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झटका: आवश्यक सूची की कुछ दवाएं अगले महीने से हो सकती हैं महंगी

Sun, 21 Mar 2021 06:06 AM IST
Amit Mandal अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Sun, 21 Mar 2021 06:06 AM IST
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Some medicines on the list of essentials can be expensive
दवाएं होंगी महंगी

कोरोना महामारी के बीच पेटेंट मुक्त 81 दवाएं सस्ती हुई हैं। वहीं आवश्यक सूची में शामिल कुछ दवाएं अगले महीने से महंगी हो सकती हैं। इसमें दर्द निवारक, एंटीइन्फेक्टिव, कार्डियक और एंटीबायोटिक्स समेत अन्य जरूरी शामिल हो सकती है।

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केंद्र सरकार ने सालाना खुदरा कीमत सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) के आधार पर कीमतों में बदलाव को अनुमति दे दी है। दवा कीमत पर नियंत्रण रखने वाली संस्था एनपीपीए ने शुक्रवार को कहा कि सरकार की ओर से 2020 के लिए डब्ल्यूपीआई में 0.5 फीसदी का वार्षिक बदलाव का नोटिफिकेशन जारी हुआ है। वहीं फार्मा कंपनियां इस बढ़ोतरी को लेकर खासी नाराज हैं। कंपनियों का कहना है कि दवा उत्पादन लागत में 15 से 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
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इस आधार पर कंपनियां दवाओं की कीमतों में औसतन 20 फीसदी की बढ़ोतरी की योजना बना रही हैं। हालांकि अब आने वाला समय ही बताएगा की नए वित्त वर्ष शुरू होने के बाद कंपनियां क्या फैसला लेती हैं और दवाओं की नई बाजार कीमत क्या होती है। कोरोना के इलाज में इस्तेमाल होने वाले हेपरिन इंजेक्शन की कीमत में सितंबर 2021 तक कोई बदलाव नहीं होगा।
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महामारी के कारण कीमताें में बढ़ोतरी
फार्मा कंपनियों की मानें तो सरकार ने जो दवा की कीमतों में वृद्धि की अनुमति दी है वो बहुत कम या न के बराबर है। कोरोना महामारी के दौरान कच्चा माला और पैकेजिंग समेत अन्य संसाधन की कीमतों में बढ़ोतरी हुई थी जिससे आपूर्ति कीमत बढ़ी थी। इसी आधार पर सरकार से इस बढ़ोतरी को ज्यादा करवाना है ताकि कंपनियां उत्पादन के साथ मुनाफा कमा सकें।




चीन पर निर्भरता से भी मुश्किल बढ़ी
हृदय, मधुमेह, एंटीबायोटिक, एंटीइन्फेक्टिव और विटामिन जैसी दवाओं का उत्पादन करने वाली अधिकतर कंपनियां जरूरी निर्माण सामग्री (एपीआई) चीन से आयात करती हैं। कुछ दवाओं के एपीआई के लिए चीन पर 80 से 90 फीसदी निर्भरता है। महामारी के कारण चीन ने एपीआई की कीमतों में 10 से 20 फीसदी तक की बढ़ोतरी की है। इससे दवा उत्पादन महंगा हुआ है।

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