अगर हमला हुआ तो जवाबी कार्रवाई में गोलियां नहीं गिनेंगे हम: राजनाथ सिंह
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भारत ने कभी किसी पर हमला नहीं किया, लेकिन हमला हुआ तो हम जवाबी कार्रवाई करेंगे और इस दौरान गोलियां नहीं गिनेंगे। यह बात केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को पाकिस्तान से लगती देश की पश्चिमी सीमा पर सुरक्षा का जायजा लेने के बाद कही।
उड़ी हमले और भारतीय सेना की सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच पैदा हुए तनाव के बीच राजनाथ सिंह सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए राजस्थान के दौरे पर हैं। शनिवार को सिंह बीएसएफ के मुनाबावो सीमा चौकी पहुंचे। यहां उन्होंने जवानों को आश्वस्त किया कि सरकार सीमा पर ढांचागत विकास के लिए हर जरूरी कदम उठाएगी।
गृह मंत्री ने कहा कि हमारी परंपरा वसुधैव कुटुम्बकम की है। इसका अर्थ है कि पूरी दुनिया एक परिवार है। हम किसी अन्य की भूमि कब्जाना नहीं चाहते। अपने राजस्थान दौरे के दूसरे दिन शनिवार को बीएसएफ जवानों को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि हमने कभी भी पहले फायरिंग नहीं की, लेकिन हमला हुआ तो जवाबी कार्रवाई में कारतूसों की गिनती नहीं करेंगे।
जैसलमेर जिला मुख्यालय से 125 किलोमीटर दूर मुरार व नलका सीमा चौकी का जायजा लेने के बाद राजनाथ सिंह ने सैनिकों की हौसला आफजाई की और कहा कि वे वर्तमान हालातों को लेकर किसी तरह का तनाव न लें। केंद्र सरकार और पूरा देश सेना के साथ है। सिंह ने दुर्गम इलाकों में रहकर देश को सुरक्षा मुहैया करवाने के लिए जवानों को सलाम किया।
चौकियों से देखी सीमा पार की हलचल
गृह मंत्री ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि जिस तरह किसान जान लगाकर अपने खेतों की रक्षा करता है, वैसे ही सीमा पर सैनिक देश के लिए जान लड़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सेना अपने देश की सुरक्षा को अभेद बनाने में रात दिन जुटी हुई है और अपने काम को बेहतर तरीके से निभा रही है।
राजनाथ सिंह जवानों के बीच करीब दो घंटे रहे। उनके साथ केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू, सीमा सुरक्षा बल के महानिदेशक केके शर्मा, राजस्थान सीमांत के आईजी डॉ. बीआर मेघवाल, डीआईजी रवि गांधी समेत सीमा सुरक्षा बल के अन्य अधिकारी मौजूद थे।
चौकियों से देखी सीमा पार की हलचल
राजनाथ सिंह जिन चौकियों पर गए वहां सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी हासिल करने के साथ ही तारबंदी को भी देखा। गृह मंत्री बाड़मेर जिले में स्थित मुनाबाव सीमा चौकी पर भी पहुंचे। वे सैंड स्कूटर से सबसे मुश्किल सीमा क्षेत्र शाहगढ़ बल्ज की मुरार पर पहुंचे। यहां चौकी पर ऊपर चढ़कर उन्होंने सीमा पार की गतिविधियों पर भी नजर डाली। अधिकारियों ने उन्हें इस क्षेत्र में शिफ्ट होने वाले रेतीले टीलों के कारण तारबंदी के हवा में लटक जाने की समस्या से अवगत कराया।