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इसलिए कांग्रेस को बसपा से समझौता टूटने की नहीं है परवाह

Tue, 25 Sep 2018 05:59 AM IST
शरद गुप्ता, अमर उजाला, नई दिल्ली
शरद गुप्ता, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 25 Sep 2018 05:59 AM IST
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So Congress does not care to break the agreement with BSP
बसपा प्रमुख मायावती व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी (फाइल फोटो)

दो महीने बाद होने वाले छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के लिए बहुजन समाज पार्टी द्वारा अजीत जोगी की जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ से साथ तालमेल को कांग्रेस अपने लिए कोई बड़ा खतरा नहीं मान रही है क्योंकि  बसपा का राज्य में जनाधार लगातार घटता जा रहा है। पिछले चुनाव में बसपा ने सभी 90 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से 84 की जमानत जब्त हो गई थी। कई सीटों पर बसपा को एक हजार से भी कम वोट मिले।

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राज्य के 2003 में हुए पहले चुनाव में बसपा ने दो सीटें जीती थीं और वह छह सीटों पर दूसरे स्थान पर थी। उसे लगभग सात फीसदी वोट मिले थे। 2008 में हुए अगले चुनाव में भी उसे दो ही सीटों पर सफलता मिली लेकिन एक ही सीट पर वह दूसरे स्थान पर आने में कामयाब हो पाई और वोट प्रतिशत भी घट कर 6.1 रह गया।
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2013 के विधानसभा चुनाव में बसपा केवल एक सीट ही जीत पाई, दो सीटों पर उसके उम्मीदवार दूसरे स्थान पर रहे और मत प्रतिशत और भी कम होकर सवा चार फीसदी ही रह गया। छत्तीसगढ़ में केवल पांच-सात सीटें ही ऐसी हैं जहां पिछले पंद्रह सालों में बसपा कुछ बेहतर प्रदर्शन कर पाई है। ये हैं- पामगढ़, अकलतारा, सारंगगढ़, जयजयपुर, कसडोल, बिलाईगढ़ और चंद्रपुर। बाकी सीटों पर बसपा उम्मीदवारों को पांच-छह हजार वोट ही मिल पाए।
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बिलासपुर सीट पर भाजपा ने कांग्रेस को साढे़ पंद्रह हजार वोटों से हराया लेकिन बसपा को केवल 670 वोट मिले। इसी तरह मोहाला में बसपा उम्मीदवार अंतिम स्थान पर रहा तो कोंडागांव, चित्रकोट और बीजापुर में नीचे से दूसरे नंबर पर। कुल 90 में से 44 विधानसभा सीटों पर बसपा को तो नोटा से भी कम वोट मिले।

वहीं दूसरी ओर भाजपा की 50 सीटों के मुकाबले कांग्रेस को भले ही 39 सीटें मिलीं हों लेकिन दोनों दलों को पूरे राज्य में मिले वोटों में अंतर महज 97 हजार (0.7 प्रतिशत) का ही था। राज्य में कुल 1.30 करोड़ वैध मत पड़े थे।
 

बसपा नहीं थी गंभीर

कांग्रेस का मानना है कि बसपा शुरू से ही समझौता करने पर गंभीर नहीं थी। यह तभी जाहिर हो गया जब उन्होंने 20 सीटों पर दावेदारी पेश की। कांग्रेस के तर्कों से सहमत होकर उन्होंने अपनी मांग घटा कर पहले 15 फिर 12 और अंत में नौ कर दी। कांग्रेस पांच सीटें देने को तैयार थी।

पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रदेश प्रभारी पीएल पूनिया को निर्देश दिए थे कि भले ही उन्हें एक-दो सीट छोड़नी पड़े तो भी बसपा से समझौता होना चाहिए। कांग्रेस इंतजार करती रही लेकिन बसपा ने उत्तर देने के बजाए अजीत जोगी से समझौता कर 35 सींटे लड़ने का फैसला कर लिया।

मांगी एक फीसदी वोट पाने वाली सीटें
बसपा का प्रदेश अध्यक्ष ओम प्रकाश बचपाई और राज्य सभा सदस्य एमबी भारती ने जब कांग्रेस से सीटों के बंटवारे की बात शुरू की तो उन्होंने जगदलपुर और अतागढ़ जैसी सीटों की मांग की जहां पिछले चुनाव में बसपा उम्मीदवारों को क्रमश: 2009 और 1667 वोट मिले थे।

अन्य राज्यों में उम्मीद बाकी
कांग्रेस और बसपा दोनों का ही मानना है कि छत्तीसगढ़ में समझौता नहीं होने का असर उनके मध्य प्रदेश और राजस्थान में संभावित तालमेल पर नहीं पड़ेगा। मध्य प्रदेश में जिन 22 सीटों के उम्मीदवार बसपा ने घोषित किए हैं उनमें से केवल चार सीटों पर ही पिछली बार कांग्रेस जीती थी।
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