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सियाचिन में देश की सेवा कर चुका है ये जवान, अब खुद को भारतीय साबित करने की लड़ रहा लड़ाई

Sat, 23 Feb 2019 09:39 AM IST
Shilpa Thakur न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Shilpa Thakur Updated Sat, 23 Feb 2019 09:39 AM IST
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Soldier Shahidul Islam is fighting for Indian Citizenship
प्रतीकात्मक तस्वीर

असम के बारपेटा जिले के निवासी और भारतीय सेना में सूबेदार के पद पर तैनात शाहिदुल इस्लाम (43) आज खुद को भारतीय साबित करने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। शाहिदुल अभी कोलकाता में तैनात हैं। उनका कहना है कि वह उत्तरी कश्मीर के बारामुला में भी अपनी सेवा दे चुके हैं। और कोलकाता में बीते साल अक्तूबर में पोस्टिंग से पहले वह सियाचीन में तैनात थे।


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शाहिदुल अब बारपेटा जिले में विदेशियों के ट्रिब्यूनल नंबर 11 में खुद को भारतीय नागरिक साबित करने के लिए केस लड़ रहे हैं। उनका कहना है, "मैं कश्मीर, कारगिल और सियाचिन में तैनात रह चुका हूं। मैं अपने देश से बहुत प्यार करता हूं और उसकी रक्षा के लिए खड़ा हूं। लेकिन जब अपने घर (असम) गया तो मुझे एक संदिद्ध नागरिक के रूप में देखा गया।"

नागरिकता मामले पर अब 18 मार्च को सुनवाई होगी। शाहिदुल का कहना है कि अगर वह पोस्टिंग पर रहे तो सुनवाई के लिए मौजूद नहीं हो पाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सीमा पुलिस ने उनके परिवार के खिलाफ साल 2003 में मामला दर्ज किया था। उन्होंने कहा कि विदेशियों के कोर्ट में पेश होने वाला पहला नोटिस बीते साल अक्तूबर में आया था। उस नोटिस में शाहिदुल, उनके भाई और मां को 9 नवंबर को पेश होने को कहा गया था।

शाहिदुल के भाई माजानुर अली (27) सीआईएसएफ और देलबोर अली (29) साल 2010 से सेना के मेडिकल डिपार्टमेंट में तैनात हैं। वहीं शाहिदुल के पिता अब्दुल हामिद, जिनकी साल 2005 में मौत हो चुकी है, उन्हें भी एक संदिग्ध नागरिक के तौर पर देखा गया था।

हालांकि 852 लाइट रेजिमेंट के कमांडिंग अफसर कर्नल हरी नायर ने असम के मुख्यमंत्री को 20 दिसंबर को लिखे पत्र में कहा था कि शाहिदुल उनकी कमांड में हैं। साथ ही पत्र में लिखा गया है कि शाहिदुल और उनके भाई को सेना में भर्ती करने से पहले भारतीय नागरिक माना गया था। 

सीमा पुलिस के सूत्रों का कहना है कि शाहिदुल इस्लाम और उनके परिवार के खिलाफ मामला साल 2003 में बनाया गया था। और उन्हें दिसंबर 2018 में सरभोग में विदेशियों के ट्रिब्यूनल से नोटिस मिला था।

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