सदियों से गाई जाती हैं भारतीय सैनिकों के शौर्य, साहस, पराक्रम और बलिदान की गाथाएं
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भारतीय सेना के गौरवशाली इतिहास के बारे में चर्चा करने के लिए शब्द कम पड़ जाते हैं। भारतीय सेना का इतिहास विशिष्ट, उच्च स्तर का और गौरवशाली रहा है। भारतीय सेना की शौर्य गाथाएं किसी भी भारतीय का सीना गर्व से भर देती है। भारतीय सैनिकों के शौर्य, साहस, पराक्रम और बलिदान की गाथाएं सदियों से गाई जाती रही हैं। यह गाथाएं इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। शौर्य और साहस के अलावा भारतीय सेना सैन्य धर्म और चरित्रगत आचरण के लिए भी जानी जाती है। देश की रक्षा में हर पल तैनात रहने वाली भारतीय सेना ने अपने पराक्रम के 70 साल पूरे कर लिए हैं। इसी साल 15 जनवरी को सेना ने 70वां सेना दिवस मनाया। हर साल 15 जनवरी को सेना दिवस मनाया जाता है।
देश को आजादी मिलने के बाद सेना का भारतीयकरण हुआ। इससे पहले यह ब्रिटिश भारतीय सेना के रूप में मौजूद थी। स्वतंत्रा के बाद राष्ट्रीय सेना के रूप में इसका भारत की सीमाओं की रक्षा के प्रति उनका विधिवत समर्पण सुनिश्चित हुआ। सेना ने अपनी हर जिम्मेदारी को जान की बाजी लगाकर निभाया है।
बारहवीं शताब्दी से लेकर अब तक, फिर चाहे वह पृथ्वीराज चौहान, राजा पोरस, राणा सांगा, महाराणा प्रताप या शिवाजी के नेतृत्व में लड़ी हो अथवा प्रथम और द्वितीय विश्वयुद्ध में ब्रिटिश सेना के झंडे तले या आजादी के उसने चीन व पाकिस्तान के साथ युद्ध लड़ा हो, भारतीय सेना का इतिहास सैन्य दृष्टिकोण से बेहतरीन और गौरवपूर्ण रहा है।
1948 में हैदराबाद का विलय करने में सेना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गोवा दमन और दीव का विलय 1961 में सेना द्वारा किया गया। 1962 में भारत-चीन युद्ध हुआ। भारतीय सेना ने संयुक्त राष्ट्र शांति सेना में योगदान दिया। 1999 में कारगिल युद्ध लड़ा गया। इन युद्धों में हमारी सेना ने अपनी बहादुरी के परचम गाड़े हैं।
लोकसभा के आंकड़ों के अनुसार पिछले दो सालों के दौरान दुश्मनों से लड़ते हुए भारतीय सेना के 150 जवान शहीद हुए और साल 2015 में 85 सैनिक शहीद हो गए। पाकिस्तान सीमा पार से लगातार फायरिंग कर युद्ध विराम का उल्लंघन कर रहा है। पिछले साल दोनों देशों के बीच 971 बार और 2016 में 449 बार युद्धविराम का उल्लंघन हुआ है। बार-बार दुश्मन देश की नापाक हरकत के मद्देनजर सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक किया।
भारतीय सेना ने आजादी के ठीक बाद ही 1948 में पाकिस्तान से युद्ध लड़ा था। इसके बाद साल 1965, साल 1971, सियाचिन और साल 1999 में कारगिल में पाकिस्तान को हराया। लेकिन बावजूद इसके पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आता।
भारतीय सीमा में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने की बात हो या फिर चोरी-छुपे परमाणु हथियार बनाना। पाकिस्तान हमेशा भारत के लिए समस्या खड़ी करने से जुटा रहता है। लेकिन भारतीय सेना ने वो ताकत अर्जित कर ली है कि वो पाकिस्तान को हमेशा मुंहतोड़ जबाव दे सकता है।