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तो क्या यही है स्मृति ईरानी के डिमोशन की असली वजह?

Wed, 06 Jul 2016 02:19 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Wed, 06 Jul 2016 02:19 PM IST
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Smriti Irani’s move to Textiles aimed at Uttar Pradesh polls?
क्या वाकई में स्मृति ईरानी से मानव संसाधन विकास मंत्रालय लेकर कपड़ा मंत्रालय देना उनकी डिमोशन है या फिर इस कदम के पीछे पीएम मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की गहरी रणनीति है? ये रणनीति उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर तैयार की गई है।
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दरअसल जैसे हालात दिखाई दे रहे हैं उस पर गौर करें तो कांग्रेस की ओर से यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर प्रियंका गांधी का नाम बार-बार सामने आ रहा है। मीडिया में भी ऐसी खबरें चल रही हैं कि प्रियंका गांधी 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की ओर से मोर्चा संभाल सकती हैं।
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इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक इन्ही खबरों के चलते कहीं बीजेपी आलाकमान ने ये रणनीति तो नहीं बनाई? अगर कांग्रेस, प्रियंका गांधी को यूपी में उतारती है तो संभव है कि बीजेपी भी स्मृति इरानी को उनके खिलाफ मैदान में उतार दे।
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फिलहाल सोशल मीडिया पर ऐसी चर्चाएं हैं कि मानव संसाधन मंत्री रहते हुए स्मृति ईरानी लगातार विवादों में घिरी रहीं, जिसके चलते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका मंत्रालय बदल दिया। उन्हें कपड़ा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं कुछ लोग इसे बीजेपी के रणनीतिक कदम के तौर पर देख रहे हैं।

क्या प्रियंका गांधी से होगा स्मृति का मुकाबला?

Smriti Irani’s move to Textiles aimed at Uttar Pradesh polls?
स्मृति ईरानी, जिन्हें 2014 के आम चुनाव में बीजेपी ने अमेठी से कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ मैदान में उतारा था। उस समय नरेंद्र मोदी ने एक चुनावी रैली के दौरान स्मृति को 'छोटी बहन' कहकर सबके सामने पेश किया था।

हालांकि स्मृति ईरानी लोकसभा चुनाव राहुल गांधी से हार गई थी। बावजूद इसके स्मृति अमेठी से लगातार जुड़ी रही। उन्होंने हार के बाद भी कई बार अमेठी का दौरा किया और विकास के मुद्दे पर राहुल गांधी को घेरने की कोशिश की।

उन्होंने अमेठी में महिलाओं की बेहतरी के लिए कई कदम उठाए। 2015 में जब मोदी सरकार ने एक साल पूरा किया तो उस समय स्मृति ने अमेठी की जनता से कहा कि भले ही आपसे चूक हो गई हो, लेकिन आपके साथ मेरा रिश्ता अभी मजबूत है।

इस साल मई में जब स्मृति ने अमेठी का दौरा किया तो उन्होंने कहा कि 60 साल बीतने के बाद भी यहां के लोग अभी तक इस योग्य नहीं हुए हैं कांग्रेस परिवार का दरवाजा खटखटा सकें। नेहरू-गांधी परिवार ने अपने वादे को अब तक पूरा नहीं किया है। इन कारणों से मैं राहुल गांधी की जीत को 80 फीसदी मार्जिन से नकारती हूं।

यूपी चुनाव के मद्देनजर बदला गया स्मृति का मंत्रालय?

Smriti Irani’s move to Textiles aimed at Uttar Pradesh polls?
बीजेपी लगातार उत्तर प्रदेश को लेकर एक चेहरे की तलाश कर रही है। पिछले कुछ महीनों के दौरान हुए चुनावी सर्वे में बीजेपी की ओर से जो नाम उभरकर सामने आ रहे हैं उनमें केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह और बीजेपी सांसद वरुण गांधी का नाम सबसे ऊपर है। दोनों नेताओं के बीच सर्वे में कांटे की जंग देखी जा रही है।

दूसरी ओर सर्वे में स्मृति ईरानी को उतनी लोकप्रियता नहीं दिख रही। ऐसे में अगर प्रियंका गांधी को कांग्रेस की ओर से आगे किया गया तो बीजेपी रणनीति के तहत स्मृति को लेकर अहम फैसला कर सकती है। हालांकि प्रियंका गांधी पिछले कुछ चुनावों में अमेठी और रायबरेली के अलावा दूसरे किसी भी जगह पर चुनावी कैंपेन करने से इंकार कर दिया था।

इस बार कांग्रेस प्रियंका गांधी को लेकर बड़ी योजना बना रही है। कांग्रेस पार्टी को उम्मीद है कि प्रियंका गांधी की वाकपटुता का फायदा उसे यूपी विधानसभा चुनावों में जरूर मिलेगा। ये जादू राहुल गांधी के अंदाज में अब तक फेल नजर आ रहा है। अगर प्रियंका गांधी यूपी चुनाव में प्रचार के लिए तैयार होती हैं तो पार्टी प्रदेश में उनकी 150 रैली करने की योजना बना रही है।

यूपी चुनाव में बीजेपी की ओर से कौन होगा सीएम उम्मीदवार?

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प्रियंका गांधी के सामने आने के बाद अगर बीजेपी की ओर से टक्कर देने के लिए कोई बड़ा नाम उभर रहा है तो वह और कोई नहीं स्मृति इरानी ही हैं। चुनावी गणित को समझें तो जब स्मृति राहुल गांधी के खिलाफ लोकसभा चुनाव में उतरी थी तो उन्हें तीन लाख सात सौ अड़तालिस वोट मिले थे, जबकि राहुल गांधी को चार लाख आठ हजार छह सौ इक्यावन वोट मिले।

अगर वर्तमान के सियासी परिदृश्य पर नजर डालें तो राहुल गांधी के चचेरे भाई वरुण गांधी भी बीजेपी के लिए अहम रोल अदा कर सकते हैं। वरुण, गांधी परिवार के मुकाबले में मजबूत दावेदार नजर आ रहे हैं।

हालांकि स्मृति ईरानी से जब यूपी में सीएम उम्मीदवार के तौर पर उनके रोल के बारे में पूछा गया तो वह इसका जवाब देने से बचती नजर आई। स्मृति ने कहा कि मैं पार्टी की कर्मठ कार्यकर्ता हूं और पार्टी मेरे बारे में जो भी फैसला लेगी मैं उसे मानूंगी।
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