फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Six thousand units of blood saved by detecting anemia with AI

सफलता: एआई से एनीमिया की जांच कर बचाया छह हजार यूनिट रक्त, भारतीय वैज्ञानिकों ने विकसित की है नई तकनीक

Thu, 01 Aug 2024 06:33 AM IST
विशांत श्रीवास्तव परीक्षित निर्भय
परीक्षित निर्भय Published by: विशांत श्रीवास्तव Updated Thu, 01 Aug 2024 06:33 AM IST
सार

 एनीमिया जांचने वाली एआई आधारित स्वदेशी तकनीक से अब तक मरीजों का छह हजार यूनिट से ज्यादा रक्त बेकार होने से बचाया गया है। साथ ही पुराने तरीके की जांच से पैदा होने वाले करीब 16 टन चिकित्सकीय अपशिष्ट में भी कमी आई है और करीब 81 करोड़ रुपये की बचत हुई है। इन परिणामों के साथ यह भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र की सबसे बड़ी खोज बना है।

विज्ञापन
Six thousand units of blood saved by detecting anemia with AI
एनीमिया की समस्या - फोटो : istock

विस्तार

नई दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के मुताबिक, एक लंबी खोज के बाद भारतीय वैज्ञानिकों ने नॉन इनवेसिव हीमोग्लोबिन स्क्रीनिंग डिवाइस तैयार की है। किसी भी व्यक्ति में हीमोग्लोबिन का स्तर पता लगाने के लिए इस उपकरण का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए मरीज से रक्त नमूना लेने की जरूरत नहीं पड़ती है। आईसीएमआर के अनुसार, जब भी एनीमिया की जांच की जाती है तो व्यक्ति से सीरिंज के जरिये रक्त निकाला जाता है। करीब तीन से 10 एमएल तक रक्त लेकर प्रयोगशाला में जांच करते हैं और फिर बचा हुआ रक्त चिकित्सकीय अपशिष्ट में फेंक दिया जाता है। इस प्रक्रिया में समय, रक्त और बजट तीनों काफी खर्च होते हैं।
विज्ञापन


महिलाएं ज्यादा प्रभावित
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 5 (2019-21) के अनुसार, एनीमिया की व्यापकता पुरुषों (15-49 वर्ष) में 25.0 फीसदी और महिलाओं (15-49 वर्ष) में 57.0 फीसदी है। वहीं, किशोर (15-19 वर्ष) में यह 31.1 फीसदी और किशोरियों में 59.1 फीसदी है। इनके अलावा 15 से 49 वर्ष तक की 52.2 फीसदी गर्भवती महिलाओं में हीमोग्लोबिन का स्तर कम है, जिन्हें एनीमिया ग्रस्त माना जा सकता है। इसी तरह छह से 59 माह तक के करीब 67.1 फीसदी बच्चे एनीमिया की चपेट में हैं।
विज्ञापन


46 टन कार्बन का उत्सर्जन भी नहीं हुआ
आईसीएमआर के मुताबिक, नॉन इनवेसिव हीमोग्लोबिन स्क्रीनिंग डिवाइस को जमीनी स्तर पर ले जाने के लिए बॉश और इजेआरएक्स कंपनी के साथ समझौता हुआ है। इन्होंने अब तक 24 लाख से ज्यादा लोगों में एनीमिया की जांच की है, जिसके जरिये 6,075 यूनिट रक्त की बचत हुई है। कुल 24,49,210 में 16.28 लाख महिला और 8.20 लाख पुरुष शामिल हैं। इस प्रक्रिया के जरिये करीब 46 टन कार्बन उत्सर्जन भी कम होने का दावा किया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed