri, 07 May 2021 06:08 AM IST
Amit Mandal हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Fri, 07 May 2021 06:08 AM IST
सार

  • संघ सोनोवाल तो दोनों सहयोगी दल हिमंत के पक्ष में, शाह के निवास पर हुई बैठक

विज्ञापन
Sonowal or Himanta: discussion in BJP Parliamentary board meeting
Sarbanand Sonowal And Himanta biswa sarma - फोटो : PTI

विस्तार

असम में मुख्यमंत्री पद की गुत्थी सुलझाने के लिए बुधवार को गृह मंत्री अमित शाह के आवास पर पार्टी की संसदीय दल की बैठक हुई। इस बैठक में इस मुद्दे पर सभी पक्षों की राय ली गई। बैठक में संघ ने सोनोवाल को एक और मौका देने का सुझाव दिया। जबकि राज्य में पार्टी के दोनों सहयोगी यूपीपीएल और असम गण परिषद हिमंत विस्वा सरमा नए सीएम के रूप में देखना चाहते हैं।

विज्ञापन


करीब दो घंटे चली इस बैठक में पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा जहां शाह के आवास पर मौजूद थे। वहीं प्रधानमंत्री सहित बोर्ड के कई सदस्य वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से बैठक से जुड़े। खासबात यह है कि इस बैठक में असम के क्षेत्रीय प्रचारक उल्लास कुलकर्णी और संघ के पूर्वोत्तर के प्रभारी सुनील पांडे को खास तौर से आमंत्रित किया गया था। ये दोनो भी वीडियो कांफ्रेंस के जरिए बैठक में शामिल हुए। सूत्रों ने बताया कि फिलहाल इस पर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। बैठक में सभी पक्षों की राय ली गई है। संभवतऱ् इस संबंध में प्रधानमंत्री के स्तर पर कोई निर्णय लिया जाएगा।
विज्ञापन


गौरतलब है कि नतीजे आने के बाद पार्टी में पहली बार सीएम पद केसवाल पर मंथन हुआ है। इससे पहले केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को सोमवार को बतौर पर्यवेक्षक असम भेजने का फैसला हुआ था। हालांकि अचानक उनकी यात्रा रद्द कर दी गई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


असमंजस क्यों?
दरअसल असम विधानसभा चुनाव में पार्टी हिमंत की बनाई रणनीति के अनुसार चली है। टिकट वितरण से ले कर गठबंधन और मुद्दों के चयन में हिमंत की अहम भूमिका रही है। चुनाव से पहले पार्टी नेतृत्व ने सोनोवाल को सीएम पद का उम्मीदवार नहीं बना कर हिमंत को सीएम बनाने का संकेत दिया था। हालांकि चुनाव के बाद पार्टी को कई दूसरे पहलुओं पर भी विचार करना पड़ रहा है।

दरअसल दोबारा सत्ता हासिल होने के बाद संघ के साथ पार्टी का एक धड़ा सोनोवाल को ही कमान देना चाहता है। इनका तर्कहै कि सोनोवाल की छवि बेहद अच्छी है। बीते पांच साल में उन पर भ्रष्टाचार का एक भी आरोप नहीं लगा। केंद्रीय योजनाओं को उन्होंने बेहतर ढंग से जमीन पर उतारा। इसकेअलावा राज्य सरकार की ओर से कई योजनाएं लागू कीं। ऐसे में उन्हें दूसरा मौका नहीं देना सही नहीं होगा।


हिमंत की अनदेखी भी आसान नहीं
दूसरी ओर हिमंत पूर्वोत्तर की राजनीति में बेहद मजबूत चेहरा हैं। पार्टी में शामिल होने के बाद हिमंत ने पूर्वोत्तर के राज्यों में पार्टी का आधार बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है। फिर दोनों सहयोगियों के साथ पार्टी के आधे से अधिक विधायक हिमंत के पक्ष में हैं। हिमंत खुद भी सीएम बनना चाहते हैं। ऐसे में नेतृत्व के लिए उनकी अनदेखी भी आसान नहीं है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed