केंद्र पर बरसीं सोनिया गांधी: कहा- लोकतंत्र पर चोट कर रही मोदी सरकार, रिजिजू बोले- आघात तो 1975 में लगा था
केंद्र में पीएम मोदी की अगुवाई वाली सरकार ने देश के लोकतंत्र के सभी तीन स्तंभों को व्यवस्थित रूप से खत्म किया है। सोनिया ने संसद में हुई हाल की घटनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने सत्रों को बाधित करना सरकार की रणनीति बताई।
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कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने एक अंग्रेजी अखबार के लिए लिखे एक संपादकीय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने 'जबरन चुप कराना भारत की समस्याओं को हल नहीं कर सकता' शीर्षक वाले लेख में कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान आज के सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों की उपेक्षा करने या इन मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए होते हैं।
लोकतंत्र के सभी स्तंभों को किया खत्म
उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र में पीएम मोदी की अगुवाई वाली सरकार ने देश के लोकतंत्र के सभी तीन स्तंभों को व्यवस्थित रूप से खत्म किया है। सोनिया ने संसद में हुई हाल की घटनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने सत्रों को बाधित करना सरकार की रणनीति बताई। कहा, विपक्ष को बेरोजगारी, मुद्रास्फीति, बजट, अदाणी घोटाला और सामाजिक विभाजन जैसे मामलों को उठाने से रोका गया।
बेजोड़ उपायों का सहारा ले रही सरकार
सोनिया गांधी ने लोकसभा सांसद के रूप में राहुल गांधी की अयोग्यता और उनके भाषण के कुछ हिस्सों को संसदीय रिकॉर्ड से निकाले जाने पर भी बात की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को एक मजबूत विपक्ष से मुकाबला करने के लिए बेजोड़ उपायों का सहारा लेना पड़ रहा है।
गौरतलब है, राहुल गांधी को मोदी सरनेम को लेकर की गई टिप्पणी के लिए सूरत की एक अदालत ने दोषी ठहराया था। जिसके बाद उन्हें लोकसभा सांसद के रूप में अयोग्य घोषित कर दिया गया। साथ ही उनके खिलाफ मानहानि के मामले में दो साल की जेल की सजा सुनाई गई थी।
बजट से ध्यान भटकाया
सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्रीय बजट 2023 को पारित करने के लिए इन्होंने कई ऐसे मुद्दे उठाए, जिससे लोगों का ध्यान भटक जाए, जिसमें लगभग 45 लाख करोड़ रुपये के खर्च की परिकल्पना की गई थी। नतीजतन, लोगों के पैसे का 45 लाख करोड़ रुपये का बजट बिना किसी बहस के पारित कर दिया गया।
वित्त मंत्री पर भी हमला
उन्होंने आगे कहा कि जब वित्त विधेयक लोकसभा के माध्यम से पारित किया गया था तब प्रधानमंत्री व्यापक मीडिया कवरेज के साथ अपने निर्वाचन क्षेत्र में परियोजनाओं के उद्घाटन में व्यस्त थे। सोनिया ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में बेरोजगारी या मुद्रास्फीति का उल्लेख भी नहीं किया। ऐसा लगता है जैसे ये समस्याएं हैं ही नहीं।
'केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग'
सोनिया गांधी ने विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोप ‘सरकार केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है’ के बारे में भी बात की। कहा कि 95 प्रतिशत से अधिक राजनीतिक मामले केवल विपक्षी दलों के खिलाफ दर्ज किए गए हैं। वहीं, जो लोग भाजपा में शामिल हो गए उन पर लगे सभी आरोप अचानक से गायब हो गए। वहीं सरकार ने मीडिया को डरा-धमका कर उसकी स्वतंत्रता छीन ली है।
पिछली साल नेशनल हेराल्ड केस में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी को कई बार समन भेजा था। समन के खिलाफ कांग्रेस पार्टी ने देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें आरोप लगाया था कि सरकार केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। वहीं, इस मार्च में 14 विपक्षी दलों ने अपने नेताओं को फंसाने के लिए ईडी और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
न्यायपालिका को नीचा दिखाने में लगी सरकार
यूपीए चेयरपर्सन ने कहा कि सरकार न्यायपालिका को नीचा दिखाने में लगी है। उन्होंने केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू की भाषा पर सवाल उठाए। सोनिया ने लिखा कि भाजपा और आरएसएस नेताओं के नफरती बयानों पर प्रधानमंत्री चुप्पी साधे रहते हैं। इसी तरह चीन के साथ सीमा विवाद के मसले पर भी सच नहीं बोलते। सोनिया ने लिखा है कि आने वाले दिन काफी अहम है। कांग्रेस पार्टी समान विचारों वाले दलों के साथ हाथ मिलाकर भारत के संविधान की रक्षा के लिए हर कोशिश करेगी।
कानून मंत्री रिजिजू ने दी प्रतिक्रिया
सोनिया गांधी के आलेख के बाद केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने बिना उनका नाम लिए सोशल मीडिया पर एक वीडियो के जरिए प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारतीय लोकतंत्र पर सिर्फ एक बार 1975 में आघात लगा था। हमने बाद में कानून व्यवस्था पर यकीन रखा और लोकतंत्र भारत के जनमानस में आज ही जिंदा है। निर्वाचित सरकार से आप आलोचनात्मक सवाल पूछिए, लेकिन अपने देश पर सवाल मत उठाइए। राष्ट्र के खिलाफ मत जाइए। समस्या तब होती है, जब कुछ लोगों को लगता है कि उन्हीं के पास इस देश को चलाने की ईश्वर प्रदत्त शक्ति है। अगर किसी परिवार या व्यक्तियों को लगता है कि वे सामान्य नागरिकों के ऊपर हैं और विशेषाधिकार प्राप्त पृष्ठभूमि से हैं तो उनकी विचारशीलता एक अलग ही स्तर पर चली जाती है। जब किसी को लगता है कि वह अदालतों से ऊपर है तो वह फैसलों की भी आलोचना करता है। संसद के अंदर और बाहर भी जो व्यक्ति सबसे ज्यादा बोलता है, वही व्यक्ति यह बयान देता है कि उसे बोलने की आजादी नहीं है। 1200 साल तक विदेशी ताकतों ने हमारे देश पर इसलिए शासन किया क्योंकि समाज के कुछ तत्वों ने हमेशा उनके लिए रास्ता आसान किया। कानून मंत्री ने आगे कहा कि कांग्रेस नेता सोनिया गांधी लोकतंत्र के बारे में व्याख्यान दे रही हैं? उनका यह बयान कि कांग्रेस न्यायपालिका की स्वतंत्रता के बारे में बात करने वाली पार्टी है, यह पाखंड भरा है।
Smt Sonia Gandhi is lecturing about Democracy? Congress Party talking about independence of Judiciary is : An illusory statement of the highest improbity. https://t.co/JUQmXhY4Sq pic.twitter.com/QAIb6KzvRP
— Kiren Rijiju (@KirenRijiju) April 11, 2023