नर्सों को 12 घंटे की ड्यूटी के बाद घर जाने के लिए बस तक नहीं दे रहे ये अस्पताल
दिल्ली के पांच ईएसआईसी अस्पतालों में 800 नर्सें, 2000 एएनएम और 200 पब्लिक हेल्थ नर्सिंग अफसर कार्य कर रहे हैं। केंद्र और दिल्ली सरकार अपने अस्पतालों में काम करने वाली नर्सों को आने-जाने की सुविधा दे रहे हैं।
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कोरोना की लड़ाई में ईएसआईसी के अस्पतालों से जुड़ी नर्सें दिन-रात पीड़ितों की सेवा कर रही हैं, लेकिन दस-बारह घंटे की ड्यूटी के बाद भी उन्हें घर से अस्पताल तक आने-जाने के लिए अस्पताल प्रशासन बसें नहीं उपलब्ध करा रहा है। आरोप है कि बसों की सुविधा देने के बदले में उनसे पैसे मांगे जा रहे हैं, जबकि केंद्र और दिल्ली सरकार अपने अस्पतालों की नर्सों के लिए मुफ्त आवागमन की सुविधा प्रदान कर रहे हैं।
ड्यूटी के दौरान भी कई जगहों पर उन्हें बैठने, खाने या आराम करने के लिए साफ जगह तक नहीं मिल पा रही है। ऐसे में उनके लिए कोरोना संक्रमण के खतरे के बीच सुरक्षित ढंग से काम करना मुश्किल हो गया है। ईएसआईसी के नोएडा और रोहिणी केंद्रों पर कोरोना वार्ड बनाये गए हैं। यहां इनके अलावा अन्य मरीजों का भी इलाज किया जा रहा है।
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अधीन हैं ईएसआईसी अस्पताल
ऑल इंडिया गवर्नमेंट नर्सिंग फेडरेशन की अध्यक्ष अनिता पवार ने अमर उजाला को बताया कि नर्सों के काम करने का समय निर्धारित नहीं है। अस्पताल अपनी-अपनी जरूरत के हिसाब से उनसे 10-12 घंटे तक का काम ले रहे हैं। लेकिन इस कड़ी ड्यूटी के बाद भी उन्हें घर से आने-जाने के लिए बस की सुविधा नहीं दी जा रही है। बस की मांग किए जाने पर अस्पताल उन बसों का भुगतान नर्सों से करने की मांग कर रहा है। ऐसा तब है कि जब दिल्ली सहित अन्य सरकारें अपने स्वास्थ्यकर्मियों के लिए अतिरिक्त सुविधा उपलब्ध करा रही हैं।
कितने अस्पताल, कितनी नर्सें
दिल्ली-एनसीआर में पांच ईएसआईसी अस्पताल हैं जो रोहिणी, ओखला, झिलमिल, नोएडा और बसई धारपुर में बने हुए हैं। इन अस्पतालों में लगभग 800 नर्सें दिन-रात सेवा कर रही हैं। इनके अलावा 2000 एएनएम और 200 पब्लिक हेल्थ अफसर भी काम कर रहे हैं। नर्सें दिल्ली के अलग-अलग क्षेत्रों में रहती हैं। दिल्ली मेट्रो और सार्वजनिक बसों की सुविधा बंद हो जाने के कारण उन्हें अपने वाहन से घर से अस्पताल तक आने-जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। लेकिन जिन नर्सों के पास अपने निजी वाहन नहीं हैं, उन्हें अपनी ड्यूटी निभाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इन्हें मिल रही आवागमन की सुविधा
दिल्ली के एम्स अस्पताल में लगभग पांच हजार नर्सें काम करती हैं। अस्पताल प्रशासन ने उन्हें आवागमन की सुविधा दे रखी है। इसके अलावा केंद्र सरकार के अंतर्गत विभिन्न अस्पतालों में पांच हजार नर्सें, दिल्ली सरकार के विभिन्न अस्पतालों में दस हजार नर्सें काम करती हैं। सबको आवागमन के लिए बसों की सुविधा दी गई है। मुंबई के ईएसआईसी अस्पतालों में काम करने वाली नर्सों के लिए वहां का नगर निगम भुगतान कर रहा है।
लैब टेक्नीशियनों की भी समस्या
नर्सों की तरह लैब टेक्नीशियनों को भी इसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जबकि टेस्ट इत्यादि की आवश्यकता बढ़ जाने के कारण इस समय उनकी भी अतिरिक्त ड्यूटी लग रही है। एक कर्मचारी के मुताबिक उन लोगों को अपने निर्धारित काम के अलावा अस्पताल प्रशासन के द्वारा अलग-अलग काम सौंपे जा रहे हैं। स्टाफ सीमित होने के नाते उन्हें सभी काम करने पड़ रहे हैं।
यह है बसों का किराया
दिल्ली परिवहन बस सेवा ने उसकी बसों की सेवा लेने के लिए जो किराया तय किया है, उसके मुताबिक एक किलोमीटर दूरी के लिए एक नॉन एसी लो फ्लोर बस की सेवा के लिए 60 रुपए और एसी बसों के लिए 75 रुपये निर्धारित है। एक दिन नॉन एसी की बुकिंग के लिए तीन हजार रुपये (50 किलोमीटर तक की सेवा के लिए) और एसी बसों के लिए 106.6 किलोमीटर तक के लिए 8000 रुपये (बसें सेंटर पर रोकने का चार्ज अतिरिक्त) निर्धारित हैं। अगर बसों को सेंटरों पर रोकने की आवश्यकता पड़ती है तो इसके नॉन एसी बसों के लिए 400 रुपए प्रति घंटा और एसी बसों के लिए 800 रुपए प्रति घंटा देना पड़ता है।